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LS Elections: महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, सबसे ज्यादा बार MP चुनी गईं सुमित्रा ताई, तोड़ा था राजमाता का रिकॉर्ड
Wed, 13 Mar 2024 10:57 AM IST
दिनेश शर्मा
कमलेश सेन
कमलेश सेन
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 13 Mar 2024 10:57 AM IST
सार
लोकसभा चुनाव में इंदौर से सुमित्रा महाजन सर्वाधिक आठ बार महिला सांसद के रूप में देश व प्रदेश की शान बढ़ा चुकी हैं। उनके पहले राजमाता विजयराजे सिंधिया प्रदेश से सात बार लोकसभा सांसद रही थीं।
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लोकसभा चुनाव और महिलाओं को हिस्सेदारी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पिछले वर्ष हुए मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में महिला मतदाताओं की भूमिका ने मतदान प्रतिशत में वृद्धि का रिकॉर्ड कायम किया था। महिला वोटरों ने इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाई थी। कुछ विधानसभा क्षेत्रों में पुरुषों के मुकाबले महिला मतदाताओं संख्या अधिक थी। इस चुनाव में प्रदेश की 230 सीटों में से 27 पर महिला प्रतिनिधि चुनी गईं। दरअसल, प्रदेश में चुनाव में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। लोकसभा चुनाव को देखें तो इंदौर से सुमित्रा महाजन सर्वाधिक आठ बार महिला सांसद के रूप में देश व प्रदेश की शान बढ़ा चुकी हैं। उनके पहले राजमाता विजयराजे सिंधिया प्रदेश से सात बार लोकसभा सांसद रही थीं।
पहले चुनाव के वक्त थी पर्दा प्रथा
देश के पहले आम चुनाव में महिला मतदाताओं द्वारा मतदाता सूची में नाम दर्ज करवाने और वोट देने जाने में कई सामाजिक बंधन थे। तब महिलाओं को घर से निकलने की आजादी नहीं थी। पहली मतदाता सूची में महिलाओं ने नाम भी रोचक दर्ज कराए थे, जैसे गोलू की मां, रामू की बहन। इस तरह के नामों को देख चुनाव आयुक्त ने पुनः मतदाता सूची के बनाने के आदेश दिए थे। पहले लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ-साथ हुए थे। महिला मतदाताओं के लिए अलग मतदान कक्ष बनाए गए थे ताकि वे पर्दा प्रथा के चलते अलग मतदान कर सकें। देश में महिला साक्षरता का अभाव था। दलों को महिला उम्मीदवार भी नहीं मिल पाते थे। जाहिर है राजनीति में महिलाओं की उपस्थिति बहुत कम थी।
1957 में आठ महिला प्रत्याशी थीं, तीन जीतीं
नए मध्य प्रदेश के निर्माण के बाद 1957 के दूसरे और प्रदेश के पहले लोकसभा चुनाव में 36 सीटों के लिए आठ महिला उम्मीदवार चुनाव में खड़ी हुई थीं, जिसमें से तीन उम्मीदवार विजयी रहीं और तीन की जमानत जब्त हो गई थी। 1991 में प्रदेश में लोकसभा चनाव में सर्वाधिक 75 महिलाए चुनाव मैदान में उतरी थीं। इसमें से मात्र पांच विजयी रही थीं और 66 की जमानत जब्त हो गई थी।
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2009 में छह महिला सांसद थीं
प्रदेश में सर्वाधिक महिला सांसदों का चयन 1962 और 2009 में हुआ था, जिनकी संख्या 6 थीं। वर्ष 1977 में प्रदेश में एकमात्र महिला सागर से कांग्रेस की सहोदरा बाई चुनाव मैदान में थीं, वे भी पराजित हो गई थीं। इस तरह 1977 में प्रदेश से कोई भी महिला प्रतिनिधि लोकसभा में पहुंच नहीं पाई थी।
महाजन ने बनाया रिकॉर्ड
प्रदेश में सबसे अधिक आठ बार जीत कर लोकसभा चुनाव में उपस्थिति दर्ज करवाने का रिकॉर्ड इंदौर से सुमित्रा महाजन का है। वे नवीं लोकसभा से 16वीं लोकसभा के चुनाव तक आठ बार लगातार विजयी रहीं, जो एक रिकॉर्ड है। उनके पहले केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी व ग्वालियर रियासत की राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने प्रदेश से सात बार लोकसभा में प्रतिनिधित्व किया था। जबकि, मिनीमाता अगमदास पांच बार और सहोदरा बाई चार बार प्रदेश से लोकसभा के लिए चुनी गई थीं।
मप्र में महिला उम्मीदवारों की स्थिति
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पहले चुनाव के वक्त थी पर्दा प्रथा
देश के पहले आम चुनाव में महिला मतदाताओं द्वारा मतदाता सूची में नाम दर्ज करवाने और वोट देने जाने में कई सामाजिक बंधन थे। तब महिलाओं को घर से निकलने की आजादी नहीं थी। पहली मतदाता सूची में महिलाओं ने नाम भी रोचक दर्ज कराए थे, जैसे गोलू की मां, रामू की बहन। इस तरह के नामों को देख चुनाव आयुक्त ने पुनः मतदाता सूची के बनाने के आदेश दिए थे। पहले लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ-साथ हुए थे। महिला मतदाताओं के लिए अलग मतदान कक्ष बनाए गए थे ताकि वे पर्दा प्रथा के चलते अलग मतदान कर सकें। देश में महिला साक्षरता का अभाव था। दलों को महिला उम्मीदवार भी नहीं मिल पाते थे। जाहिर है राजनीति में महिलाओं की उपस्थिति बहुत कम थी।
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1957 में आठ महिला प्रत्याशी थीं, तीन जीतीं
नए मध्य प्रदेश के निर्माण के बाद 1957 के दूसरे और प्रदेश के पहले लोकसभा चुनाव में 36 सीटों के लिए आठ महिला उम्मीदवार चुनाव में खड़ी हुई थीं, जिसमें से तीन उम्मीदवार विजयी रहीं और तीन की जमानत जब्त हो गई थी। 1991 में प्रदेश में लोकसभा चनाव में सर्वाधिक 75 महिलाए चुनाव मैदान में उतरी थीं। इसमें से मात्र पांच विजयी रही थीं और 66 की जमानत जब्त हो गई थी।
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2009 में छह महिला सांसद थीं
प्रदेश में सर्वाधिक महिला सांसदों का चयन 1962 और 2009 में हुआ था, जिनकी संख्या 6 थीं। वर्ष 1977 में प्रदेश में एकमात्र महिला सागर से कांग्रेस की सहोदरा बाई चुनाव मैदान में थीं, वे भी पराजित हो गई थीं। इस तरह 1977 में प्रदेश से कोई भी महिला प्रतिनिधि लोकसभा में पहुंच नहीं पाई थी।
महाजन ने बनाया रिकॉर्ड
प्रदेश में सबसे अधिक आठ बार जीत कर लोकसभा चुनाव में उपस्थिति दर्ज करवाने का रिकॉर्ड इंदौर से सुमित्रा महाजन का है। वे नवीं लोकसभा से 16वीं लोकसभा के चुनाव तक आठ बार लगातार विजयी रहीं, जो एक रिकॉर्ड है। उनके पहले केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी व ग्वालियर रियासत की राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने प्रदेश से सात बार लोकसभा में प्रतिनिधित्व किया था। जबकि, मिनीमाता अगमदास पांच बार और सहोदरा बाई चार बार प्रदेश से लोकसभा के लिए चुनी गई थीं।
मप्र में महिला उम्मीदवारों की स्थिति
| चुनाव वर्ष | प्रदेश में सीटों की संख्या | चुनाव मैदान में | विजयी | जमानत जब्त |
| 1957 | 36 | 8 | 3 | 3 |
| 1962 | 36 | 11 | 6 | 3 |
| 1967 | 37 | 12 | 5 | 1 |
| 1971 | 37 | 6 | 3 | 2 |
| 1977 | 40 | 1 | 0 | 0 |
| 1980 | 40 | 8 | 3 | 4 |
| 1984 | 40 | 10 | 2 | 6 |
| 1989 | 40 | 20 | 3 | 13 |
| 1991 | 40 | 39 | 5 | 32 |
| 1996 | 40 | 75 | 5 | 66 |
| 1998 | 40 | 28 | 4 | 21 |
| 1999 | 40 | 23 | 3 | 16 |
| 2004 | 29 | 30 | 2 | 23 |
| 2009 | 29 | 29 | 6 | 23 |
| 2014 | 29 | 37 | 5 | 28 |
| 2019 | 29 | 40 | 4 | 31 |
