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राष्ट्रीय पुस्तक प्रेमी दिवस आज: सोशल मीडिया के दौर में भी किताबों से प्यार है बरकरार
सार
सोशल मीडिया युग में भी पुस्तकों का आकर्षण कायम है। भारत विश्व के प्रमुख प्रकाशकों में शामिल है। इंदौर में पुरानी पुस्तक दुकानों, निजी व सार्वजनिक लाइब्रेरी, रीडर्स क्लब और पुस्तक मेलों में उमड़ती भीड़ यह दर्शाती है कि आज भी पाठकों का पुस्तकों से गहरा जुड़ाव बना हुआ है।
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अब भी पुस्तक प्रेमियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नौ अगस्त को राष्ट्रीय पुस्तक प्रेमी दिवस मनाया जाता है। सोशल मीडिया और मोबाइल के दौर में यह आशंका बार-बार जाहिर की जाती है कि पाठकों का अभाव हो रहा है या पुस्तकें पढ़ने वाले अब बहुत कम लोग बचे हैं, लेकिन यह सोचना गलत है। अब भी पुस्तक प्रेमियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। युवाओं में भी पुस्तकों से प्यार बरकरार है।
विश्व के 10 प्रमुख पुस्तक प्रकाशकों में भारत शामिल
देश आजाद होने के वक्त साहित्य और लाइब्रेरी में पढ़ने का दौर था। 1951 में देश में साक्षरता प्रतिशत करीब 19 था, जो 2011 की जनगणना के अनुसार 75 प्रतिशत से अधिक है, ऐसे में यह कहना बेमानी होगा कि आज के दौर में पुस्तकें पढ़ी नहीं जा रही हैं। देश में समाचार पत्रों की लगातार बढ़ती प्रसार संख्या, विश्व के 10 प्रमुख पुस्तक प्रकाशक देशों में भारत का शामिल होना, आधुनिक होती देश की लाइब्रेरियां और उनका बदलता स्वरूप इस बात के सूचक है कि पुस्तकें आज भी पढ़ी जा रही हैं।
ये भी पढ़ें- 'भारत छोड़ो आंदोलन': इंदौर ने भरी थी हुंकार, पुरुषोत्तम विजय के नेतृत्व में सराफा बना अगस्त क्रांति का केंद्र
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विश्व के 10 प्रमुख पुस्तक प्रकाशकों में भारत शामिल
देश आजाद होने के वक्त साहित्य और लाइब्रेरी में पढ़ने का दौर था। 1951 में देश में साक्षरता प्रतिशत करीब 19 था, जो 2011 की जनगणना के अनुसार 75 प्रतिशत से अधिक है, ऐसे में यह कहना बेमानी होगा कि आज के दौर में पुस्तकें पढ़ी नहीं जा रही हैं। देश में समाचार पत्रों की लगातार बढ़ती प्रसार संख्या, विश्व के 10 प्रमुख पुस्तक प्रकाशक देशों में भारत का शामिल होना, आधुनिक होती देश की लाइब्रेरियां और उनका बदलता स्वरूप इस बात के सूचक है कि पुस्तकें आज भी पढ़ी जा रही हैं।
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साहित्य सामग्री की दुकानें बढ़ रहीं
आज भी इंदौर में पुस्तकों की सात-आठ दशक से ज्यादा पुरानी दुकानें अस्तित्व में हैं। गांधी हॉल के समीप रामपुरा वाला बिल्डिंग में रूपायन, अपोलो टावर में रीडर्स पैराडाइज, सरदार सोहन सिंह और सर्वोदय साहित्य भंडार आज भी इंदौर के पुस्तक प्रेमियों के ठीये हैं। इसके अलावा नगर में पुस्तकों की दुकानें कुछ मॉलों में, खजूरी बाजार में और रविवार को सुबह लगने वाले बाजारों में नजर आती हैं और यहां बड़ी संख्या में पुस्तक प्रेमी मिल जाते हैं।
क्या कहते हैं पुस्तक विक्रेता
नगर के प्रसिद्ध और प्राचीन पुस्तक विक्रेताओं का कहना है कि आज भी नियमित ग्राहक पुस्तक खरीदने के लिए आते हैं। उन्हें जो पुस्तक पसंद है और यदि वह उपलब्ध नहीं है तो उसे आर्डर देकर बुलाया जाता है। कुछ पुस्तक प्रेमी तो ऑनलाइन खरीदी करते हैं। हिंदी पुस्तकों के प्रमुख विक्रेता सर्वोदय साहित्य भंडार के संचालक का कहना कि आज भी पुस्तकें खरीदी जाती हैं और पाठक तलाश करने आते हैं।
पुस्तकों की निजी लाइब्रेरी
नगर में कुछ साहित्यकारों की निजी लाइब्रेरी हैं। इनमें तीन से पांच हजार पुस्तकों का संग्रह है। नगर में कुछ स्पोर्ट्स क्लबों में लाइब्रेरी हैं, जहां बच्चे जेरिनिमो शेल्टोन, विंपी किड्स डायरी, सुधा मूर्ति, अमिष त्रिपाठी की पुस्तकें पढ़ते हैं। राष्ट्र भाषा उन्ननयन संस्थान के अर्पण जैन निजी लाइब्रेरी का अभियान चला रहे हैं। नगर की कुछ सार्वजनिक और कई निजी लाइब्रेरी में पढ़ने वाले छात्रों का समूह भी नजर आता है।
ये भी पढ़ें- भक्ति और चिकित्सा का संगम, राऊ पहाड़ी पर स्थित जबरेश्वर महादेव मंदिर, जहां टीबी मरीजों की होती थी सेवा
आज भी इंदौर में पुस्तकों की सात-आठ दशक से ज्यादा पुरानी दुकानें अस्तित्व में हैं। गांधी हॉल के समीप रामपुरा वाला बिल्डिंग में रूपायन, अपोलो टावर में रीडर्स पैराडाइज, सरदार सोहन सिंह और सर्वोदय साहित्य भंडार आज भी इंदौर के पुस्तक प्रेमियों के ठीये हैं। इसके अलावा नगर में पुस्तकों की दुकानें कुछ मॉलों में, खजूरी बाजार में और रविवार को सुबह लगने वाले बाजारों में नजर आती हैं और यहां बड़ी संख्या में पुस्तक प्रेमी मिल जाते हैं।
क्या कहते हैं पुस्तक विक्रेता
नगर के प्रसिद्ध और प्राचीन पुस्तक विक्रेताओं का कहना है कि आज भी नियमित ग्राहक पुस्तक खरीदने के लिए आते हैं। उन्हें जो पुस्तक पसंद है और यदि वह उपलब्ध नहीं है तो उसे आर्डर देकर बुलाया जाता है। कुछ पुस्तक प्रेमी तो ऑनलाइन खरीदी करते हैं। हिंदी पुस्तकों के प्रमुख विक्रेता सर्वोदय साहित्य भंडार के संचालक का कहना कि आज भी पुस्तकें खरीदी जाती हैं और पाठक तलाश करने आते हैं।
पुस्तकों की निजी लाइब्रेरी
नगर में कुछ साहित्यकारों की निजी लाइब्रेरी हैं। इनमें तीन से पांच हजार पुस्तकों का संग्रह है। नगर में कुछ स्पोर्ट्स क्लबों में लाइब्रेरी हैं, जहां बच्चे जेरिनिमो शेल्टोन, विंपी किड्स डायरी, सुधा मूर्ति, अमिष त्रिपाठी की पुस्तकें पढ़ते हैं। राष्ट्र भाषा उन्ननयन संस्थान के अर्पण जैन निजी लाइब्रेरी का अभियान चला रहे हैं। नगर की कुछ सार्वजनिक और कई निजी लाइब्रेरी में पढ़ने वाले छात्रों का समूह भी नजर आता है।
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क्या कहते हैं पुस्तक प्रेमी
पुलिस सेवा से रिटायर सत्येंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि मैं ऐतिहासिक उपन्यास पढ़ने में विशेष रूचि रखता हूं। मेरी यह आदत स्कूल जीवन से है। जहां-जहां मेरी पोस्टिंग रही वहां पहले लाइब्रेरी खोजता और उपन्यास तलाश कर फुर्सत के समय पढ़ता रहा। यह आदत आज तक जारी है। स्पोर्ट्स क्लब के सदस्य सुराणा का कहना है कि मैं नगर की एक लाइब्रेरी का सदस्य हूं और उपन्यास पढ़ता रहता हूं।
अनहोप्ड क्लब से जुड़े कॉलेज छात्र
कॉलेज छात्रों के ग्रुप ने रीडर्स क्लब का गठन कर रखा है 'अनहोप्ड' नाम से कर रखा है। इसके सदस्य पंद्रह दिनों में रविवार एकत्र होते हैं और विशेष रूप से इस दौरान उनके द्वारा पढ़ी गई पुस्तक पर चर्चा करते हैं।
पुस्तक मेले में टूटे रिकॉर्ड
दिल्ली में संपन्न 31 वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले में उमड़ी पाठकों की भीड़ ने रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। एक अनुमान के अनुसार इसमें करीब 15 लाख से अधिक पाठकों ने पुस्तकों का अवलोकन किया और खरीदी ने भी रिकॉर्ड तोड़े। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के वक्त रामायण की बिक्री ने रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। रामायण की प्रतियां खत्म हो गई थीं। इन सभी बातों से जाहिर होता है कि आज भी पुस्तकों के प्रति पाठकों का प्रेम बरकरार है।
पुलिस सेवा से रिटायर सत्येंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि मैं ऐतिहासिक उपन्यास पढ़ने में विशेष रूचि रखता हूं। मेरी यह आदत स्कूल जीवन से है। जहां-जहां मेरी पोस्टिंग रही वहां पहले लाइब्रेरी खोजता और उपन्यास तलाश कर फुर्सत के समय पढ़ता रहा। यह आदत आज तक जारी है। स्पोर्ट्स क्लब के सदस्य सुराणा का कहना है कि मैं नगर की एक लाइब्रेरी का सदस्य हूं और उपन्यास पढ़ता रहता हूं।
अनहोप्ड क्लब से जुड़े कॉलेज छात्र
कॉलेज छात्रों के ग्रुप ने रीडर्स क्लब का गठन कर रखा है 'अनहोप्ड' नाम से कर रखा है। इसके सदस्य पंद्रह दिनों में रविवार एकत्र होते हैं और विशेष रूप से इस दौरान उनके द्वारा पढ़ी गई पुस्तक पर चर्चा करते हैं।
पुस्तक मेले में टूटे रिकॉर्ड
दिल्ली में संपन्न 31 वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले में उमड़ी पाठकों की भीड़ ने रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। एक अनुमान के अनुसार इसमें करीब 15 लाख से अधिक पाठकों ने पुस्तकों का अवलोकन किया और खरीदी ने भी रिकॉर्ड तोड़े। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के वक्त रामायण की बिक्री ने रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। रामायण की प्रतियां खत्म हो गई थीं। इन सभी बातों से जाहिर होता है कि आज भी पुस्तकों के प्रति पाठकों का प्रेम बरकरार है।
