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Indore News: सरकारी अस्पतालों में 30 प्रतिशत सिजेरियन डिलीवरी, प्राइवेट में तो चौंकाने वाले आंकड़े

Thu, 06 Mar 2025 11:11 AM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर Published by: अर्जुन रिछारिया Updated Thu, 06 Mar 2025 11:11 AM IST
सार

Indore News: सरकार ने 'ऑप्टीमाइजिंग सीजर सेक्शन' गाइडलाइन लागू की है, लेकिन इसका प्रभाव सीमित नजर आ रहा है। स्वास्थ्य विभाग और फॉग्सी इस दर को कम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं।

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Indore News Rising Cesarean Delivery Rates Raise Concerns, Normal Births Declining
डॉ. सुमित्रा यादव - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

विस्तार

अस्पतालों में सिजेरियन ऑडिट लागू होने के बावजूद सिजेरियन डिलीवरी की संख्या लगातार बढ़ रही है। सामान्य प्रसव की तुलना में सिजेरियन डिलीवरी की दर में तेजी देखी जा रही है। स्वास्थ्य मानकों के अनुसार, सिजेरियन डिलीवरी की अधिकतम दर 15 फीसदी होनी चाहिए, लेकिन सरकारी अस्पतालों में यह आंकड़ा 25 फीसदी से भी अधिक हो चुका है। सरकार द्वारा 'सिजेरियन ऑडिट' लागू करने के बावजूद यह दर 15 फीसदी से नीचे नहीं आ पाई। वहीं, निजी अस्पतालों में यह आंकड़ा और भी चौंकाने वाला है, जहां 50 फीसदी तक प्रसव सिजेरियन विधि से हो रहे हैं।  
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कई निजी अस्पतालों के आंकड़ों के अनुसार, नॉर्मल डिलीवरी की तुलना में सिजेरियन डिलीवरी दोगुनी हो रही हैं। इसका एक मुख्य कारण आर्थिक लाभ भी है। जहां सामान्य डिलीवरी का खर्च 50 हजार रुपये तक होता है, वहीं सिजेरियन डिलीवरी पर एक से डेढ़ लाख रुपये तक का खर्च आता है, जो नॉर्मल डिलीवरी की तुलना में लगभग दोगुना है।  
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ऑप्टीमाइजिंग सीजर सेक्शन गाइडलाइन प्रदेश में भी लागू  
दुनियाभर में सिजेरियन डिलीवरी की दर 45 से 50 फीसदी तक पहुंच चुकी है, जो चिंता का विषय है। इस समस्या के समाधान के लिए आयरलैंड के डॉ. रॉक्सन द्वारा 'ऑप्टीमाइजिंग सीजर सेक्शन' नामक गाइडलाइन बनाई गई, जिसे मध्यप्रदेश सरकार ने भी लागू किया है। इस गाइडलाइन में 10 ऐसे मापदंड शामिल किए गए हैं, जिनमें सिजेरियन डिलीवरी को आवश्यक माना गया है। हालांकि, यह निगरानी सिर्फ सरकारी अस्पतालों में की जा रही है, जबकि निजी अस्पतालों में यह नियंत्रण से बाहर है। स्वास्थ्य विभाग के मानकों के विपरीत, निजी अस्पतालों में नॉर्मल डिलीवरी की दर 20 से 30 फीसदी तक सीमित हो गई है। सरकार और फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज़ ऑफ इंडिया (फॉग्सी) मिलकर सिजेरियन डिलीवरी की दर को कम करने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, बढ़ती उम्र में गर्भधारण, पहले सिजेरियन के बाद दूसरे सिजेरियन की अनिवार्यता और प्लेसेंटा संबंधी जटिलताओं के कारण यह चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। 
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कानूनी मामलों से बचने की कोशिश  
फॉग्सी की अध्यक्ष डॉ. सुमित्रा यादव ने बताया कि सिजेरियन डिलीवरी की बढ़ती दर का एक प्रमुख कारण मेडिको-लीगल केस भी हैं। जब भी डिलीवरी के दौरान कोई जटिलता आती है, तो मामला कोर्ट तक पहुंच जाता है, जिससे डॉक्टर जोखिम लेने से बचते हुए सीधे सिजेरियन डिलीवरी का विकल्प चुनते हैं। इसके अलावा, देर से शादी और गर्भधारण भी एक बड़ा कारण है। कई महिलाओं में गर्भधारण में देरी के कारण आईवीएफ जैसी तकनीकों का सहारा लिया जाता है, जो खुद ही एक जटिल प्रक्रिया होती है और सिजेरियन डिलीवरी की संभावना को बढ़ा देती है। इन कारणों से देश और प्रदेश में सिजेरियन डिलीवरी की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सरकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बढ़ते ट्रेंड को रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में इसे नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती बन चुका है।

सरकारी में किस वर्ष कितने सिजेरियन 
2024-25     30.59%
2023-24     31.09%
2022-23    23.21% 
 
सरकारी पीसी सेठी अस्पताल में हुई डिलीवरी 
महीना  कुल डिलीवरी सीजर प्रतिशत 
जनवरी 2025 494 142 25.09
दिसंबर 2024 578   28.74 122 
नवंबर 2024 497 428 24.5


 
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