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Indore News: पंडित प्रदीप मिश्रा बोले- सनातन को डेंगू कहने वाले खुद डेंगू की औलाद, साधु-संत राजनीति में जाएं
Mon, 11 Sep 2023 08:09 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Mon, 11 Sep 2023 08:09 PM IST
सार
इंदौर में पत्रकारों से चर्चा के दौरान प्रदीप मिश्रा ने कई विषयों पर अपनी बेबाक राय रखी, कई प्रश्नों पर साध ली चुप्पी
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पंडित प्रदीप मिश्रा
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा ने इंदौर में कहा कि जो लोग सनातन धर्म को कोरोना, डेंगू या मलेरिया कह रहे हैं। वे खुद डेंगू, मलेरिया और कोरोना की औलाद हैं। उन्होंने कहा इन लोगों से पहले पूछना चाहिए कि उनके पिता, दादा और परदादा का नाम क्या है? उन्हें खुद पता चल जाएगा कि वे कौन हैं। हकीकत यही है कि वे खुद सनातनी ही हैं। गौरतलब है कि हाल ही में कई नेताओं ने सनातन की तुलना इन शब्दों से की थी। इसी विषय पर पंडित प्रदीप मिश्रा इंदौर में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जितने भी धर्म निकले हैं, सब सनातन धर्म से ही निकले हैं। अगर वो सनातन को कोरोना, डेंगू या मलेरिया कहते हैं तो वे खुद डेंगू, कोरोना या मलेरिया की औलाद हैं। अब यह बात तो उन्हें खुद तय करना है कि वे अपने पूर्वजों को क्या संबोधित करना पसंद करेंगे। सनातन सभी धर्म का मूल है और सभी का पिता है। उस सनातन धर्म की छत्र छाया में ही हम सब पले हैं। जीवन में जब दुख की घड़ी आती है, कोई संकट आता है, तब-तब सनातन धर्म हमारे साथ खड़ा होता है।
भारत पहले आया इंडिया बाद में
इंडिया और भारत नाम पर चल रहे विवाद पर पंडित मिश्रा ने कहा कि पहले भारत नाम था इंडिया तो बाद में आया। भारत या भारतीय कहने में अंग्रेजों को शर्मिंदगी होती थी क्योंकि इस शब्द में बोल्डनेस है, बुलंदी है। मैं भारतीय हूं यह कहने में भी व्यक्ति की छाती चौड़ी होती है। अंग्रेजों के समय से इंडिया नाम उपयोग में आया।
ओंकारेश्वर में एकात्म धाम पर नहीं की टिप्पणी
ओंकारेश्वर में मप्र सरकार द्वारा लाए जा रहे एकात्मधाम पर उनसे पूछा गया कि पर्वत पर शंकराचार्य जी की मूर्ति स्थापित की जा रही है। नीचे ज्योतिर्लिंग हैं और ऊपर भगवान के शिष्य की मूर्ति विराजित की जा रही है। इसका भारी विरोध भी हुआ था इस पर आप क्या कहेंगे? इस प्रश्न पर उन्होंने कहा कि मैं कुछ भी टिप्पणी नहीं करना चाहता। शंकराचार्यों की सहमति के बाद ही यह कार्य किया जा रहा है।
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संतों को राजनीति में आना चाहिए, राष्ट्रहित को सर्वोपरी रखें
पं. मिश्रा ने यह भी कहा कि साधु संतों को राजनीति में आना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वयं के हित के लिए राजनीति न करें, राष्ट्रहित के लिए राजनीति करें। पहले कुछ साधु संत राजनीति में आए लेकिन उन्होंने खुद के फायदे तलाश किए। उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मामले में प्रेरणा देते हैं। उन्होंने मिसाल कायम की है कि किस तरह अच्छी राजनीति की जा सकती है। उनसे सीखा जा सकता है। अगर संत आएंगे राजनीति में तो हमारा सनातन धर्म और मजबूत होगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी भी पार्टी के साथ नहीं हैं। जो भी सनातन धर्म के लिए काम कर रहा है वे उसके साथ हैं।
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भारत पहले आया इंडिया बाद में
इंडिया और भारत नाम पर चल रहे विवाद पर पंडित मिश्रा ने कहा कि पहले भारत नाम था इंडिया तो बाद में आया। भारत या भारतीय कहने में अंग्रेजों को शर्मिंदगी होती थी क्योंकि इस शब्द में बोल्डनेस है, बुलंदी है। मैं भारतीय हूं यह कहने में भी व्यक्ति की छाती चौड़ी होती है। अंग्रेजों के समय से इंडिया नाम उपयोग में आया।
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ओंकारेश्वर में एकात्म धाम पर नहीं की टिप्पणी
ओंकारेश्वर में मप्र सरकार द्वारा लाए जा रहे एकात्मधाम पर उनसे पूछा गया कि पर्वत पर शंकराचार्य जी की मूर्ति स्थापित की जा रही है। नीचे ज्योतिर्लिंग हैं और ऊपर भगवान के शिष्य की मूर्ति विराजित की जा रही है। इसका भारी विरोध भी हुआ था इस पर आप क्या कहेंगे? इस प्रश्न पर उन्होंने कहा कि मैं कुछ भी टिप्पणी नहीं करना चाहता। शंकराचार्यों की सहमति के बाद ही यह कार्य किया जा रहा है।
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संतों को राजनीति में आना चाहिए, राष्ट्रहित को सर्वोपरी रखें
पं. मिश्रा ने यह भी कहा कि साधु संतों को राजनीति में आना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वयं के हित के लिए राजनीति न करें, राष्ट्रहित के लिए राजनीति करें। पहले कुछ साधु संत राजनीति में आए लेकिन उन्होंने खुद के फायदे तलाश किए। उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मामले में प्रेरणा देते हैं। उन्होंने मिसाल कायम की है कि किस तरह अच्छी राजनीति की जा सकती है। उनसे सीखा जा सकता है। अगर संत आएंगे राजनीति में तो हमारा सनातन धर्म और मजबूत होगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी भी पार्टी के साथ नहीं हैं। जो भी सनातन धर्म के लिए काम कर रहा है वे उसके साथ हैं।
