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MPPSC: ग्रामीण परिवेश से आई दीपिका बनी एमपीपीएससी टॉपर, प्रकृति से करतीं थी खुद को रिचार्ज

Sat, 18 Jan 2025 11:16 PM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर Published by: अर्जुन रिछारिया Updated Sat, 18 Jan 2025 11:16 PM IST
सार

MPPSC: देवास जिले की दीपिका ने पूरे प्रदेश में रोशन किया नाम, सक्सेस मंत्र बताते हुए कहा कि अपनी कमियों का आंकलन ठीक से करें, परफेक्शन के लिए सतत प्रयास करें

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दीपिका पाटीदार - फोटो : अमर उजाला, इंदौर

विस्तार

मध्यप्रदेश के देवास जिले के छोटे से गांव जामगोद की बेटी दीपिका पाटीदार ने मप्र राज्य सेवा परीक्षा MPPSC 2022 में शीर्ष स्थान प्राप्त कर पूरे प्रदेश में नाम गर्व से ऊंचा कर दिया है। दीपिका पाटीदार को 1575 में से 902.75 अंक प्राप्त हुए हैं। उन्हें मुख्य परीक्षा में 1400 में से 756.75 अंक और इंटरव्यू में 175 में से 146 अंक मिले हैं। दीपिका का चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ है, जो उनके अथक परिश्रम और अटूट दृढ़संकल्प का प्रमाण है। उनकी इस यात्रा ने साबित किया, कि ग्रामीण परिवेश से आने के बावजूद अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से हो, तो किसी भी ऊंचाई को छूना असंभव नहीं है। देवास की दीपिका पाटीदार ने 2018 से एमपीपीएससी के लिए लगातार अटैम्प्ट दिए। अपनी कमियों को पहचाना और उन्हें दूर करने के लिए लगातार प्रयास किया। इसी की बदौलत आज वे एमपीपीएससी टॉपर बनी हैं। 
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असफलता को ठीक से समझें
एमपीपीएससी (राज्य सेवा परीक्षा) 2022 में दीपिका पाटीदार ने टॉप किया है। दीपिका के पिता जनपद पंचायत सोनकच्छ में पंचायत सचिव हैं। दीपिका वर्तमान में इंदौर में ही रह रही हैं। वह मुख्य रूप से जामगोद गांव की रहने वाली हैं। अमर उजाला से बातचीत में दीपिका ने बताया कि एमपीपीएससी जैसी परीक्षाओं में बहुत छात्रों को एक बार में सफलता नहीं मिलती है। यदि आपको सफलता नहीं मिल रही है तो आपको पूरा ध्यान लगाकर अपनी कमियों को पहचानना चाहिए। हम कई बार अपनी कमियों का आंकलन ही ठीक से नहीं कर पाते। यदि आप अपनी कमियों को ठीक से पहचान लेंगे तो उन्हें दूर करने के मार्ग पर भी आगे बढ़ेंगे। 
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गांव से शहरों तक पढ़ाई की यात्रा
दीपिका ने अपनी 10वीं तक की शिक्षा तालौद के सरकारी स्कूल से पूरी की। इसके बाद उमियाधाम विद्यालय, राऊ से 11वीं और 12वीं में प्रथम स्थान हासिल किया। यहां भी उन्हें पुरस्कृत किया गया। इंदौर के होल्कर कॉलेज से बीएससी (कंप्यूटर साइंस) से की। ग्रेजुएशन के दौरान दीपिका का सिविल सेवा की ओर रुझान हुआ। ग्रेजुएशन के बाद, उन्होंने दिल्ली जाकर कोचिंग ली और जीएसीसी कॉलेज से इतिहास विषय से पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया। वे 2018 से एमपीपीएससी के लिए अटैम्प्ट दे रहीं थी। 

पिता पंचायत सचिव, भाई किसान
दीपिका के पिता गोपाल पाटीदार ग्राम पंचायत गढ़खजूरिया में सचिव हैं। दीपिका परिवार की छोटी बेटी हैं और उनके बड़े भाई खेती का काम संभालते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद, दीपिका ने अपने सपनों को आकार दिया और अपनी मेहनत से हर बाधा को पार किया है। दीपिका की मां गृहिणी हैं। 

18-18 घंटे तक की पढ़ाई
2019 में इंदौर लौटने के बाद, दीपिका ने महात्मा गांधी संस्थान में मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार की गहन तैयारी की। टेस्ट सीरीज और मॉक इंटरव्यू से उन्होंने अपनी तैयारी को निखारा। परीक्षा से पहले दीपिका ने दिन-रात मेहनत करते हुए 18-18 घंटे तक पढ़ाई की। उनका अनुशासन और समर्पण इस सफलता के मूल मंत्र बने।

मटकी नृत्य और प्रकृति से करीबी है पसंद
दीपिका की सफलता का आधार उनकी सकारात्मक सोच, धैर्य और आत्म-अनुशासन है। पढ़ाई के अलावा, दीपिका को मटकी नृत्य और प्रकृति के बीच समय बिताना बेहद पसंद है। वे कहती हैं कि जब भी थकान हो जाती थी तो मैं प्राकृतिक स्थलों पर जाकर थकान मिटाती थी। प्रकृति आपको रिचार्ज कर देती है।  


जिले में छाया उत्साह
दीपिका की सफलता पर उनके परिवार, समाज और जिले में उत्साह का माहौल है। उनके परिजन जल्द ही इंदौर जाकर इस उपलब्धि को उनके साथ साझा करेंगे। दीपिका पाटीदार ने यह सफलता एक संदेश के साथ हासिल की है, कि सपने देखने की हिम्मत करें और उन्हें पूरा करने के लिए खुद पर भरोसा रखें। उनकी कहानी लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल है।

मैं उसे बेटी नहीं बेटा कहता हूं
दीपिका के पिता गोपाल पाटीदार अपनी बेटी की सफलता से बहुत खुश हैं। उनका कहना है कि मुझे दीपिका की काबिलियत पर पूरा भरोसा था। मैं उसे बेटा ही कहता हूं। उसके जुनून को देखकर मुझे लगता था कि वह जरूर नाम रोशन करेगी। वह रात-रातभर पढ़ती थी। जब भी हम फोन लगाते थे, वह उस वक्त पढ़ाई ही करती रहती थी। आज तो वह इंदौर में हैं, हम कल सुबह इंदौर जाएंगे और शाम तक दीपिका के साथ जामगोद आने का प्रयास करेंगे। 
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