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जबलपुर: नेशनल हाईवे से लगी जमीन का सिर्फ पांच हजार मुआवजा, हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब

Fri, 04 Mar 2022 03:12 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Fri, 04 Mar 2022 03:12 PM IST
सार

नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन का सिर्फ पांच हजार रुपये मुआवजा दिए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
 

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Jabalpur: Only five thousand compensation for the land adjoining the National Highway, the High Court issued a notice and sought answer
court demo - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सतना जिले में नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन का सिर्फ पांच हजार रुपये मुआवजा दिए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस डीके पालीवाल की युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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सतना जिले के मैहर तहसील के निवासी अनंत कुमार चतुर्वेदी व सुशीला देवी की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि उनकी कृषि भूमि को नेशनल हाईवे की चौड़ाई बढ़ाने के लिए अधिग्रहीत किया गया था। राजमार्ग से सटी हुई भूमियों का उन्हें मात्र 5,000 रुपये क्षतिपूर्ति मुआवजा दिया जाने का आदेश सक्षम अधिकारी द्वारा पारित किया गया था। जिसके खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त मध्यस्थ व संभागायुक्त रीवा के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था, जो अस्वीकार कर दिया गया था।
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याचिका में कहा गया था कि राजमार्ग में स्थित अन्य भूमियों के लिए मध्यस्थ ने वर्ग फीट के अनुसार क्षतिपूर्ति में वृध्दि की थी। याचिकाकर्ता गणों के प्रकरण में ऐसा नहीं किया गया जो की भेदभावपूर्ण है। उन्हें भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के अंतर्गत मुआवजा प्रदान किया जाना चाहिए था। मध्यस्थता अधिनियम की धारा 34 के अंतर्गत उनके पास वैकल्पिक उपचार भी उपलब्ध नहीं है। धारा 34 में अवार्ड को परिवर्तित नहीं किया जा सकता है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद केंद्र सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया सहित आयुक्त रीवा सहित अन्य से जबाव तलब किया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से आशीष त्रिवेदी, असीम त्रिवेदी, संदीप दुबे, अपूर्व त्रिवेदी ने पैरवी की। 
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