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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News ›   Drugs reaching prisoners, Madhya Pradesh High Court said – Government should get enough time to take action

MP News: कैदियों तक पहुंच रहे मादक पदार्थ, हाईकोर्ट ने कहा- सरकार को कार्रवाई के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए

Fri, 28 Oct 2022 08:04 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Fri, 28 Oct 2022 08:04 AM IST
सार

जेल के अंदर कैदियों तक मादक पदार्थ पहुंचाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जुलाई में एक याचिका दायर की गई थी, लेकिन सरकार को कार्रवाई के लिए पर्याप्त समय नही दिया गया था, हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के चुनौती वापस लेने के निर्णय को स्वीकार कर लिया है।

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Drugs reaching prisoners, Madhya Pradesh High Court said – Government should get enough time to take action
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जबलपुर जेल के अंदर कैदियों तक गांजा, सिगरेट सहित अन्य मादक पदार्थ पहुंचने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता ने अभ्यावेदन पर सरकार को कार्रवाई के लिए पर्याप्त समय दिए बिना याचिका दायर की है। जिसके बाद याचिकाकर्ता की तरफ से याचिका वापस लेने का आग्रह किया गया,जिसे युगलपीठ ने स्वीकार कर लिया।
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रीवा निवासी अधिवक्ता मुनिराज उर्फ पवन तिवारी की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि प्रदेश के जेल के अंदर कैदियों तक मादक पदार्थ पहुंच रहे हैं। रीवा जेल में निरिक्षण के दौरान कैदियों के पास से बीड़ी व सिगरेट मिली थी। जबलपुर जेल में प्रधान जेल पहरी अपने मोजे में गांजे की पुड़िया छुपाकर ले जाते हुए पकड़ा गया था। जेल के अंदर 10 रुपये वाली तम्बाकू की पुड़िया 100 रुपये में कैदियों को बेची जाती है। इसी प्रकार अन्य मादक पदार्थ भी कैदियों को दस गुने दाम में मुहैया कराए जाते हैं।
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याचिका में कहा गया था कि सुधार के लिए आरोपियों को जेल भेजा जाता है। जेल के अंदर मादक पदार्थ का रैकेट चल रहा है। याचिका की सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता ने 27 जुलाई को इस संबंध में सरकार को अभ्यावेदन दिया था। सरकार को कार्रवाई के लिए पर्याप्त समय दिये बिना याचिका दायर की गयी है। याचिकाकर्ता ने सुनवाई के दौरान याचिका वापस लेने का आग्रह किया,जिसे युगलपीठ ने स्वीकार कर लिया।
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