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धनतेरस पर खास: भगवान धनवंतरि के साथ होगी धन लक्ष्मी की पूजा, इंदौर के वैद्यराजों की देश में रही ख्याति
सार
इंदौर की बात करें तो आयुर्वेद का शहर से रिश्ता प्राचीन है। शहर में कई नामचीन वैद्य रहे, उनकी देशभर में ख्याति रही। आज भी शहर में आयुर्वेद को जानने और मानने वालों की संख्या बहुतायत में है।
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इंदौर में 1919 में प्रिंस यशवंतराव आयुर्वेद चिकित्सालय आरंभ किया गया था।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पांच दिवसीय दीप पर्व की शुरुआत शनिवार को धनतेरस से होगी। धनतेरस पर आयुर्वेद के जनक भगवान धनवंतरि और धन और समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी तथा धन और ऐश्वर्य के स्वामी कुबेर के पूजन की भी मान्यता है। कुबेर भगवान को समृद्धि और संपत्ति का संरक्षक माना जाता है। भगवान धनवंतरि हिंदू धर्म में आयुर्वेद और चिकित्सा के देवता हैं। वे भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं। उनका जन्म समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश के साथ हुआ था। उन्हें देवताओं का चिकित्सक भी कहा जाता है और उन्होंने ही मानव जाति को आयुर्वेद का ज्ञान दिया, जिसका आधार आज की आयुर्वेदिक पुस्तकें हैं। इंदौर की बात करें तो आयुर्वेद का शहर से रिश्ता प्राचीन है। शहर में कई नामचीन वैद्य रहे, उनकी देशभर में ख्याति रही। आज भी शहर में आयुर्वेद को जानने और मानने वालों की संख्या बहुतायत में है।
इंदौर की जनता का आयुर्वेद पर गहरा विश्वास था और अब भी है। तत्कालीन होल्कर नरेश ने आम जनता के लिए आयुर्वेद दवाखाना खोला था। उस वक्त के प्रसिद्ध वैद्य ठाकुर लाल व्यास, गणेश शास्त्री भागवत, गणेश शास्त्री केलकर और कन्हैयालाल प्रमुख थे।
1919 में खुला पहला आयुर्वेद कॉलेज, अब अष्टांग महाविद्यालय
वर्ष 1919 में प्रिंस यशवंतराव आयुर्वेद चिकित्सालय आरंभ किया गया था। इसमें मरीजों को भर्ती करने के साथ बिस्तरों की सुविधा भी थी। 1921 में स्वामी द्वारका दत्ता द्वारा ब्रह्मचर्य आश्रम स्थापित किया गया था। इसमें आयुर्वेद इलाज भी किया जाता था। 1972 में शासन द्वारा इस अस्पताल को अधिग्रहित कर इसका नाम शासकीय अष्टांग आयुर्वेद महाविद्यालय रख दिया गया था। महाराजा तुकोजीराव क्लॉथ मार्केट एसोसिएशन द्वारा 1934 में वैष्णव आयुर्वेद औषधालय, 1939 में सेठ स्वरूपचंद हुकमचंद द्वारा राजुकमार सिंह आयुर्वेद महाविद्यालय आरंभ किया गया था। इसके अलावा नगर में कई आयुर्वेद के वैद्य थे, जो इलाज किया करते थे। नगर में गेंदालाल औषधालय बियाबानी, गोविंदराम सेकसरिया औषधालय मालवा मिल, कल्याण जैन औषधालय नलियाबाखल और सेठी औषधालय मल्हारगंज नगर में आयुर्वेद के औषधालय थे।
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इंदौर में ये थे प्रसिद्ध वैद्यराज
इंदौर नगर में कई प्रसिद्ध वैद्य थे। इनमें प्रमुख हैं वैद्य जयकृष्ण शर्मा, वैद्य ख्यालीराम द्विवेदी (बियाबानी), पंडित रामनारायण शास्त्री (मल्हारगंज, रस निकेतन जवाहर मार्ग), पंडित सीताराम अजमेरा, गोविंद बाला भाऊ वैद्य (खजूरी बाजार), राधाकिशन महाराज, कालू शंकरजी, केलकर साहब (आड़ा बाजार), लक्ष्मीनारायण त्रिवेदी (पंढरीनाथ), नंदकिशोर शास्त्री, चंद्रचूड़ शास्त्री, नारायण शास्त्री, सत्येंद्र बोस, भुजबल बाबा (पहली पल्टन), वैद्य जमींदार साहब (छोटा रावला), अंबिकाप्रसाद, पंडित स्वामी दयाल शुक्ला, दामोदर शास्त्री, हरिशंकर जी लक्ष्मण जी, शंकरलाल कुसुमाकर, वैद्य हरपतलाल, मूलचंद जी, सूर्यनारायण जोशी, दत्तात्रय जोशी, लक्ष्मीदत्त वैद्य, गंगाधर निसर, गोपीनाथ व्यास, महंत शेष नारायण, लक्ष्मण वैद्य आदि इंदौर के प्रसिद्ध आयुर्वेद के चिकित्सक रहे हैं।
इनकी देशभर में थी ख्याति
इंदौर के वैद्य पं. ख्यालीराम द्विवेदी की प्रसिद्धि तो देशभर में थी। वहीं, पंडित रामनारायण शास्त्री की मीठी बोली एक अलग पहचान थी। पुराने लोग कहते हैं कि शास्त्री की बोली से ही मरीज की आधी बीमारी ठीक हो जाती थी।
मोदी सरकार दे रही आयुर्वेद को बढ़ावा
केंद्र की मोदी सरकार के साथ ही राज्य सरकार भी आयुर्वेद के साथ ही सभी प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा दे रही है। आयुष मंत्रालय की पहल पर सरकारी हॉस्पिटलों में भी आयुर्वेद चिकित्सालय आरंभ किए गए हैं। विजय नगर के एक सरकारी हॉस्पिटल में आयुर्वेद डॉक्टर उपलब्ध हैं। उनका कहना है कि जिन्हें आयुर्वेद पर भरोसा है, वे यहां इलाज के लिए आते हैं। लोगों को शीघ्र लाभ की जरूरत होती है तो वे अंग्रेजी या एलोपैथी की दवा लेते हैं। देवास निवासी 86 वर्षीय आयुर्वेद डॉक्टर तकझरे, जिन्होंने 1965 में झांसी में बुंदेलखंड आयुर्वेद कॉलेज से डिग्री प्राप्त की थी, उनका कहना है कि आयुर्वेद बीमारी को जड़ से समाप्त करता है। आज भी मरीज आयुर्वेद के इलाज के लिए उनके पास आते हैं।
ये भी पढ़ें- MP News: भ्रष्टों पर छापे तो खूब, मगर नहीं हो रही दागियों की गिरफ्तारी, जानें कौन सा आदेश बन रहा ढाल
800 करोड़ का सालाना कारोबार
इंदौर नगर में कई प्राचीन आयुर्वेद की दुकानों के अलावा देश की कई प्रसिद्ध आयुर्वेद कंपनियों की दुकानें भी हैं। एक अनुमान के अनुसार नगर में करीब 800 करोड़ का आयुर्वेद की दवाओं का कारोबार होता है।
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इंदौर की जनता का आयुर्वेद पर गहरा विश्वास था और अब भी है। तत्कालीन होल्कर नरेश ने आम जनता के लिए आयुर्वेद दवाखाना खोला था। उस वक्त के प्रसिद्ध वैद्य ठाकुर लाल व्यास, गणेश शास्त्री भागवत, गणेश शास्त्री केलकर और कन्हैयालाल प्रमुख थे।
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1919 में खुला पहला आयुर्वेद कॉलेज, अब अष्टांग महाविद्यालय
वर्ष 1919 में प्रिंस यशवंतराव आयुर्वेद चिकित्सालय आरंभ किया गया था। इसमें मरीजों को भर्ती करने के साथ बिस्तरों की सुविधा भी थी। 1921 में स्वामी द्वारका दत्ता द्वारा ब्रह्मचर्य आश्रम स्थापित किया गया था। इसमें आयुर्वेद इलाज भी किया जाता था। 1972 में शासन द्वारा इस अस्पताल को अधिग्रहित कर इसका नाम शासकीय अष्टांग आयुर्वेद महाविद्यालय रख दिया गया था। महाराजा तुकोजीराव क्लॉथ मार्केट एसोसिएशन द्वारा 1934 में वैष्णव आयुर्वेद औषधालय, 1939 में सेठ स्वरूपचंद हुकमचंद द्वारा राजुकमार सिंह आयुर्वेद महाविद्यालय आरंभ किया गया था। इसके अलावा नगर में कई आयुर्वेद के वैद्य थे, जो इलाज किया करते थे। नगर में गेंदालाल औषधालय बियाबानी, गोविंदराम सेकसरिया औषधालय मालवा मिल, कल्याण जैन औषधालय नलियाबाखल और सेठी औषधालय मल्हारगंज नगर में आयुर्वेद के औषधालय थे।
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इंदौर में ये थे प्रसिद्ध वैद्यराज
इंदौर नगर में कई प्रसिद्ध वैद्य थे। इनमें प्रमुख हैं वैद्य जयकृष्ण शर्मा, वैद्य ख्यालीराम द्विवेदी (बियाबानी), पंडित रामनारायण शास्त्री (मल्हारगंज, रस निकेतन जवाहर मार्ग), पंडित सीताराम अजमेरा, गोविंद बाला भाऊ वैद्य (खजूरी बाजार), राधाकिशन महाराज, कालू शंकरजी, केलकर साहब (आड़ा बाजार), लक्ष्मीनारायण त्रिवेदी (पंढरीनाथ), नंदकिशोर शास्त्री, चंद्रचूड़ शास्त्री, नारायण शास्त्री, सत्येंद्र बोस, भुजबल बाबा (पहली पल्टन), वैद्य जमींदार साहब (छोटा रावला), अंबिकाप्रसाद, पंडित स्वामी दयाल शुक्ला, दामोदर शास्त्री, हरिशंकर जी लक्ष्मण जी, शंकरलाल कुसुमाकर, वैद्य हरपतलाल, मूलचंद जी, सूर्यनारायण जोशी, दत्तात्रय जोशी, लक्ष्मीदत्त वैद्य, गंगाधर निसर, गोपीनाथ व्यास, महंत शेष नारायण, लक्ष्मण वैद्य आदि इंदौर के प्रसिद्ध आयुर्वेद के चिकित्सक रहे हैं।
इनकी देशभर में थी ख्याति
इंदौर के वैद्य पं. ख्यालीराम द्विवेदी की प्रसिद्धि तो देशभर में थी। वहीं, पंडित रामनारायण शास्त्री की मीठी बोली एक अलग पहचान थी। पुराने लोग कहते हैं कि शास्त्री की बोली से ही मरीज की आधी बीमारी ठीक हो जाती थी।
मोदी सरकार दे रही आयुर्वेद को बढ़ावा
केंद्र की मोदी सरकार के साथ ही राज्य सरकार भी आयुर्वेद के साथ ही सभी प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा दे रही है। आयुष मंत्रालय की पहल पर सरकारी हॉस्पिटलों में भी आयुर्वेद चिकित्सालय आरंभ किए गए हैं। विजय नगर के एक सरकारी हॉस्पिटल में आयुर्वेद डॉक्टर उपलब्ध हैं। उनका कहना है कि जिन्हें आयुर्वेद पर भरोसा है, वे यहां इलाज के लिए आते हैं। लोगों को शीघ्र लाभ की जरूरत होती है तो वे अंग्रेजी या एलोपैथी की दवा लेते हैं। देवास निवासी 86 वर्षीय आयुर्वेद डॉक्टर तकझरे, जिन्होंने 1965 में झांसी में बुंदेलखंड आयुर्वेद कॉलेज से डिग्री प्राप्त की थी, उनका कहना है कि आयुर्वेद बीमारी को जड़ से समाप्त करता है। आज भी मरीज आयुर्वेद के इलाज के लिए उनके पास आते हैं।
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800 करोड़ का सालाना कारोबार
इंदौर नगर में कई प्राचीन आयुर्वेद की दुकानों के अलावा देश की कई प्रसिद्ध आयुर्वेद कंपनियों की दुकानें भी हैं। एक अनुमान के अनुसार नगर में करीब 800 करोड़ का आयुर्वेद की दवाओं का कारोबार होता है।
