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इंदौर: 4 चौराहों पर होंगे ट्रैफिक सुधार के ये बड़े प्रयोग, सफल रहे तो पूरे शहर में लागू होंगे
Sat, 31 Oct 2026 10:24 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Sat, 31 Oct 2026 10:24 PM IST
सार
इंदौर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए गठित सात सदस्यीय समिति की बैठक हुई। समिति ने चार चौराहों को टेस्ट प्रोजेक्ट के रूप में चुनकर लेफ्ट टर्न फ्री करने और जाम से निपटने के लिए नई योजनाएं बनाई हैं।
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शाम के वक्त इस तरह रेंगता है इंदौर। फोटो- जयेश मालवीय।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए सात सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी की अध्यक्षता वाली यह समिति यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने के उपाय सुझाएगी और संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने पर काम करेगी। समिति की पहली बैठक 31 अक्टूबर को बुलाई गई थी। अधिकारियों के अनुसार, राहुल सेठी ने सभी सदस्यों को बैठक में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए अपने सुझाव और प्रस्ताव लेकर उपस्थित होने को कहा था।
इन चार चौराहों पर होंगे बड़े बदलाव
सुझावों के अंतर्गत कई विषयों पर विस्तार से बात हुई। इसमें ट्रैफिक सुधार के लिए रसोमा, एलआईजी, लैंटर्न, हुकुमचंद घंटाघर चौराहे को टेस्ट प्रोजेक्ट के रूप में लेकर वहां आवश्यक उपाय करने पर सहमति बनी है। यह भी तय किया गया है कि यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो शहर के अन्य चौराहों पर भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जाएगी। अब इस समिति की अगली बैठक 10 नवंबर को आयोजित होगी, जबकि हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को तय की गई है।
पर्याप्त पुलिसबल भी रखने के लिए कहा
अधिकारियों के मुताबिक, समिति हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार यातायात व्यवस्था में सुधार के पुख्ता उपाय सुझाएगी। इसके साथ ही ट्रैफिक प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने पर भी पूरा ध्यान दिया जाएगा ताकि आम जनता को जाम से राहत मिल सके। इंदौर हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने 13 अक्टूबर को जारी आदेश में अधिकारियों को शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाने का कड़ा निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने प्रमुख ट्रैफिक चौराहों पर पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करने को भी कहा था, ताकि वाहनों की आवाजाही को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके।
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यह बदलाव किए जाएंगे...
यातायात सुधार समिति ने चार प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सुधार के लिए नया टेस्ट प्रोजेक्ट लागू कर दिया है। इसके तहत लेफ्ट साइड ड्राइविंग को पूरी तरह फ्री किया गया है और रॉन्ग साइड ड्राइविंग पर सख्त रोक लगाई गई है। इसके अलावा पीक आवर्स के दौरान सिग्नल का समय बढ़ाने और अनावश्यक स्पीड ब्रेकर हटाने की भी योजना पर काम चल रहा है। इन सभी कदमों का मुख्य उद्देश्य शहर में ट्रैफिक की समस्या को कम करना है।
जागरूकता पर भी विशेष ध्यान
हाईकोर्ट की ट्रैफिक सुधार समिति ने चार चौराहों पर इन सुधारों का परीक्षण शुरू कर दिया है और ट्रैफिक इंजीनियरिंग, पुलिस प्रवर्तन, नागरिक जागरूकता तथा जाम की सूचना देने वाले समूह के जरिए यातायात समस्याएं घटाने की योजना बताई है। यह काम केवल लेफ्ट टर्न तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य अत्यधिक जाम और उससे जुड़ी समस्याओं को कम करना है। नागरिकों की ट्रैफिक जिम्मेदारी और जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों को महीने में एक बार बच्चों के साथ नागरिक जिम्मेदारियों और यातायात जागरूकता पर मार्गदर्शन सत्र चलाने के सुझाव दिए जाएंगे। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि बच्चे भविष्य में वाहन चलाने के साथ-साथ अपने माता-पिता को भी ट्रैफिक सिग्नल न तोड़ने और सही दिशा के लिए सही लेन में रहने की याद दिलाएंगे। इस पूरी समस्या से निपटने के उपायों में ट्रैफिक जागरूकता, पुलिस कर्मियों की मदद, थोड़ी सख्ती और बेहतर ट्रैफिक इंजीनियरिंग को शामिल किया गया है।
शहर का ट्रैफिक समूह बनेगा, 10 मिनट में मदद पहुंचेगी
जाम की तुरंत सूचना देने के लिए एक विशेष ट्रैफिक समूह का गठन किया गया है। ट्रैफिक पुलिस हरसंभव मदद करने की कोशिश करेगी, लेकिन नागरिकों की ट्रैफिक समझ और जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है। इस ट्रैफिक समूह के माध्यम से जाम या अन्य किसी समस्या की सूचना तुरंत संदेशों के जरिए मिलेगी, ताकि वे तुरंत कार्रवाई करने की कोशिश कर सकें और लगभग 10 मिनट या उससे पहले वहां से यातायात सुचारू रूप से जारी करवा सकें।
समिति में यह हैं शामिल
आपको बता दें कि इस सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति में प्रशासन और पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी की अध्यक्षता वाली इस समिति में जिला कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, इंदौर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, ट्रैफिक पुलिस के उपायुक्त, एक शासकीय अधिवक्ता और एक सिविल इंजीनियर को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
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इन चार चौराहों पर होंगे बड़े बदलाव
सुझावों के अंतर्गत कई विषयों पर विस्तार से बात हुई। इसमें ट्रैफिक सुधार के लिए रसोमा, एलआईजी, लैंटर्न, हुकुमचंद घंटाघर चौराहे को टेस्ट प्रोजेक्ट के रूप में लेकर वहां आवश्यक उपाय करने पर सहमति बनी है। यह भी तय किया गया है कि यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो शहर के अन्य चौराहों पर भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जाएगी। अब इस समिति की अगली बैठक 10 नवंबर को आयोजित होगी, जबकि हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को तय की गई है।
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पर्याप्त पुलिसबल भी रखने के लिए कहा
अधिकारियों के मुताबिक, समिति हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार यातायात व्यवस्था में सुधार के पुख्ता उपाय सुझाएगी। इसके साथ ही ट्रैफिक प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने पर भी पूरा ध्यान दिया जाएगा ताकि आम जनता को जाम से राहत मिल सके। इंदौर हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने 13 अक्टूबर को जारी आदेश में अधिकारियों को शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाने का कड़ा निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने प्रमुख ट्रैफिक चौराहों पर पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करने को भी कहा था, ताकि वाहनों की आवाजाही को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके।
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यह बदलाव किए जाएंगे...
यातायात सुधार समिति ने चार प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सुधार के लिए नया टेस्ट प्रोजेक्ट लागू कर दिया है। इसके तहत लेफ्ट साइड ड्राइविंग को पूरी तरह फ्री किया गया है और रॉन्ग साइड ड्राइविंग पर सख्त रोक लगाई गई है। इसके अलावा पीक आवर्स के दौरान सिग्नल का समय बढ़ाने और अनावश्यक स्पीड ब्रेकर हटाने की भी योजना पर काम चल रहा है। इन सभी कदमों का मुख्य उद्देश्य शहर में ट्रैफिक की समस्या को कम करना है।
जागरूकता पर भी विशेष ध्यान
हाईकोर्ट की ट्रैफिक सुधार समिति ने चार चौराहों पर इन सुधारों का परीक्षण शुरू कर दिया है और ट्रैफिक इंजीनियरिंग, पुलिस प्रवर्तन, नागरिक जागरूकता तथा जाम की सूचना देने वाले समूह के जरिए यातायात समस्याएं घटाने की योजना बताई है। यह काम केवल लेफ्ट टर्न तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य अत्यधिक जाम और उससे जुड़ी समस्याओं को कम करना है। नागरिकों की ट्रैफिक जिम्मेदारी और जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों को महीने में एक बार बच्चों के साथ नागरिक जिम्मेदारियों और यातायात जागरूकता पर मार्गदर्शन सत्र चलाने के सुझाव दिए जाएंगे। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि बच्चे भविष्य में वाहन चलाने के साथ-साथ अपने माता-पिता को भी ट्रैफिक सिग्नल न तोड़ने और सही दिशा के लिए सही लेन में रहने की याद दिलाएंगे। इस पूरी समस्या से निपटने के उपायों में ट्रैफिक जागरूकता, पुलिस कर्मियों की मदद, थोड़ी सख्ती और बेहतर ट्रैफिक इंजीनियरिंग को शामिल किया गया है।
शहर का ट्रैफिक समूह बनेगा, 10 मिनट में मदद पहुंचेगी
जाम की तुरंत सूचना देने के लिए एक विशेष ट्रैफिक समूह का गठन किया गया है। ट्रैफिक पुलिस हरसंभव मदद करने की कोशिश करेगी, लेकिन नागरिकों की ट्रैफिक समझ और जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है। इस ट्रैफिक समूह के माध्यम से जाम या अन्य किसी समस्या की सूचना तुरंत संदेशों के जरिए मिलेगी, ताकि वे तुरंत कार्रवाई करने की कोशिश कर सकें और लगभग 10 मिनट या उससे पहले वहां से यातायात सुचारू रूप से जारी करवा सकें।
समिति में यह हैं शामिल
आपको बता दें कि इस सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति में प्रशासन और पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी की अध्यक्षता वाली इस समिति में जिला कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, इंदौर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, ट्रैफिक पुलिस के उपायुक्त, एक शासकीय अधिवक्ता और एक सिविल इंजीनियर को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
