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Indore News: ट्रांसफर से टूटे जस्टिस रमण, फेयरवेल में बोले ईश्वर नहीं भूलता, उन्हें दुःख उठाना पड़ेगा
Tue, 20 May 2025 07:33 PM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Tue, 20 May 2025 07:33 PM IST
सार
Indore News: जस्टिस दुप्पला वेंकट रमण ने अपने फेयरवेल में खुलासा किया कि उनका ट्रांसफर आंध्र प्रदेश से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दुर्भावना और परेशान करने के इरादे से किया गया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट पर भी अनसुनी करने का आरोप लगाया
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जस्टिस दुप्पला वेंकट रमण
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विस्तार
जस्टिस दुप्पला वेंकट रमण ने कहा है कि 2023 में गृह राज्य आंध्र प्रदेश से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में उनका ट्रांसफर किया गया। यह ट्रांसफर दुर्भावना और परेशान करने के लिए किया गया। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना ट्रांसफर करने वालों के लिए कहा कि मैं उनके अहंकार के लिए संतुष्ट होने के लिए खुश हूं। अब वे रिटायर हो चुके हैं। ईश्वर न तो क्षमा करता है और न भूलता है। उन्हें दूसरे तरीके से भी कष्ट उठाना पड़ेगा।
जस्टिस दुप्पला वेंकट रमण मप्र हाईकोर्ट की इंदौर बेंच के जस्टिस हैं। जस्टिस रमण 2 जून को रिटायर हो रहे हैं। मंगलवार को अपने फेयरवेल को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। जब उन्होंने यह कहा उस समय फेयरवेल समारोह में जस्टिस विवेक रूसिया, एडिशनल एडवोकेट जनरल आनंद सोनी, डिप्टी सॉलिसिटर जनरल हिमांशु जोशी, एडवोकेट सुनील गुप्ता और इंदौर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इनानी भी मौजूद थे।
पत्नी के बेहतर इलाज के लिए मैंने निवेदन किया था
जस्टिस रमण ने आगे कहा कि मैंने आंध्र के बाद दूसरे विकल्प के रूप में कर्नाटक राज्य में ट्रांसफर चाहा था, ताकि मेरी पत्नी को बेहतर इलाज मिल सके। लेकिन, माननीय उच्चतम न्यायालय ने इस पर विचार नहीं किया। मैंने 1 नवंबर 2023 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदभार संभाला था। 19 जुलाई 2024 और 28 अगस्त 2024 को एक आवेदन भेजा, लेकिन उस पर न तो विचार किया गया और न ही खारिज किया गया। मैंने दूसरा अभ्यावेदन भेजा पर उसे भी न तो खारिज किया गया और न ही विचार किया गया। मेरे जैसे न्यायाधीश सकारात्मक मानवीय विचार की अपेक्षा करते हैं। मौजूदा चीफ जस्टिस जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई विचार कर सकते हैं, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है।
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मैं गांव में पढ़ा, 14 साल में बिजली देखी, बचपन में ही पिता को खो दिया था
अपने निजी जीवन के बारे में बताते हुए जस्टिस रमण ने कहा मेरी जीवन यात्रा एक दूरदराज के गांव से शुरू हुई। वहां बिजली, सड़क, मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलती थीं। जब मैं 14 साल का था तब पहली बार बिजली देखी थी। 13 साल की उम्र में मेरे पिता की मृत्यु हो गई। मुझे मेरी मां और भाई ने पाला। उन्होंने मुझे पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। जीवन में कई चुनौतियों का सामना करने के बाद महसूस किया कि कड़ी मेहनत के अलावा सफलता का कोई शॉर्ट कट नहीं है।
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जस्टिस दुप्पला वेंकट रमण मप्र हाईकोर्ट की इंदौर बेंच के जस्टिस हैं। जस्टिस रमण 2 जून को रिटायर हो रहे हैं। मंगलवार को अपने फेयरवेल को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। जब उन्होंने यह कहा उस समय फेयरवेल समारोह में जस्टिस विवेक रूसिया, एडिशनल एडवोकेट जनरल आनंद सोनी, डिप्टी सॉलिसिटर जनरल हिमांशु जोशी, एडवोकेट सुनील गुप्ता और इंदौर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इनानी भी मौजूद थे।
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पत्नी के बेहतर इलाज के लिए मैंने निवेदन किया था
जस्टिस रमण ने आगे कहा कि मैंने आंध्र के बाद दूसरे विकल्प के रूप में कर्नाटक राज्य में ट्रांसफर चाहा था, ताकि मेरी पत्नी को बेहतर इलाज मिल सके। लेकिन, माननीय उच्चतम न्यायालय ने इस पर विचार नहीं किया। मैंने 1 नवंबर 2023 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदभार संभाला था। 19 जुलाई 2024 और 28 अगस्त 2024 को एक आवेदन भेजा, लेकिन उस पर न तो विचार किया गया और न ही खारिज किया गया। मैंने दूसरा अभ्यावेदन भेजा पर उसे भी न तो खारिज किया गया और न ही विचार किया गया। मेरे जैसे न्यायाधीश सकारात्मक मानवीय विचार की अपेक्षा करते हैं। मौजूदा चीफ जस्टिस जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई विचार कर सकते हैं, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है।
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मैं गांव में पढ़ा, 14 साल में बिजली देखी, बचपन में ही पिता को खो दिया था
अपने निजी जीवन के बारे में बताते हुए जस्टिस रमण ने कहा मेरी जीवन यात्रा एक दूरदराज के गांव से शुरू हुई। वहां बिजली, सड़क, मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलती थीं। जब मैं 14 साल का था तब पहली बार बिजली देखी थी। 13 साल की उम्र में मेरे पिता की मृत्यु हो गई। मुझे मेरी मां और भाई ने पाला। उन्होंने मुझे पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। जीवन में कई चुनौतियों का सामना करने के बाद महसूस किया कि कड़ी मेहनत के अलावा सफलता का कोई शॉर्ट कट नहीं है।
