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MP News: नहीं खेल सकते लोगों की जान से, हाईकोर्ट ने कहा- दो पहिया वाहन सवारों के सिर पर होना चाहिए हेलमेट
Mon, 07 Nov 2022 07:54 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 07 Nov 2022 07:54 PM IST
सार
हेलमेट को लेकर सख्ती नहीं होने का मामला हाईकोर्ट में है। जनहित याचिका में कहा गया था कि अधिकांश सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से सिर में चोट आने के कारण दो पहिया वाहन सवारों की मौत होती है।
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प्रदेश में हेलमेट को लेकर सख्ती नहीं बरती जाती।
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
हेलमेट नहीं लगाने के कारण सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि मोटर व्हीकल एक्ट में हेलमेट लगाकर दो पहिया वाहन चलाने का प्रावधान है, जिसका सख्ती से पालन नहीं किया जाता है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने सरकार की तरफ से पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दो पहिया वाहन सवारों के सिर में हेलमेट होना चाहिए। लोगों की जान से नहीं खेल सकते। अगली सुनवाई दिसंबर के पहले सप्ताह में होगी।
बता दें कि लॉ स्टूडेंट ऐश्वर्या शांडिल्य की तरफ से सड़क दुर्घटना में हुई दो व्यक्तियों की मौत का हवाला देते हुए ग्वालियर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। चीफ जस्टिस के निर्देश पर उक्त याचिका सुनवाई के लिए मुख्यपीठ में स्थानांतरित की गई थी। याचिका में कहा गया था कि दुर्घटना के समय दो पहिया वाहन चालक हेलमेट लगाए होते तो उनकी मौत नहीं होती। अधिकांश सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से सिर में चोट आने के कारण दो पहिया वाहन सवारों की मौत होती है।
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बता दें कि लॉ स्टूडेंट ऐश्वर्या शांडिल्य की तरफ से सड़क दुर्घटना में हुई दो व्यक्तियों की मौत का हवाला देते हुए ग्वालियर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। चीफ जस्टिस के निर्देश पर उक्त याचिका सुनवाई के लिए मुख्यपीठ में स्थानांतरित की गई थी। याचिका में कहा गया था कि दुर्घटना के समय दो पहिया वाहन चालक हेलमेट लगाए होते तो उनकी मौत नहीं होती। अधिकांश सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से सिर में चोट आने के कारण दो पहिया वाहन सवारों की मौत होती है।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
याचिका में कहा गया था कि सुप्रीम तथा हाईकोर्ट ने दो पहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट की अनिवार्यता के संबंध में आदेश जारी किए हैं। मोटर व्हीकल एक्ट में भी हेलमेट लगाकर वाहन चलाने का प्रावधान है। जिसका प्रदेश में पालन नहीं किया जाता है। हेलमेट की अनिवार्यता का सख्ती से पालन किया जाए तो सड़क दुर्घटना में मौतों के ग्राफ में कमी आएगी।
याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया कि जबलपुर में गत एक साल में 40 हजार चालान काटे गए हैं। इसके अलावा हेलमेट पहनने के लिए स्कूल सहित अन्य स्थानों में जनजागरूकता अभियान चलाए गए हैं। युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है सड़क में कोई भी दो पहिया वाहन चालक हेलमेट पहने नहीं दिखते हैं। कागजी कार्यवाही नहीं बल्कि मैदानी कार्यवाही दिखनी चाहिए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर ने पैरवी की।
याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया कि जबलपुर में गत एक साल में 40 हजार चालान काटे गए हैं। इसके अलावा हेलमेट पहनने के लिए स्कूल सहित अन्य स्थानों में जनजागरूकता अभियान चलाए गए हैं। युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है सड़क में कोई भी दो पहिया वाहन चालक हेलमेट पहने नहीं दिखते हैं। कागजी कार्यवाही नहीं बल्कि मैदानी कार्यवाही दिखनी चाहिए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर ने पैरवी की।
