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Jabalpur News: शहर में रोजाना हो रही साइबर ठगी, जागरूकता की कमी व नियमों की अनदेखी है अहम वजह
Fri, 06 Dec 2024 09:38 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Fri, 06 Dec 2024 09:38 PM IST
सार
जबलपुर में साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिनके प्रमुख कारण जागरूकता की कमी, भय, और बैंक खातों को फर्जी पते पर खोलना हैं। हर सप्ताह तीन से चार बड़ी घटनाएं और रोजाना छोटे ठगी के मामले दर्ज हो रहे हैं। पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने साइबर अपराध रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर जागरूकता अभियान तेज किए हैं।
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तेजी से बढ़ रहे साइबर ठगी के मामले
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जबलपुर शहर में साइबर ठगी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। जागरूकता की कमी, भय, और नियमों की अनदेखी कर बैंक खाते खोलने जैसी समस्याएं इसके प्रमुख कारण हैं। पुलिस के मुताबिक, हर सप्ताह तीन से चार बड़ी साइबर ठगी की घटनाएं दर्ज हो रही हैं, जबकि रोजाना छोटे-मोटे एक या दो मामले भी सामने आ रहे हैं।
पुलिस की सक्रियता और जागरूकता अभियान
पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने साइबर ठगी को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि ठगी रोकने के लिए पुलिस द्वारा जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। पूर्व में प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई के चलते कई प्रकरण दर्ज किए गए हैं।
उपाध्याय ने बताया कि अधिकतर साइबर ठगी की घटनाएं जागरूकता की कमी और लोगों में मौजूद भय के कारण होती हैं। ई-बैंकिंग के लिए बैंक दो-स्तरीय सुरक्षा प्रक्रिया अपनाते हैं, लेकिन इसके बावजूद लोग जालसाजों के झांसे में आ जाते हैं।
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आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी
पुलिस के मुताबिक, साइबर ठगी के मामलों में सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे लोग शामिल होते हैं। आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस संबंधित बैंक से जानकारी जुटाती है। हालांकि, कई मामलों में फर्जी पते पर खाते खोले गए होते हैं, जिससे जांच में बाधा आती है।
पुलिस ने बताया कि अधिकतर मामलों में निजी बैंक खाताधारकों की पते की सत्यता की उचित जांच नहीं करते। आरबीआई ने भी इस समस्या को गंभीरता से लिया है और साइबर ठगी रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता
आरबीआई और पुलिस साइबर ठगी रोकने के लिए प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। नागरिकों को सतर्क रहना चाहिए और ई-बैंकिंग करते समय किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देनी चाहिए। साइबर ठगी से बचाव के लिए जागरूकता बढ़ाना और बैंकिंग नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है।
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पुलिस की सक्रियता और जागरूकता अभियान
पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने साइबर ठगी को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि ठगी रोकने के लिए पुलिस द्वारा जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। पूर्व में प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई के चलते कई प्रकरण दर्ज किए गए हैं।
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उपाध्याय ने बताया कि अधिकतर साइबर ठगी की घटनाएं जागरूकता की कमी और लोगों में मौजूद भय के कारण होती हैं। ई-बैंकिंग के लिए बैंक दो-स्तरीय सुरक्षा प्रक्रिया अपनाते हैं, लेकिन इसके बावजूद लोग जालसाजों के झांसे में आ जाते हैं।
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आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी
पुलिस के मुताबिक, साइबर ठगी के मामलों में सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे लोग शामिल होते हैं। आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस संबंधित बैंक से जानकारी जुटाती है। हालांकि, कई मामलों में फर्जी पते पर खाते खोले गए होते हैं, जिससे जांच में बाधा आती है।
पुलिस ने बताया कि अधिकतर मामलों में निजी बैंक खाताधारकों की पते की सत्यता की उचित जांच नहीं करते। आरबीआई ने भी इस समस्या को गंभीरता से लिया है और साइबर ठगी रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता
आरबीआई और पुलिस साइबर ठगी रोकने के लिए प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। नागरिकों को सतर्क रहना चाहिए और ई-बैंकिंग करते समय किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देनी चाहिए। साइबर ठगी से बचाव के लिए जागरूकता बढ़ाना और बैंकिंग नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है।
