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Indore News: होनहार बेटी ने फंदा लगाया, लिखा- उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई, माफ कर देना
Tue, 11 Jun 2024 07:53 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Tue, 11 Jun 2024 07:53 PM IST
सार
स्कॉलरशिप पर इंदौर में पढ़ाई कर रही थी, खर्च निकालने के लिए एक ऑनलाइन कंपनी में काम भी करती थी।
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वैष्णवी चौहान
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल, इंदौर
विस्तार
इंदौर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही छात्रा ने फांसी लगा ली। पुलिस को सुसाइड नोट मिला है। इसमें उसने लिखा है कि वह उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई। जो बनना था वह नहीं बन पाई। छात्रा की सुसाइड की बात सबसे पहले उसके चचेरे भाई को पता चली। उसने किसी काम से उसे कई बार कॉल किया, जब कोई जवाब नहीं आया तो वह छात्रा के घर पहुंचा। तब छात्रा वहां फंदे से लटकी मिली। इसके बाद उसने पुलिस को सूचना दी। परिवार में वैष्णवी से छोटा भाई मेहुल है, जो भोपाल से एग्रीकल्चर की पढ़ाई कर रहा है। वहीं इंदौर में उसका चचेरा भाई रहता है, जो डिलीवरी बॉय है।
हीरा नगर टीआई पीएल शर्मा ने बताया कि वैष्णवी चौहान बुरहानपुर की रहने वाली है। वह इंदौर में एलएनसीटी कॉलेज में बीटेक सेकंड ईयर की छात्रा थी। किराए के मकान में रह रही थी और ऑनलाइन टिकट कंपनी में जॉब भी कर रही थी। कुछ दिन पहले कोचिंग के चलते जॉब पर नहीं जा रही थी। उसके रूम से सुसाइड नोट मिला है, जिसमें लिखा है - अब सबसे विदा लेने का वक्त आ गया है। मैं सबकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई। जो मुझे बनना था वह नहीं बन पाई। मां-पिता, भाई, मौसी माफ कर देना।
वैष्णवी के माता पिता ने बताया कि 13 जून से वैष्णवी की बीटेक सेकंड ईयर की परीक्षा शुरू होने वाली थी। वह उसी की तैयारी में जुटी हुई थी। बेटी हम सबको हिम्मत देती थी, ऐसे में वह सुसाइड कर ले यह संभव नहीं। वह पढ़ने में काफी होनहार थी। उसने बुरहानपुर से डिप्लोमा किया था। इसके बाद इंदौर में पढ़ाई करने की इच्छा जताई थी। वैष्णवी को स्कॉलरशिप मिली थी। उसी रुपए से वह पढ़ाई कर रही थी।
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हीरा नगर टीआई पीएल शर्मा ने बताया कि वैष्णवी चौहान बुरहानपुर की रहने वाली है। वह इंदौर में एलएनसीटी कॉलेज में बीटेक सेकंड ईयर की छात्रा थी। किराए के मकान में रह रही थी और ऑनलाइन टिकट कंपनी में जॉब भी कर रही थी। कुछ दिन पहले कोचिंग के चलते जॉब पर नहीं जा रही थी। उसके रूम से सुसाइड नोट मिला है, जिसमें लिखा है - अब सबसे विदा लेने का वक्त आ गया है। मैं सबकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई। जो मुझे बनना था वह नहीं बन पाई। मां-पिता, भाई, मौसी माफ कर देना।
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वैष्णवी के माता पिता ने बताया कि 13 जून से वैष्णवी की बीटेक सेकंड ईयर की परीक्षा शुरू होने वाली थी। वह उसी की तैयारी में जुटी हुई थी। बेटी हम सबको हिम्मत देती थी, ऐसे में वह सुसाइड कर ले यह संभव नहीं। वह पढ़ने में काफी होनहार थी। उसने बुरहानपुर से डिप्लोमा किया था। इसके बाद इंदौर में पढ़ाई करने की इच्छा जताई थी। वैष्णवी को स्कॉलरशिप मिली थी। उसी रुपए से वह पढ़ाई कर रही थी।
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