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Jabalpur: बंसल कंस्ट्रक्शन के दो निवेशकों को सशर्त जमानत, NHAI अफसरों को घूस देने के आरोप में किया था गिरफ्तार
Wed, 03 Apr 2024 10:43 PM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 03 Apr 2024 10:43 PM IST
सार
सड़क निर्माण का ठेका पाने के लिए एनएचएआई अधिकारियों को रिश्वत देने के आरोप में सीबीआई ने कंपनी के दो निदेशकों सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। हाईकोर्ट ने दो निवेशकों को सशर्त जमानत दी है।
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मप्र हाईकोर्ट
- फोटो : file photo
विस्तार
मप्र हाईकोर्ट से बंसल कंस्ट्रक्शन वर्कर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों अनिल बंसल व कुणाल बंसल को राहत मिली है। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने मामले में निवेशकों को इस शर्त पर जमानत प्रदान की है वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे और गवाहों को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करेंगे। न्यायालय की अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जाएंगे। एकलपीठ ने दस लाख के मुचलके पर उन्हें जमानत प्रदान की है।
उल्लेखनीय है कि सड़क निर्माण का ठेका पाने के लिए एनएचएआई अधिकारियों को रिश्वत देने के आरोप में सीबीआई ने कंपनी के दो निदेशकों सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। कंपनी और एनएचएआई के कुछ अन्य कर्मचारियों को भी गिरफ्तार किया गया था। भोपाल की सीबीआई विशेष अदालत ने 12 मार्च को कंपनी के निवेशकों की जमानत अर्जी इस टिप्पणी के साथ निरस्त कर दी थी कि उनके विरुद्ध आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। जिसके बाद दोनों निवेशकों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। बुधवार को सुनवाई दौरान आवेदकों की ओर से कहा गया कि उनके मुवक्किल 3 मार्च से जेल में निरुद्ध है। इतना ही नहीं उन पर सिर्फ आरोप हैं ऐसे कोई साक्ष्य नहीं है कि उन्होंने अपने कर्मियों को एनएचएआई के कर्मियों को रिश्वत देने के लिए कहा हो। वहीं सीबीआई की ओर से जमानत अर्जी पर विरोध जताया गया। सुनवाई पश्चात न्यायालय ने दोनों निवेशकों को सशर्त जमानत पर रिहा किए जाने के निर्देश दिए।
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उल्लेखनीय है कि सड़क निर्माण का ठेका पाने के लिए एनएचएआई अधिकारियों को रिश्वत देने के आरोप में सीबीआई ने कंपनी के दो निदेशकों सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। कंपनी और एनएचएआई के कुछ अन्य कर्मचारियों को भी गिरफ्तार किया गया था। भोपाल की सीबीआई विशेष अदालत ने 12 मार्च को कंपनी के निवेशकों की जमानत अर्जी इस टिप्पणी के साथ निरस्त कर दी थी कि उनके विरुद्ध आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। जिसके बाद दोनों निवेशकों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। बुधवार को सुनवाई दौरान आवेदकों की ओर से कहा गया कि उनके मुवक्किल 3 मार्च से जेल में निरुद्ध है। इतना ही नहीं उन पर सिर्फ आरोप हैं ऐसे कोई साक्ष्य नहीं है कि उन्होंने अपने कर्मियों को एनएचएआई के कर्मियों को रिश्वत देने के लिए कहा हो। वहीं सीबीआई की ओर से जमानत अर्जी पर विरोध जताया गया। सुनवाई पश्चात न्यायालय ने दोनों निवेशकों को सशर्त जमानत पर रिहा किए जाने के निर्देश दिए।
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