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खड़े हनुमान जीः प्रतिमा की स्कैनिंग करने नहीं गई आईआईटी की टीम, संस्थान के पास विशेषज्ञ ही नहीं
Mon, 14 Sep 2026 08:36 AM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Mon, 14 Sep 2026 08:36 AM IST
सार
उज्जैन के छत्री चौक स्थित प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर विस्थापन मामले में तकनीकी संस्थान ने स्पष्ट किया है कि प्रतिमा स्कैनिंग हेतु कोई टीम नहीं भेजी गई है। वहीं प्रशासन ने कहा है कि वैज्ञानिक परीक्षण रिपोर्ट के बाद ही विस्थापन का अंतिम निर्णय होगा।
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INDORE NEWS
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विस्तार
उज्जैन के खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को विस्थापित करने के लिए आईआईटी की टीम को नहीं भेजा गया है। संस्थान का कहना है कि हमारी तरफ से कोई भी विशेषज्ञ नहीं भेजा गया है, सोशल मीडिया पर इस तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं। संस्थान ने यह भी साफ कर दिया है कि मूर्तियों को विस्थापित करने की जानकारियों के लिए कोई विशेषज्ञ उनके पास नहीं है।
क्या है मामला
उज्जैन के छत्री चौक स्थित प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर को सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत विस्थापित किया जा रहा है। कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक मार्ग चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है, जिसकी जद में आने के कारण मंदिर को विस्थापित करने की योजना बनाई गई है। मंदिर के मुख्य बाहरी ढांचे को हटा दिया गया है, लेकिन हनुमान जी की प्रतिमा को सुरक्षित रखते हुए कैनोपी टेंट और बैरिकेडिंग से ढंक दिया गया है।
कैसे शुरू हुआ विरोध
प्रतिमा को विस्थापित किए जाने की खबरों के बाद स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं और हिंदूवादी संगठनों ने इसका विरोध किया और हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर प्रतिमा के 'टस से मस न होने' के दावे और वीडियो तेजी से वायरल होने लगे, जिससे मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।
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क्या है प्रशासन का रुख
उज्जैन जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिमा को जबरन या मशीनों से हटाने के वायरल दावे भ्रामक हैं। विशेषज्ञों की टीम द्वारा प्रतिमा के आधार, गहराई और मजबूती का वैज्ञानिक परीक्षण किया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर ही विस्थापन या यथास्थान संरक्षण का अंतिम निर्णय लिया जाएगा। पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रतिमा मालवा के काले बेसाल्ट पत्थर से बनी है और इसका संबंध परमार काल (राजा भोज समय) की प्राचीन परंपराओं से माना जा रहा है।
अमर उजाला से क्या बोले अधिकारी
उज्जैन नगर निगम में अपर आयुक्त संतोष टैगोर से अमर उजाला ने स्कैनिंग रिपोर्ट के विषय में बात की। संतोष टैगोर का कहना है कि अभी प्रक्रिया चल रही है, पूरी नहीं हुई है। जब स्कैनिंग प्रक्रिया पूरी हो जाएगी तो यह बता दिया जाएगा कि रिपोर्ट में क्या आया है।
तो सच क्या है?
एक तरफ आईआईटी ने साफ किया है कि उसने कोई जांच दल नहीं भेजा और दूसरी तरफ प्रशासन कह रहा है कि स्कैनिंग रिपोर्ट के बाद ही प्रतिमा के विस्थापन का निर्णय लिया जाएगा। जब हमने इससे जुड़े जिम्मेदारों से बात की तो उन्होंने बताया कि जांच के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को बुलाया गया है जिसमें तकनीकी विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, पुरातत्वविद, इतिहासकार और अन्य क्षेत्रों के लोग हैं। हालांकि आईआईटी का कहना है कि प्रशासन द्वारा बुलाए गए विशेषज्ञों में उनकी तरफ से कोई भी विशेषज्ञ नहीं भेजा गया है। इसलिए इसमें आईआईटी इंदौर की कोई भूमिका नहीं है।
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क्या है मामला
उज्जैन के छत्री चौक स्थित प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर को सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत विस्थापित किया जा रहा है। कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक मार्ग चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है, जिसकी जद में आने के कारण मंदिर को विस्थापित करने की योजना बनाई गई है। मंदिर के मुख्य बाहरी ढांचे को हटा दिया गया है, लेकिन हनुमान जी की प्रतिमा को सुरक्षित रखते हुए कैनोपी टेंट और बैरिकेडिंग से ढंक दिया गया है।
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कैसे शुरू हुआ विरोध
प्रतिमा को विस्थापित किए जाने की खबरों के बाद स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं और हिंदूवादी संगठनों ने इसका विरोध किया और हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर प्रतिमा के 'टस से मस न होने' के दावे और वीडियो तेजी से वायरल होने लगे, जिससे मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।
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क्या है प्रशासन का रुख
उज्जैन जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिमा को जबरन या मशीनों से हटाने के वायरल दावे भ्रामक हैं। विशेषज्ञों की टीम द्वारा प्रतिमा के आधार, गहराई और मजबूती का वैज्ञानिक परीक्षण किया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर ही विस्थापन या यथास्थान संरक्षण का अंतिम निर्णय लिया जाएगा। पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रतिमा मालवा के काले बेसाल्ट पत्थर से बनी है और इसका संबंध परमार काल (राजा भोज समय) की प्राचीन परंपराओं से माना जा रहा है।
अमर उजाला से क्या बोले अधिकारी
उज्जैन नगर निगम में अपर आयुक्त संतोष टैगोर से अमर उजाला ने स्कैनिंग रिपोर्ट के विषय में बात की। संतोष टैगोर का कहना है कि अभी प्रक्रिया चल रही है, पूरी नहीं हुई है। जब स्कैनिंग प्रक्रिया पूरी हो जाएगी तो यह बता दिया जाएगा कि रिपोर्ट में क्या आया है।
तो सच क्या है?
एक तरफ आईआईटी ने साफ किया है कि उसने कोई जांच दल नहीं भेजा और दूसरी तरफ प्रशासन कह रहा है कि स्कैनिंग रिपोर्ट के बाद ही प्रतिमा के विस्थापन का निर्णय लिया जाएगा। जब हमने इससे जुड़े जिम्मेदारों से बात की तो उन्होंने बताया कि जांच के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को बुलाया गया है जिसमें तकनीकी विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, पुरातत्वविद, इतिहासकार और अन्य क्षेत्रों के लोग हैं। हालांकि आईआईटी का कहना है कि प्रशासन द्वारा बुलाए गए विशेषज्ञों में उनकी तरफ से कोई भी विशेषज्ञ नहीं भेजा गया है। इसलिए इसमें आईआईटी इंदौर की कोई भूमिका नहीं है।
