फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News ›   By claiming diesel bills, the petitioner exposed the misuse of government machinery

MP News: जबलपुर में मुख्यमंत्री सम्मान कार्यक्रम की बसों में डीजल भरवाने पर जवाब तलब, कोर्ट हलफनामे से नाखुश

Mon, 10 Mar 2025 10:51 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Mon, 10 Mar 2025 10:51 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने जबलपुर में मुख्यमंत्री सम्मान कार्यक्रम की बसों में डीजल भरवाने पर कलेक्टर के हलफनामे को असंतोषजनक माना। अदालत ने सार्वजनिक धन के उपयोग पर स्पष्टीकरण मांगा और कलेक्टर को एक सप्ताह में नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी। 

विज्ञापन
By claiming diesel bills, the petitioner exposed the misuse of government machinery
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री के सम्मान कार्यक्रम के लिए अधिग्रहित बसों में नगर निगमायुक्त द्वारा डीजल भरवाने को लेकर जबलपुर कलेक्टर द्वारा प्रस्तुत हलफनामे पर हाईकोर्ट ने असंतोष व्यक्त किया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने आदेश में कहा कि कलेक्टर यह स्पष्ट करने में असफल रहे कि यह कार्यक्रम नगर निगम का कैसे था और सार्वजनिक धन से निजी वाहनों में डीजल भरवाने की क्या आवश्यकता थी।

विज्ञापन

याचिकाकर्ता सुगम चंद्र जैन की ओर से दायर याचिका में बताया गया कि 3 जनवरी 2024 को जबलपुर में आयोजित मुख्यमंत्री सम्मान समारोह के लिए अधिग्रहित बसों में आईएसबीटी बस स्टैंड के पास स्थित पेट्रोल पंप से लगभग 6 लाख रुपये का डीजल भरवाया गया था। यह कार्य नगर निगमायुक्त द्वारा खाद्य अधिकारी को भेजकर कराया गया। भुगतान के लिए अगस्त 2024 में संयुक्त कलेक्टर और जिला आपूर्ति अधिकारी से संपर्क किया गया, जिसके बाद कलेक्टर कार्यालय ने नगर निगमायुक्त को राशि भुगतान करने का लिखित निर्देश दिया।

विज्ञापन

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान प्रशासन से पूछा कि क्या अधिग्रहित बसों में डीजल भरने के लिए कोई पीओएल (पेट्रोल, ऑयल, लुब्रिकेंट) आदेश जारी किया गया था। इसे जनता के धन का दुरुपयोग मानते हुए कोर्ट ने जिला कलेक्टर से स्पष्ट जवाब मांगा था। कलेक्टर द्वारा प्रस्तुत हलफनामे को असंतोषजनक मानते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि सार्वजनिक वाहनों के अधिग्रहण और उनके उद्देश्यों की अधिसूचना अभिलेख पर लाई जाए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि यह सार्वजनिक हित की श्रेणी में आता है या नहीं।

विज्ञापन
विज्ञापन

इसके अलावा, कोर्ट ने सवाल उठाया कि नगर निगम को सार्वजनिक धन से निजी वाहनों में डीजल भरने की जरूरत क्यों पड़ी। नगर आयुक्त को सौंपे गए कार्यों में जनता के धन से डीजल खर्च वहन करने की कोई जिम्मेदारी नहीं है। साथ ही, याचिकाकर्ता के बिल भुगतान को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी हलफनामे में नहीं दी गई।

एकलपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने न केवल अपने डीजल बिलों का दावा किया है, बल्कि सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग को भी उजागर किया है, जो प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने योग्य प्रतीत होता है। हालांकि, ऐसा कोई आदेश देने से पहले उचित स्पष्टीकरण आवश्यक है।

हाईकोर्ट ने जिला कलेक्टर को एक सप्ताह के भीतर संतोषजनक शपथ-पत्र प्रस्तुत करने का समय दिया है और ऐसा न करने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से तलब करने की चेतावनी दी है। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed