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Indore News: नगर निगम की लापरवाही से सड़कों पर दौड़ रहे बिना नंबर के टैंकर, पानी की भारी बर्बादी
Thu, 27 Mar 2025 01:51 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ,इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ,इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Thu, 27 Mar 2025 01:51 PM IST
सार
Indore News: गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत के बीच इंदौर नगर निगम की लापरवाही उजागर हुई है। बिना नंबर और जर्जर हालत में दौड़ते टैंकर शहर में दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं, वहीं बड़ी मात्रा में पानी भी व्यर्थ बह रहा है।
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Indore News
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
विस्तार
गर्मी का मौसम शुरू होते ही शहर में पानी की किल्लत बढ़ गई है। नगर निगम द्वारा रहवासियों तक पानी पहुंचाने के लिए टैंकरों की व्यवस्था की जाती है, लेकिन इन टैंकरों की स्थिति अत्यंत दयनीय है। नगर निगम में अटैच कई टैंकरों के पास नंबर प्लेट तक नहीं हैं और वे बिना किसी नियम-कायदे के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इन टैंकरों की तेज रफ्तार से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। इतना ही नहीं, इनमें से कई टैंकर जर्जर हालत में हैं, जिनसे लगातार पानी रिसता रहता है, जिससे बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद हो रहा है।
बिना नंबर और लीकेज टैंकरों से पानी की बर्बादी
शहर के कई जोन में ऐसे टैंकर अटैच किए गए हैं, जिनकी नंबर प्लेट गायब है और उनकी पाइप लाइन से निरंतर पानी टपकता रहता है। नगर निगम के जोन 1, 3, 6 और 14 में इन टैंकरों की स्थिति सबसे खराब है। इसके बावजूद नगर निगम के अधिकारी इस गंभीर समस्या की अनदेखी कर रहे हैं। पानी की सप्लाई के दौरान भारी मात्रा में पानी बर्बाद हो रहा है, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। यह पानी जहां लोगों की जरूरतें पूरी कर सकता था, वहीं अब व्यर्थ में बहकर नालियों में चला जाता है।
नेताओं के दबाव में हो रही टैंकर अटैचमेंट प्रक्रिया
सूत्रों के अनुसार, नगर निगम में टैंकरों को अटैच करने की प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ गया है। नेताओं द्वारा अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर टैंकरों को निगम में शामिल करवाया जा रहा है, चाहे वे नियमों के अनुरूप हों या नहीं। नगर निगम के प्रत्येक जोनल कार्यालय पर नर्मदा प्रोजेक्ट अधिकारियों को नेताओं की इच्छानुसार टैंकर अटैच करने के लिए दबाव डाला जा रहा है। कई टैंकर तो ऐसे हैं जो सालभर से निगम में जुड़े हुए हैं और पानी सप्लाई कर रहे हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश की स्थिति बेहद खराब है। इसके बावजूद नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी नेताओं के दबाव के कारण इन टैंकरों पर कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं, जिससे आम जनता पानी की समस्या से जूझ रही है।
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तेज रफ्तार टैंकरों से बढ़ रहा दुर्घटना का खतरा
बिना नंबर और जर्जर टैंकरों का सबसे बड़ा खतरा उनकी तेज रफ्तार है। निगम से अनुबंधित टैंकरों के चालक लापरवाहीपूर्वक टैंकर चलाते हैं, जिससे सड़क पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। गर्मी के मौसम में नगर निगम द्वारा अटैच किए गए इन टैंकरों की कोई जांच नहीं की जाती, जिससे बिना नंबर और लीकेज टैंकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इस पर जब नगर निगम जोन 1 के जोनल अधिकारी अतीक खान से सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे नर्मदा प्रोजेक्ट अधिकारियों की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ लिया। इसी तरह, जोन 3 के अतुल सिंह, जोन 6 के लोकेश शर्मा और जोन 14 के सालकराम शितोले ने भी यही बयान दिया कि टैंकरों की देखरेख नर्मदा प्रोजेक्ट के अधिकारियों द्वारा की जाती है। इससे स्पष्ट होता है कि नगर निगम में टैंकरों की व्यवस्था पूरी तरह से अव्यवस्थित और लापरवाही से भरी हुई है, जिससे पानी की बर्बादी और दुर्घटनाओं की संभावना लगातार बनी हुई है।
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बिना नंबर और लीकेज टैंकरों से पानी की बर्बादी
शहर के कई जोन में ऐसे टैंकर अटैच किए गए हैं, जिनकी नंबर प्लेट गायब है और उनकी पाइप लाइन से निरंतर पानी टपकता रहता है। नगर निगम के जोन 1, 3, 6 और 14 में इन टैंकरों की स्थिति सबसे खराब है। इसके बावजूद नगर निगम के अधिकारी इस गंभीर समस्या की अनदेखी कर रहे हैं। पानी की सप्लाई के दौरान भारी मात्रा में पानी बर्बाद हो रहा है, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। यह पानी जहां लोगों की जरूरतें पूरी कर सकता था, वहीं अब व्यर्थ में बहकर नालियों में चला जाता है।
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नेताओं के दबाव में हो रही टैंकर अटैचमेंट प्रक्रिया
सूत्रों के अनुसार, नगर निगम में टैंकरों को अटैच करने की प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ गया है। नेताओं द्वारा अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर टैंकरों को निगम में शामिल करवाया जा रहा है, चाहे वे नियमों के अनुरूप हों या नहीं। नगर निगम के प्रत्येक जोनल कार्यालय पर नर्मदा प्रोजेक्ट अधिकारियों को नेताओं की इच्छानुसार टैंकर अटैच करने के लिए दबाव डाला जा रहा है। कई टैंकर तो ऐसे हैं जो सालभर से निगम में जुड़े हुए हैं और पानी सप्लाई कर रहे हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश की स्थिति बेहद खराब है। इसके बावजूद नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी नेताओं के दबाव के कारण इन टैंकरों पर कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं, जिससे आम जनता पानी की समस्या से जूझ रही है।
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तेज रफ्तार टैंकरों से बढ़ रहा दुर्घटना का खतरा
बिना नंबर और जर्जर टैंकरों का सबसे बड़ा खतरा उनकी तेज रफ्तार है। निगम से अनुबंधित टैंकरों के चालक लापरवाहीपूर्वक टैंकर चलाते हैं, जिससे सड़क पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। गर्मी के मौसम में नगर निगम द्वारा अटैच किए गए इन टैंकरों की कोई जांच नहीं की जाती, जिससे बिना नंबर और लीकेज टैंकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इस पर जब नगर निगम जोन 1 के जोनल अधिकारी अतीक खान से सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे नर्मदा प्रोजेक्ट अधिकारियों की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ लिया। इसी तरह, जोन 3 के अतुल सिंह, जोन 6 के लोकेश शर्मा और जोन 14 के सालकराम शितोले ने भी यही बयान दिया कि टैंकरों की देखरेख नर्मदा प्रोजेक्ट के अधिकारियों द्वारा की जाती है। इससे स्पष्ट होता है कि नगर निगम में टैंकरों की व्यवस्था पूरी तरह से अव्यवस्थित और लापरवाही से भरी हुई है, जिससे पानी की बर्बादी और दुर्घटनाओं की संभावना लगातार बनी हुई है।
