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Indore News: मेधा पाटकर की तबीयत बिगड़ी, बांध प्रभावित 16 हजार ग्रामीणों के लिए कर रही हैं अनशन

Thu, 20 Jun 2024 10:48 PM IST
अर्जुन रिछारिया न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अर्जुन रिछारिया Updated Thu, 20 Jun 2024 10:48 PM IST
सार

बड़वानी और धार जिले के डूब प्रभावित कर रहे आंदोलन, सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ाने से यहां के गांववाले बड़ी संख्या में प्रभावित हो रहे हैं। 
 

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sardar sarovar dam medha patkar
INDORE NEWS - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल, इंदौर

विस्तार

नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रमुख मेधा पाटकर अनशन पर हैं। गुरुवार को उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई। जिला प्रशासन ने तत्काल डॉक्टरों की टीम को मेधा पाटकर के चेकअप व जांच के लिए भेजा। अनशन स्थल पर डॉक्टरों की टीम ने पहुंचकर मेधा पाटकर का चेकअप किया। तबीयत बिगड़ने और शुगर लेवल कम होने के कारण उन्हें उल्टियां होने लगीं थी।
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डॉक्टर दिनेश नरगावे ने बताया कि मेधा पाटकर की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिली थी। हम छह सदस्यों की टीम चेकअप ओर जांच के लिए अनशन स्थल पहुंची। हमारे साथ एक स्टाफ नर्स, एक टेक्नीशियन, एक डॉक्टर, एक एएनएम सहित एक वाहन चालक टीम में मौजूद थे। उनकी जांच रिपोर्ट सामान्य आई है। भोजन नहीं करने के कारण उन्हें कमजोरी आ गई है। 
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16 हजार लोगों का पुनर्वास नहीं हुआ
मेधा पाटकर बड़वानी और धार जिले के डूब प्रभावितों के साथ पिछले छह दिनों से चिखल्दा में अनिश्चिकालीन उपवास कर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ाने से यहां के गांववाले बड़ी संख्या में प्रभावित हो रहे हैं। अनशन स्थल पर गुरुवार सुबह कई संगठन और राजनीतिक दलों के नेता पहुंचे। सभी ने मेधा पाटकर को समर्थन दिया। आंदोलन के प्रमुख मुकेश भगोरिया ने बताया कि पिछले साल मनावर विकासखंड के कई गांव नर्मदा नदी के बैक वाटर के कारण डूब गए थे। इसमें ग्राम एकलबारा, अछोदा, सेमल्दा, शरीकपुरा, बड़दा, मलनगांव, गोपालपुरा, कोठड़ा, रतवा, सामजीपुरा, गोगांवा समेत अनेकों गांव के लोग प्रभावित हुए थे। मुकेश भगोरिया ने बताया कि इन गांवों को सरकार ने नर्मदा नदी डूब क्षेत्र से बाहर बताया था। गत वर्ष बांध के बैक वाटर के कारण सात गांवों में बड़ा नुकसान हुआ है, जिसमें करीब 150 पक्के-कच्चे मकान गिरकर खंडहर बन गए थे। उन्होंने बताया कि 39 साल होने के बावजूद भी अभी तक इस घाटी के अंदर 16 हजार ऐसे लोग हैं जिनका कानूनी रूप से सम्पूर्ण पुनर्वास अभी तक नहीं हुआ है।
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