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Indore News: कॉलेज से हटाए गए एग्जाम कंट्रोलर, डायरेक्टर केबिन के बाहर प्राण त्यागने की मांगी अनुमति
Fri, 10 Apr 2026 07:36 PM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Fri, 10 Apr 2026 07:36 PM IST
सार
Indore News: एसजीएसआईटीएस में अनुशासनहीनता और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणियों के आरोप में एग्जाम कंट्रोलर प्रो. लीलाधर मालवीय को पद से हटाकर प्रो. स्मिता वर्मा को जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं फीस बढ़ोतरी को लेकर एनएसयूआई का प्रदर्शन भी जारी है।
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कैंपस में एनएसयूआई का प्रदर्शन।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
इंदौर के श्री गोविंदराम सेकसरिया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस यानी एसजीएसआईटीएस में पिछले कई महीनों से जो प्रशासनिक गतिरोध और रिजल्ट में देरी की समस्या बनी हुई थी उस पर प्रबंधन ने सख्त कदम उठाया है। संस्थान के परीक्षा नियंत्रक प्रो. लीलाधर मालवीय को तत्काल प्रभाव से उनके पद से मुक्त कर दिया गया है। प्रबंधन ने इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए अब प्रो. स्मिता वर्मा को नया एग्जाम कंट्रोलर नियुक्त किया है।
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परीक्षा नियंत्रक के पद से हटाए जाने का आदेश मिलते ही प्रो. लीलाधर मालवीय ने एक ऐसा कदम उठाया जिसने सबको चौंका दिया। उन्होंने संस्थान के डायरेक्टर के सामने अनोखी मांग रख दी। मालवीय ने डायरेक्टर को पत्र लिखकर यह अनुरोध किया है कि उन्हें डायरेक्टर के केबिन के बाहर मृत्यु की अनुमति प्रदान की जाए। पद से हटाए जाने के फैसले के बाद उनका यह पत्र चर्चा का विषय बन गया है।
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प्रो. मालवीय पर कार्रवाई के पीछे कई गंभीर कारण बताए जा रहे हैं। उन पर संस्थान के इंटरनल व्हाट्सएप ग्रुप में अपने ही वरिष्ठ प्रोफेसरों के खिलाफ अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के संगीन आरोप लगे हैं। इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया और व्हाट्सएप जैसे मंचों पर संस्थान की छवि धूमिल करने वाले कमेंट्स किए और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप भी लगाए। कॉलेज प्रबंधन ने इसे अनुशासनहीनता और प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन मानते हुए यह कठोर निर्णय लिया है। इस पूरे घटनाक्रम पर जब प्रो. मालवीय का पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फिलहाल किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से साफ मना कर दिया।
गड़बड़ी की जांच हेतु उच्च स्तरीय कमेटी का गठन
इस पूरे मामले की गहराई से जांच करने के लिए डायरेक्टर ने एक विशेष उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इस जांच दल में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए संस्थान के बाहर के दो प्रसिद्ध आईटी विशेषज्ञ प्रोफेसरों को भी शामिल किया गया है। यह समिति केवल अनुशासनहीनता ही नहीं बल्कि सॉफ्टवेयर अपडेट के दौरान हुई समस्याओं और डाटा हैंडलिंग में हुई कथित गड़बड़ी के आरोपों की भी सूक्ष्मता से जांच करेगी।
एनएसयूआई का उग्र प्रदर्शन
एक तरफ जहां पूर्व एग्जाम कंट्रोलर के पत्र ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा रखा है वहीं दूसरी तरफ एसजीएसआईटीएस कॉलेज परिसर में छात्रों का गुस्सा भी फूट रहा है। एनएसयूआई के बैनर तले छात्र लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है। छात्रों के इस आंदोलन का मुख्य कारण कॉलेज द्वारा की गई फीस बढ़ोतरी है जिसके विरोध में वे अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं।
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प्रो. मालवीय पर कार्रवाई के पीछे कई गंभीर कारण बताए जा रहे हैं। उन पर संस्थान के इंटरनल व्हाट्सएप ग्रुप में अपने ही वरिष्ठ प्रोफेसरों के खिलाफ अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के संगीन आरोप लगे हैं। इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया और व्हाट्सएप जैसे मंचों पर संस्थान की छवि धूमिल करने वाले कमेंट्स किए और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप भी लगाए। कॉलेज प्रबंधन ने इसे अनुशासनहीनता और प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन मानते हुए यह कठोर निर्णय लिया है। इस पूरे घटनाक्रम पर जब प्रो. मालवीय का पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फिलहाल किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से साफ मना कर दिया।
गड़बड़ी की जांच हेतु उच्च स्तरीय कमेटी का गठन
इस पूरे मामले की गहराई से जांच करने के लिए डायरेक्टर ने एक विशेष उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इस जांच दल में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए संस्थान के बाहर के दो प्रसिद्ध आईटी विशेषज्ञ प्रोफेसरों को भी शामिल किया गया है। यह समिति केवल अनुशासनहीनता ही नहीं बल्कि सॉफ्टवेयर अपडेट के दौरान हुई समस्याओं और डाटा हैंडलिंग में हुई कथित गड़बड़ी के आरोपों की भी सूक्ष्मता से जांच करेगी।
एनएसयूआई का उग्र प्रदर्शन
एक तरफ जहां पूर्व एग्जाम कंट्रोलर के पत्र ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा रखा है वहीं दूसरी तरफ एसजीएसआईटीएस कॉलेज परिसर में छात्रों का गुस्सा भी फूट रहा है। एनएसयूआई के बैनर तले छात्र लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है। छात्रों के इस आंदोलन का मुख्य कारण कॉलेज द्वारा की गई फीस बढ़ोतरी है जिसके विरोध में वे अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं।
