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MP News: BJP विधायक राहुलसिंह लोधी का निर्वाचन शून्य, हाईकोर्ट ने कांग्रेस की चंदा गौर की याचिका पर दिया आदेश
Wed, 07 Dec 2022 09:41 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 07 Dec 2022 09:41 PM IST
सार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति नंदिता दुबे की एकलपीठ ने टीकमगढ़ जिला अंतर्गत खरगापुर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक राहुल सिंह लोधी का निर्वाचन शून्य कर दिया है।
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खरगापुर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक राहुल सिंह लोधी का निर्वाचन शून्य कर दिया गया है।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति नंदिता दुबे की एकलपीठ ने टीकमगढ़ जिला अंतर्गत खरगापुर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक राहुल सिंह लोधी का निर्वाचन शून्य कर दिया है। आदेश की प्रति मध्य प्रदेश राज्य निवार्चन आयोग व भारत निर्वाचन आयोग को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। निर्वाचन शून्य होने के साथ लोधी को मिल रहे विधायक संबंधी सभी लाभ रोके जाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
बता दें कि 2018 में खरगापुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की टिकट पर पराजित प्रत्याशी रहीं चंदा सिंह गौर की ओर से याचिका लगाई गई थी। इसमें भाजपा विधायक का नामांकन पत्र निर्वाचन अधिकारी द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से स्वीकारे जाने के अलावा सरकार से अनुबंधित एक निजी ठेका कंपनी से पार्टनरशिप की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया था। यही नहीं पूर्व में हाईकोर्ट द्वारा लोधी पर लगाए गए 10 हजार रुपये जुर्माने की राशि भी चंदा सिंह गौर को भुगतान न किए जाने का भी आरोप लगाया गया था। हाई कोर्ट ने सभी तर्क सुनने के बाद अपने आदेश में निर्वाचन अधिकारी द्वारा नियमों के दायरे से बाहर जाकर नामांकन मंजूर करने को लेकर तल्ख टिप्पणी की। इस रवैये को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा-134 का उललंघन निरूपित किया।
चुनाव याचिकाकर्ता चंदा सिंह गौर की ओर से चुनाव याचिका में आरोप लगाया गया था कि पूर्व में जब वे विधायक निर्वाचित हुई थीं, तब लोधी ने उनके विरुद्ध चुनाव याचिका दायर की थी, जिसे 10 हजार रुपये जुर्माने सहित निरस्त किया गया था। हाई कोर्ट के निर्देश के पालन में लोधी को यह राशि गौर को देनी थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। चूंकि यह रवैया लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा-100 के उल्लंघन की परिधि में आता है, अत: निर्वाचन निरस्त कर दिया जाना चाहिए। इसके अलावा नामांकन पत्र भी दो जमा किए गए थे, जिनमें परस्पर विरोधाभासी जानकारी दी गई थी। ठेका कंपनी से पार्टनरशिप की जानकारी पूरी तरह छिपाने की गलती की गई थी।
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बता दें कि 2018 में खरगापुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की टिकट पर पराजित प्रत्याशी रहीं चंदा सिंह गौर की ओर से याचिका लगाई गई थी। इसमें भाजपा विधायक का नामांकन पत्र निर्वाचन अधिकारी द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से स्वीकारे जाने के अलावा सरकार से अनुबंधित एक निजी ठेका कंपनी से पार्टनरशिप की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया था। यही नहीं पूर्व में हाईकोर्ट द्वारा लोधी पर लगाए गए 10 हजार रुपये जुर्माने की राशि भी चंदा सिंह गौर को भुगतान न किए जाने का भी आरोप लगाया गया था। हाई कोर्ट ने सभी तर्क सुनने के बाद अपने आदेश में निर्वाचन अधिकारी द्वारा नियमों के दायरे से बाहर जाकर नामांकन मंजूर करने को लेकर तल्ख टिप्पणी की। इस रवैये को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा-134 का उललंघन निरूपित किया।
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चुनाव याचिकाकर्ता चंदा सिंह गौर की ओर से चुनाव याचिका में आरोप लगाया गया था कि पूर्व में जब वे विधायक निर्वाचित हुई थीं, तब लोधी ने उनके विरुद्ध चुनाव याचिका दायर की थी, जिसे 10 हजार रुपये जुर्माने सहित निरस्त किया गया था। हाई कोर्ट के निर्देश के पालन में लोधी को यह राशि गौर को देनी थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। चूंकि यह रवैया लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा-100 के उल्लंघन की परिधि में आता है, अत: निर्वाचन निरस्त कर दिया जाना चाहिए। इसके अलावा नामांकन पत्र भी दो जमा किए गए थे, जिनमें परस्पर विरोधाभासी जानकारी दी गई थी। ठेका कंपनी से पार्टनरशिप की जानकारी पूरी तरह छिपाने की गलती की गई थी।
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