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जबलपुर: मध्य प्रदेश फायर एंड इमरजेंसी सर्विस एक्ट लागू करने पर सरकार शीघ्र लेगी निर्णय, हाईकोर्ट में दी गई अंडरटेकिंग

Sun, 08 May 2022 02:42 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Sun, 08 May 2022 02:42 PM IST
सार

देश के 24 राज्यों में फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेस एक्ट बना हुआ है, लेकिन मप्र अब तक नहीं बना है। इसे लेकर दायर याचिक पर सरकार की ओर से कहा गया कि मप्र फायर एंड इमरजेंसी सर्विस एक्ट लागू करने पर सरकार शीघ्र ही निर्णय लेगी। उक्त जवाब को रिकॉर्ड पर लेते हुए न्यायालय ने याचिका निराकृत कर दी।

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Jabalpur: Government will take decision soon on implementation of Madhya Pradesh Fire and Emergency Service Act, undertaking given in High Court
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश में फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेस एक्ट अब तक लागू न किए जाने को चुनौती देने वाले मामले का हाईकोर्ट ने पटाक्षेप कर दिया। चीफ जस्टिस रवि विजय मलिमथ व जस्टिस पुरुषेन्द्र कौरव की युगलपीठ के समक्ष सरकार की ओर से कहा गया कि मप्र फायर एंड इमरजेंसी सर्विस एक्ट लागू करने पर सरकार शीघ्र ही निर्णय लेगी। उक्त जवाब को रिकॉर्ड पर लेते हुए न्यायालय ने याचिका निराकृत कर दी।
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जानकारी के अनुसार यह जनहित याचिका जबलपुर रामपुर निवासी समाजसेवी राम उर्फ नीलू कुशवाहा की ओर से दायर की गई है। इसमें मप्र में फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेस एक्ट लागू किए जाने की राहत चाही गई है। आवेदक का कहना है के देश के 24 राज्यों में फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेस एक्ट बना हुआ है, लेकिन मप्र अब तक नहीं बना है। इतना ही नहीं छत्तीसगढ़ राज्य में भी उक्त एक्ट लागू है।
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अग्नि हादसों से होने वाली मौतें मप्र में ज्यादा
याचिका में कहा गया है कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार प्रदेश में अग्नि हादसों से होने वाली मौतों की संख्या अन्य प्रदेशों की संख्या में काफी अधिक है। इस संबंध में एनसीआरबी की पिछले 10 वर्षों की रिपोर्ट भी न्यायालय के समक्ष पेश की गई। इसके साथ कहा गया कि भारत सरकार ने 16 सितंबर 2019 को देश के सभी प्रमुख सचिवों को मॉडल बिल फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेस लागू करने के लिए कहा था, इसके बावजूद भी मप्र में इसका पालन नहीं हुआ है।
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आवेदक की ओर से कहा गया कि उक्त बिल लागू न होने से अग्नि हादसे रोकने कोई ठोस उपाय नहीं किए जा रहे हैं। मामले में आवेदक की ओर से कहा गया कि जहां पंडाल लगाए जाते हैं या फिर स्कूल, शासकीय व अर्धशासकीय कार्यालयों में अग्नि सुरक्षा संबंधी उपाए नहीं किए जा रहे हैं। सुनवाई पश्चात् सरकार की ओर से दी गई अंडरटेकिंग को मद्देनजर रखते हुए न्यायालय ने मामले का पटाक्षेप कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनोज कुशवाहा व कौशलेन्द्र सिंह ने पैरवी की।
 
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