{"_id":"656b25b49072c1c73107ffa3","slug":"mp-election-2018-results-congress-bjp-2023-12-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"MP Election: 2018 के चुनाव में सुबह तक नहीं आए थे परिणाम, देर रात दोनों दलों ने कर दिया था सरकार बनाने का दावा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MP Election: 2018 के चुनाव में सुबह तक नहीं आए थे परिणाम, देर रात दोनों दलों ने कर दिया था सरकार बनाने का दावा
Sat, 02 Dec 2023 06:10 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Sat, 02 Dec 2023 06:10 PM IST
सार
मप्र विधानसभा चुनाव 2018 के परिणाम आने में एक दिन से ज्यादा का समय लग गया था। अगले दिन सुबह 8 बजे चुनाव आयोग ने परिणाम घोषित किए थे।
विज्ञापन
कमलनाथ और शिवराज सिंह चौहान
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
रविवार को मप्र विधानसभा 2023 के चुनाव परिणाम आने वाले हैं और जनता का इंतजार खत्म होने वाला है। इस बार प्रशासन ने मतगणना के लिए पिछले चुनाव से बहुत अधिक तैयारियां की हैं और टेबलें बढ़ाने से लेकर अधिक कर्मचारी नियुक्त करने तक का काम किया है। दरअसल, साल 2018 के विधानसभा चुनाव के परिणाम मतगणना के दिन यानी 11 दिसंबर 2018 की देर रात तक भी नहीं आ पाए थे। मप्र की दोनों ही प्रमुख पार्टियों भाजपा और कांग्रेस ने देर रात सरकार बनाने के दावे कर दिए थे और राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने पूरे परिणाम आने तक इंतजार करने के लिए कहा था। इस बार इस तरह की स्थिति न बने इसलिए प्रशासन ने अधिक व्यवस्थाएं बढ़ाई हैं।
वीवीपैट मशीन से हुई देरी
जानकारों के मुताबिक विलंब की सबसे बड़ी वजह वीवीपैट मशीनें रहीं। मतगणना के दौरान ऐसा कई जगहों पर हुआ कि जहां उम्मीदवारों ने अपने संदेह को दूर करने के लिए मशीनों से वोटों की गणना के बाद वीवीपैट मशीनों की पर्ची भी गिनवाई। इससे रिजल्ट आने में काफी देरी हुई।
मॉक वोट को डिलीट करना भूल गए थे
कई जगहों पर चुनाव के दौरान मतदान अधिकारी ईवीएम में चुनाव शुरू होने से पहले डाले गए मॉक वोट को डिलीट करना भूल गए थे। इसलिए 175 ईवीएम की पर्चियों को भी गिना गया। इससे भी नतीजों में देरी हुई।
विज्ञापन
15 हजार कर्मचारी तैनात किए गए थे
2018 के चुनाव में 3,78,52,213 वोटों को गिनने में चुनाव आयोग को 24 घंटे से अधिक का समय लग गया था। चुनाव आयोग के मुताबिक औसतन करीब 22 राउंड में चुनावी प्रक्रिया पूरी हुई। अधिकतम 32 राउंड मतगणना इंदौर पांच विधानसभा क्षेत्र में हुई, जबकि न्यूनतम 15 राउंड मतगणना अनूपपुर जिले की कोतमा विधानसभा सीट में हुई। चुनाव आयोग ने मतगणना को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए करीब 15 हजार अधिकारियों और कर्मचारियों को तैनात किया था। एमपी में 51 मतगणना केंद्र बनाए गए थे।
इस बार दस घंटे में परिणाम आने की संभावना
मप्र में चुनाव आयोग ने बार 8 से 10 घंटे में परिणाम आने की बात कही है। इंदौर पांच नंबर जैसी सीट जहां पर अधिक बूथ हैं वहां पर टेबलें बढ़ाई गई हैं। ठीक इसी तरह पिछली बार की गलतियों से सीखते हुए कई जगह कर्मचारी और अधिकारियों की संख्या में भी इजाफा किया गया है।
विज्ञापन
वीवीपैट मशीन से हुई देरी
जानकारों के मुताबिक विलंब की सबसे बड़ी वजह वीवीपैट मशीनें रहीं। मतगणना के दौरान ऐसा कई जगहों पर हुआ कि जहां उम्मीदवारों ने अपने संदेह को दूर करने के लिए मशीनों से वोटों की गणना के बाद वीवीपैट मशीनों की पर्ची भी गिनवाई। इससे रिजल्ट आने में काफी देरी हुई।
विज्ञापन
मॉक वोट को डिलीट करना भूल गए थे
कई जगहों पर चुनाव के दौरान मतदान अधिकारी ईवीएम में चुनाव शुरू होने से पहले डाले गए मॉक वोट को डिलीट करना भूल गए थे। इसलिए 175 ईवीएम की पर्चियों को भी गिना गया। इससे भी नतीजों में देरी हुई।
विज्ञापन
15 हजार कर्मचारी तैनात किए गए थे
2018 के चुनाव में 3,78,52,213 वोटों को गिनने में चुनाव आयोग को 24 घंटे से अधिक का समय लग गया था। चुनाव आयोग के मुताबिक औसतन करीब 22 राउंड में चुनावी प्रक्रिया पूरी हुई। अधिकतम 32 राउंड मतगणना इंदौर पांच विधानसभा क्षेत्र में हुई, जबकि न्यूनतम 15 राउंड मतगणना अनूपपुर जिले की कोतमा विधानसभा सीट में हुई। चुनाव आयोग ने मतगणना को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए करीब 15 हजार अधिकारियों और कर्मचारियों को तैनात किया था। एमपी में 51 मतगणना केंद्र बनाए गए थे।
इस बार दस घंटे में परिणाम आने की संभावना
मप्र में चुनाव आयोग ने बार 8 से 10 घंटे में परिणाम आने की बात कही है। इंदौर पांच नंबर जैसी सीट जहां पर अधिक बूथ हैं वहां पर टेबलें बढ़ाई गई हैं। ठीक इसी तरह पिछली बार की गलतियों से सीखते हुए कई जगह कर्मचारी और अधिकारियों की संख्या में भी इजाफा किया गया है।
