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Loksabha Election: मालवा निमाड़ के तीन भाजपा नेताओं की रही हसरत, काश बन जाते सांसद

Wed, 20 Mar 2024 03:50 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Wed, 20 Mar 2024 03:50 PM IST
सार

वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में कैलाश विजयवर्गीय खेमा सुमित्रा महाजन का टिकट नहीं चाहता था। विजयवर्गीय खुद टिकट की दावेदारी कर रहे थे। महाजन की उम्मीदवारी रोकने के लिए विजयवर्गीय समर्थक दिल्ली तक विरोध करने गए थे, लेकिन तब महाजन का ही टिकट फायनल हुआ।

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Loksabha Election: Three BJP leaders from Malwa Nimar wish they could become MPs.
अर्चना और विजयवर्गीय भी रहे है कभी लोकसभा टिकट के दावेदार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सांसद बनकर केंद्र की राजनीति करना कई नेताओं का सपना रहता है, लेकिन यह निर्भर करता है लोकसभा का टिकट मिलने पर। मालवा निमाड़ की तीन भाजपा नेता भी दस-पंद्रह साल पहले लोकसभा चुनाव लड़कर संसद की चौखट पर जाना चाहते थे, लेकिन तब मौका नहीं मिला और अब वे प्रदेश की राजनीति में रमे हुए है। इंदौर से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कैलाश विजयवर्गीय ने कई प्रयास किए। इंदौर की राजनीति में ताई और भाई के बीच के मतभेद जगजाहिर रहे है। इस तरह की स्थिति खंडवा सांसद रहे नंदकुमार चौहान और पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस के बीच की रही। सांसद बनने का सपना तो 80 के दशक में विधायक बने सत्यनारायण सत्तन ने भी देखा था, लेकिन तब संगठन ने महिला कार्ड खेलते हुए सुमित्रा महाजन को पहली बार टिकट दिया था।

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15 साल पहले ताई की उम्मीदवारी का खुलकर विरोध

वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में कैलाश विजयवर्गीय खेमा सुमित्रा महाजन का टिकट नहीं चाहता था। विजयवर्गीय खुद टिकट की दावेदारी कर रहे थे। महाजन की उम्मीदवारी रोकने के लिए विजयवर्गीय समर्थक प्लेन से दिल्ली तक विरोध करने गए थे, लेकिन तब महाजन का ही टिकट फायनल हुआ। उस साल महाजन जीती, लेकिन उनकी लीड 11 हजार वोटों में सिमट गई थी।

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80 के दशक में सत्यानारायण सत्तन एक नंबर विधानसभा क्षेत्र के विधायक बने थे। तब इंदौर लोकसभा सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थी। 1989 में कांग्रेस के कद्दावर नेता प्रकाश चंद्र सेठी के सामने चुनाव लड़ने के लिए सत्यनारायण सत्तन ने भी ताल ठोकी थी,लेकिन भाजपा संगठन ने तब नए चेहरे के रुप में सुमित्रा महाजन को उम्मीदवार बनाया और वे न केवल वो चुनाव जीती, बल्कि लगातार 2019 तक इंदौर की सांसद रही। 2019 में टिकट के प्रबल दावेदार विजयवर्गीय माने जा रहे थे, लेकिन बंगाल प्रभारी होने के कारण उन्होंने खुद को टिकट की दौड़ से अलग कर लिया था।

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खंडवा में भी टिकट के लिए चौहान और अर्चना के बीच रही अदावत

खंडवा लोकसभा सीट से नंदकुमार चौहान कई वर्षों तक सांसद रहे। इंदौर में विभिन्न राजनीति पदों पर रहने के बाद अर्चना चिटनीस खंडवा में बस गई और बुरहानपुर से भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाया। वर्ष 2003 में वे विधायक बन गई। इसके बाद वे खंडवा सीट से सांसद के टिकट की दावेदारी भी कई बार जताती रही। इस वजह से तब सांसद रहे नंदकुमार चौहान और अर्चना के बीच लगातार राजनीतिक अदावत जारी रही, हालांकि अर्चना को टिकट नहीं मिल पाया। पिछला विधानसभा चुनाव भी वे हार गई। वर्ष 2022 में सांसद नंदकुमार चौहान के निधन के बाद खंडवा लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुए लेकिन तब संगठन ने विधानसभा चुनाव हारी अर्चना के बजाए ज्ञानेश्वर पाटिल को उम्मीदवार बनाया।

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