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MP Election: निमाड़ के गांधी रहे सीताराम साधौ, अब भी है परिवार का वर्चस्व, फिर विजयलक्ष्मी और मेव में मुकाबला
Sat, 11 Nov 2023 07:31 AM IST
दिनेश शर्मा
कमलेश सेन, इंदौर
कमलेश सेन, इंदौर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sat, 11 Nov 2023 07:31 AM IST
सार
महेश्वर विधानसभा क्षेत्र 1951-52 के बाद परिसीमन में गठित हुआ। यह 1957 से अस्तित्व में है और आरंभ से ही अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। 1957 से पूर्व यह क्षेत्र बड़वाह विधानसभा में आता था।
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MP Election 2023
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
विस्तार
महेश्वर निमाड़ का नर्मदा किनारे बसा एक ऐतिहासिक नगर है, जो खूबसूरत घाटों, महल, किले और मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। माहिष्मती नाम से प्राचीन ग्रंथों में उल्लेखित महेश्वर को इंदौर की महारानी देवी अहिल्या बाई ने राजधानी बनाया था। यहां रोजगार के साधन विकसित करने के लिए देवी अहिल्या बाई ने महेश्वरी साड़ियों के कुटीर उद्योग का कारोबार शुरू करवाया। यह आज भी रेवा उद्योग द्वारा संचालित है। महेश्वरी साड़ियां पूरे देश में अपनी अलग पहचान रखती हैं।
महेश्वर विस सीट 1957 से अस्तित्व में
महेश्वर विधानसभा क्षेत्र 1951-52 के बाद परिसीमन में गठित हुआ। यह 1957 से अस्तित्व में है और आरंभ से ही अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। 1957 से पूर्व यह क्षेत्र बड़वाह विधानसभा में आता था। 1952 में आरक्षित सीट बड़वाह से सीताराम साधौ ने जनसंघ के बलवंत राव को पराजित कर जीती थी। 1957 के पहले चुनाव में आरक्षित और सामान्य सीट से कांग्रेस उम्मीदवार सीताराम साधौ विजयी रहे थीं।
निमाड़ के प्रसिद्ध कांग्रेस नेता थे साधौ
सीताराम साधौ, निमाड़ के गांधी के नाम से जाने जाते थे। 1962 के चुनाव में जनसंघ के उम्मीदवार से साधौ हार गए थे। 1972 में साधौ पुनः विजयी रहे। 1977 में जनता लहर में साधौ हार गए थे। 1980 के चुनाव में सीतराम साधौ ने भाजपा के उम्मीदवार को पराजित कर जीत हासिल की थी। इस तरह सीताराम साधौ 1952 से 1985 तक करीब 32 वर्ष चुनावी राजनीति में बने रहे।
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1985 में विजयलक्ष्मी साधौ ने लड़ा पहला चुनाव
1985 में सीताराम साधौ की बेटी डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ने चुनाव लड़ा और विजयी रहीं। हालांकि, अगला ही चुनाव 1990 में वह भाजपा के मदनलाल वर्मा से हार गई थी। इसके बाद फिर 1993 एवं 1998 में साधौ विजयी रहीं, लेकिन 2003 में साधौ राजकुमार मेव से हार गईं। 2013 में राजकुमार मेव विजयी रहे तो 2018 में विजयलक्ष्मी साधौ पुनः जीत गई थी।
महेश्वर के चुनावी इतिहास को देखें तो अब तक हुए 14 चुनावों में से 13 में साधौ परिवार की भागीदारी रही। इस तरह 67 वर्ष के इतिहास में 62 वर्ष साधौ परिवार का महेश्वर की राजनीति पर एकाधिकार रहा।
राजकुमार मेव भाजपा उम्मीदवार के रूप में 2008 में हार गए थे, लेकिन 2013 में विजयी रहे थे। 2018 में उन्हें टिकट नहीं दिया तो वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े और भाजपा उम्मीदवार को तीसरे नंबर पर जाना पड़ा था। अब राजकुमार मेव फिर भाजपा में शामिल हो गए हैं, पार्टी ने उन्हें इस बार फिर से उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस से विजयलक्ष्मी साधौ उम्मीदवार हैं। मेव का स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध किया है। देखना है इस बार महेश्वर में किसे बाजी हाथ लगती है।
मतदाता संख्या
नोटा का इस्तेमाल वर्ष 2013 में 1753 और 2018 में 1689 मतदाताओं ने किया था।
राम की महिमा: महेश्वर के 1952 से हुए प्रायः चुनावों में राम नाम के उम्मीदवार रहे हैं। सीताराम साधौ तो हैं ही पर अन्य निर्दलीय जैसे महेश्वर राम, रामरतन, बलराम, मंशाराम, दयाराम, महंत सीताराम, रामचंद्र।
महेश्वर चुनाव की रोचक जानकारी
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महेश्वर विस सीट 1957 से अस्तित्व में
महेश्वर विधानसभा क्षेत्र 1951-52 के बाद परिसीमन में गठित हुआ। यह 1957 से अस्तित्व में है और आरंभ से ही अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। 1957 से पूर्व यह क्षेत्र बड़वाह विधानसभा में आता था। 1952 में आरक्षित सीट बड़वाह से सीताराम साधौ ने जनसंघ के बलवंत राव को पराजित कर जीती थी। 1957 के पहले चुनाव में आरक्षित और सामान्य सीट से कांग्रेस उम्मीदवार सीताराम साधौ विजयी रहे थीं।
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निमाड़ के प्रसिद्ध कांग्रेस नेता थे साधौ
सीताराम साधौ, निमाड़ के गांधी के नाम से जाने जाते थे। 1962 के चुनाव में जनसंघ के उम्मीदवार से साधौ हार गए थे। 1972 में साधौ पुनः विजयी रहे। 1977 में जनता लहर में साधौ हार गए थे। 1980 के चुनाव में सीतराम साधौ ने भाजपा के उम्मीदवार को पराजित कर जीत हासिल की थी। इस तरह सीताराम साधौ 1952 से 1985 तक करीब 32 वर्ष चुनावी राजनीति में बने रहे।
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1985 में विजयलक्ष्मी साधौ ने लड़ा पहला चुनाव
1985 में सीताराम साधौ की बेटी डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ने चुनाव लड़ा और विजयी रहीं। हालांकि, अगला ही चुनाव 1990 में वह भाजपा के मदनलाल वर्मा से हार गई थी। इसके बाद फिर 1993 एवं 1998 में साधौ विजयी रहीं, लेकिन 2003 में साधौ राजकुमार मेव से हार गईं। 2013 में राजकुमार मेव विजयी रहे तो 2018 में विजयलक्ष्मी साधौ पुनः जीत गई थी।
महेश्वर के चुनावी इतिहास को देखें तो अब तक हुए 14 चुनावों में से 13 में साधौ परिवार की भागीदारी रही। इस तरह 67 वर्ष के इतिहास में 62 वर्ष साधौ परिवार का महेश्वर की राजनीति पर एकाधिकार रहा।
राजकुमार मेव भाजपा उम्मीदवार के रूप में 2008 में हार गए थे, लेकिन 2013 में विजयी रहे थे। 2018 में उन्हें टिकट नहीं दिया तो वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े और भाजपा उम्मीदवार को तीसरे नंबर पर जाना पड़ा था। अब राजकुमार मेव फिर भाजपा में शामिल हो गए हैं, पार्टी ने उन्हें इस बार फिर से उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस से विजयलक्ष्मी साधौ उम्मीदवार हैं। मेव का स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध किया है। देखना है इस बार महेश्वर में किसे बाजी हाथ लगती है।
मतदाता संख्या
| कुल मतदाता | 2,26,993 |
| पुरुष | 1,13,982 |
| महिला | 1,13,008 |
| थर्ड जेंडर | 3 |
नोटा का इस्तेमाल वर्ष 2013 में 1753 और 2018 में 1689 मतदाताओं ने किया था।
राम की महिमा: महेश्वर के 1952 से हुए प्रायः चुनावों में राम नाम के उम्मीदवार रहे हैं। सीताराम साधौ तो हैं ही पर अन्य निर्दलीय जैसे महेश्वर राम, रामरतन, बलराम, मंशाराम, दयाराम, महंत सीताराम, रामचंद्र।
महेश्वर चुनाव की रोचक जानकारी
- महेश्वर में अब तक हुए कुल 14 विस चुनावों में से 9 बार कांग्रेस और 5 बार जनसंघ, जनता पार्टी व भाजपा जीते।
- पहली बार मतदान 25 फरवरी 1957 को हुआ था।
- 1962 में देवकी बाई पहली महिला उम्मीदवार मैदान में थीं।
- न्यूनतम उम्मीदवार दो और सर्वाधिक 14 मैदान में रहे हैं।
- सर्वाधिक मतदान वर्ष 2018 में 82.28 प्रतिशत हुआ था।
- लगातार दो बार जीत का रिकॉर्ड सीताराम साधौ और विजयलक्ष्मी साधौ के नाम है।
