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Hingot Festival: इंदौर में हिंगोट के दौरान 35 घायल, जानें पड़वा के दिन खेला जाने वाला पारंपरिक 'युद्ध' क्या है

Tue, 14 Nov 2023 12:40 AM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: गुलाम अहमद Updated Tue, 14 Nov 2023 12:40 AM IST
सार

हिंगोट एक जंगली फल है, जिसे खोखला कर बारूद, कोयला और गंधक से भर दिया जाता है। उत्सव के दौरान भाग लेने वाले समूह इसे एक दूसरे के ऊपर फेंकते हैं। पिछले सालों में इस उत्सव के दौरान मौतें भी हो चुकी हैं।
 

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several injured during Hingot festival in Indore marked by throwing of flaming gunpowder-filled fruits
Hingot festiva - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्यप्रदेश के इंदौर में 'हिंगोट' उत्सव के दौरान सोमवार को कम से कम 35 लोग घायल हो गए। दीपावली के एक दिन बाद पड़वा के रोज आयोजित होने वाले कई दशक पुराने उत्सव में गौतमपुरा और रुंगी गांवों के निवासी जलती हुई हिंगोट फेंकते हैं। हिंगोट एक जंगली फल है, जिसे खोखला कर बारूद, कोयला और गंधक से भर दिया जाता है। उत्सव के दौरान भाग लेने वाले समूह इसे एक दूसरे के ऊपर फेंकते हैं। पिछले सालों में इस उत्सव के दौरान मौतें भी हो चुकी हैं।

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ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) डॉ. अभिलाष शिवरिया ने कहा कि 'हिंगोट' उत्सव के दौरान सोमवार को कम से कम 35 लोगों को मामूली चोटें आई हैं। उनकी हालत स्थिर है। डॉक्टरों की एक टीम ने घायलों का उपचार किया। एक व्यक्ति गंभीर रूप से झुलस गया है और उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है।
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पारंपरिक हिंगोट युद्ध क्या है
पारंपरिक हिंगोट युद्ध इंदौर से 55 किमी दूर गौतमपुरा शहर में खेला जाता है। इसमें प्रयोग होने वाला 'हथियार' हिंगोट है, जो जंगली फल हिंगोट के खोल में बारूद भरकर बनाया जाता है। इसमें दो ग्रुप आमने-सामने होते हैं- एक तरफ तुर्रा दल और दूसरी ओर कलंकी दल। खास बात यह है कि इस युद्ध में हार-जीत नहीं होती है।
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भगवान विष्णु के अवतार श्री देवनारायण का आशीर्वाद लेते हैं योद्धा
चंबल नदी के आसपास के इलाकों में पाया जाने वाला हिंगोट नींबू के आकार का होता है, जो ऊपर से नारियल की तरह सख्त और अंदर से गूदे वाला होता है। आसपास के गांवों के लोग हिंगोट युद्ध देखने आते हैं। शाम के चार बजते ही योद्धा अपने दल के साथ ढोल ढमाकों से नाचते गाते युद्ध मैदान की ओर बढ़ते हैं। युद्ध शुरू होने से पहले दोनों दल के योद्धा अति प्राचीन भगवान विष्णु के अवतार श्री देवनारायण का आशीर्वाद लेते हैं। योद्धा युद्ध के दौरान अपने हाथों में लोहे का मजबूत ढाल और सर पर साफा बांधते हैं।

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