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Indore News: एमएसपी से भी कम दाम में फसलें बेचने को मजबूर किसान, पूरे परिवार की आमदनी 10 हजार रु महीना
Tue, 08 Oct 2024 11:10 AM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Tue, 08 Oct 2024 11:10 AM IST
सार
किसानों की असली हालत बयां करती यह तस्वीर दिखाती है कि समाज का पेट भरने वाला किसान आज भी कितना मजबूर है। उसे घर चलाने लायक आमदनी भी नहीं होती है।
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किसानों ने अमर उजाला को बताई अपनी परेशानियां।
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
केंद्र और राज्य की सरकार किसानों की आय बढ़ाने और जीवन बेहतर करने के लाख दावे कर ले लेकिन हकीकत कुछ और ही है। एक ओर जहां किसान एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) बेहतर करने के लिए आंदोलन कर रहा है वहीं कुछ किसान तो अपनी फसलों को एमएसपी से भी कम मूल्य पर बेचने को मजबूर हैं।
क्यों मजबूर हैं किसान
दूर दराज में खेती करने वाले छोटे किसान सरकारी मंडियों तक नहीं आ पाते और गांव की मंडियों में जो भी दाम मिल जाता है उस पर अपनी उपज को बेच देते हैं। इंदौर में कपास की खेती करने वाले किसानों से जब बात की तो उन्होंने बताया कि हर फसल में उन्हें बड़ा घाटा होता है। उनके पास मंडी तक उपज पहुंचाने के लिए गाड़ियां ही नहीं हैं और गाड़ी ले भी लेंगे तो इतना डीजल जल जाएगा कि बचत ही नहीं होगी।
पूरे परिवार की आमदनी 10 हजार रुपए महीना
पेटलावद में खेती करने वाले हुंकार सिंह ने बताया कि वह छह महीने में 10 क्विंटल कपास पैदा करता है। सात बीघा में उसकी खेती है और इस उपज के उसे 60 हजार रुपए के लगभग मिल जाते हैं। सरकारी की एमएसपी पर यदि वह कपास को बेचे तो उसे इस उपज के एक लाख रुपए से अधिक मिलेंगे। उसने बताया कि उसे हर उपज पर 30 से 40 हजार रुपए का घाटा होता है। उसके पूरे परिवार को दस हजार रुपए महीने की आमदनी होती है।
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क्या है हल
संयुक्त किसान मोर्चा मप्र के सदस्य राहुल राज ने बताया कि सरकार को कपास और अन्य फसलों को खरीदने के लिए भी गांव गांव में केंद्र स्थापित करने चाहिए। जिस तरह से गेहूं और सोयाबीन के लिए अधिकतर जगह केंद्र हैं इसी तरह कपास और अन्य फसलों के लिए भी केंद्र होने चाहिए। छोटा किसान ट्रैक्टर, ट्राली नहीं खरीद सकता और यदि ले लेगा तो भी मंडी तक आने वहां पर बिक्री तक रुकने की उसकी क्षमता नहीं है।
मप्र सरकार जल्द किसानों की परेशानी दूर करेगी
सांसद शंकर लालवानी ने बताया कि सरकार मध्य प्रदेश में कपास के क्षेत्र में सुविधाएं बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके मद्देनजर, हम धार जिले में 10,000 करोड़ का कॉटन और टेक्सटाइल हब स्थापित कर रहे हैं। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले, इसके लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे।
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क्यों मजबूर हैं किसान
दूर दराज में खेती करने वाले छोटे किसान सरकारी मंडियों तक नहीं आ पाते और गांव की मंडियों में जो भी दाम मिल जाता है उस पर अपनी उपज को बेच देते हैं। इंदौर में कपास की खेती करने वाले किसानों से जब बात की तो उन्होंने बताया कि हर फसल में उन्हें बड़ा घाटा होता है। उनके पास मंडी तक उपज पहुंचाने के लिए गाड़ियां ही नहीं हैं और गाड़ी ले भी लेंगे तो इतना डीजल जल जाएगा कि बचत ही नहीं होगी।
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पूरे परिवार की आमदनी 10 हजार रुपए महीना
पेटलावद में खेती करने वाले हुंकार सिंह ने बताया कि वह छह महीने में 10 क्विंटल कपास पैदा करता है। सात बीघा में उसकी खेती है और इस उपज के उसे 60 हजार रुपए के लगभग मिल जाते हैं। सरकारी की एमएसपी पर यदि वह कपास को बेचे तो उसे इस उपज के एक लाख रुपए से अधिक मिलेंगे। उसने बताया कि उसे हर उपज पर 30 से 40 हजार रुपए का घाटा होता है। उसके पूरे परिवार को दस हजार रुपए महीने की आमदनी होती है।
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क्या है हल
संयुक्त किसान मोर्चा मप्र के सदस्य राहुल राज ने बताया कि सरकार को कपास और अन्य फसलों को खरीदने के लिए भी गांव गांव में केंद्र स्थापित करने चाहिए। जिस तरह से गेहूं और सोयाबीन के लिए अधिकतर जगह केंद्र हैं इसी तरह कपास और अन्य फसलों के लिए भी केंद्र होने चाहिए। छोटा किसान ट्रैक्टर, ट्राली नहीं खरीद सकता और यदि ले लेगा तो भी मंडी तक आने वहां पर बिक्री तक रुकने की उसकी क्षमता नहीं है।
मप्र सरकार जल्द किसानों की परेशानी दूर करेगी
सांसद शंकर लालवानी ने बताया कि सरकार मध्य प्रदेश में कपास के क्षेत्र में सुविधाएं बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके मद्देनजर, हम धार जिले में 10,000 करोड़ का कॉटन और टेक्सटाइल हब स्थापित कर रहे हैं। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले, इसके लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे।
