Indore News: प्रतिभा ने दो बार दिलाया इंदौर को स्वच्छता अवार्ड, राजनीतिक तालमेल गड़बड़ा रहा था
दो साल पहले स्वच्छता सर्वे से पहले शहर में घुमने वाले बेसहारा बुजुर्गों को नगर निगम ने खुले डंपर से शहर के बाहर छोड़ दिया था। इस काम को लेकर शहर की छवि धूमिल हुई थी और मुख्यमंत्री की नाराजगी भी अफसरों को झेलना पड़ी थी।
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तीन साल से ज्यादा समय तक इंदौर नगर निगम की जिम्मेदारी संभालने के बाद २०१२ की आईएएस प्रतिभा पाल को रीवा कलेक्टर बनाया गया है। प्रतिभा पाल के कार्यकाल में दो बार इंदौर को स्वच्छता अवार्ड मिला। भाजपा में नई परिषद के गठन के बाद माना जा रहा था कि प्रतिभा की मेयर पुष्यमित्र भार्गव व अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ पटरी नहीं बैठ रही थी। उनके तबादले को बावड़ी कांड से जोड़कर भी देखा जा रहा है लेकिन ऐसा नहीं है। उनके तीन साल का कार्यकाल हो चुका है और सरकार ने कलेक्टर बनाकर उन्हें नई जिम्मेदारी दी है।
बुजुर्गों को शहर से बाहर कराने पर भी आई थी निशाने पर
दो साल पहले स्वच्छता सर्वे से पहले शहर में घुमने वाले बेसहारा बुजुर्गों को नगर निगम ने खुले डंपर से शहर के बाहर छोड़ दिया था। इस काम को लेकर शहर की छवि धूमिल हुई थी और मुख्यमंत्री की नाराजगी भी अफसरों को झेलना पड़ी थी। तब कुछ छोटे कर्मचारियों को निलंबित कर मामला शांत करने की कोशिश की थी।
दूसरी बार लगाता महिला अफसर को जिम्मेदारी
इंदौर में प्रतिभा पाल से पहले ज्यादातर निगमायुक्त पुरुष ही बने है, लेकिन प्रतिभा पाल के बेहतर प्रदर्शन के बाद सरकार ने दूसरी बार भी इंदौर निगमायुक्त के लिए महिला आईएएस हर्षिका सिंह को जिम्मेदारी दी है। वैसे इस पद के लिए चंद्रमौली शुक्ला, विवेक श्रौत्रिय के नाम भी चर्चाओं में थे।
