Indore: देश में इंदौर और अहमदाबाद का बीआरटीएस ही सफल, इंदौर बीआरटीएस को लेकर मेयर करेंगे मुख्यमंत्री से चर्चा
अहमदाबाद के बाद इंदौर में ही लोक परिवहन का यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा जबकि दिल्ली, भोपाल, पुणे बीआरटीएस अनदेखी के शिकार हुए। इंदौर में हर दिन एक लाख से ज्यादा यात्री आई बस का सफर करते है।
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भोपाल बीआरटीएस (बस ट्रांजिट रैपिड सिस्टम) को हटाए जाने के फैसले के बाद इंदौर बीआरटीएस एक बार फिर चर्चाओं में है। इंदौर बीआरटीएस की बस लेने को हटाने की मांग पहले उठ चुकी है और इसका मामला कोर्ट तक भी पहुंच चुका है लेकिन यह भी सच है कि इंदौर का बीआरटीएस देश का दूसरा सफल बीआरटीएस है।
अहमदाबाद के बाद इंदौर में ही लोक परिवहन का यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा जबकि दिल्ली, भोपाल, पुणे बीआरटीएस अनदेखी के शिकार हुए।
इंदौर में हर दिन एक लाख से ज्यादा यात्री आई बस का सफर करते है। बीआरटीएस को लेकर हाई कोर्ट में याचिका लगाने वाले किशोर कोडवानी का कहना है कि सड़क सब के लिए होती है। किसी एक वाहन के लिए डेडिकेटेड लेन की अवधारणा ही गलत है।
इंदौर में बीआरटीएस के कारण 11 किलोमीटर के हिस्से में बार बार यातायात बाधित होता है। हमारा पक्ष हम कोर्ट में भी कई बार रख चुके है। इस मामले में इंदौर मेयर पुष्य मित्र भार्गव का कहना है कि इंदौर का बीआरटीएस देश का दूसरा सफल बीआरटीएस है। यह एक प्रोगेसिव स्टेप साबित हुआ। फिर भी इस मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव से विमर्श किया जाएगा। भोपाल में क्या परिणाम आते है इसका अध्ययन किया जाएगा।
ढाई सौ करोड़ में बना था इंदौर बीआरटीएस
11 साल पहले इंदौर के साढ़े 11 किलो मीटर लंबाई में ढाई सौ करोड़ की लागत से बीआरटीएस बनकर तैयार हुआ था। देश में सबसे पहले इंदौर का प्रोजेक्ट ही मंजूर हुआ था। निरंजनपुर से राजीव गांधी प्रतिमा तक 30 से ज्यादा बस स्टॉप बनाए गए है।
बस की लेन में दूसरे वाहनों का आवागमन नहीं हो सकता। उसमें बस के अलावा एम्बुलेंस ही चल सकती है। बस लेन के अलावा मोटर व्हीकल लेन, सर्विस रोड, सायकल ट्रेक और फुटपाथ भी बनाए गए है। इंदौर में दिनभर में आईबस में 80 हजार से एक लाख लोग सफर करते है। भोपाल में बीआरटीएस 30 किलोमीटर से ज्यादा लंबा है।
