{"_id":"67da5b42d67d264e420fd499","slug":"indore-news-political-satire-through-posters-at-indore-s-gora-kund-chauraha-on-rang-panchami-2025-03-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Indore News: पोस्टरों में नेताओं पर कसे तंज, आप भी पढ़कर हो जाएंगे लोटपोट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Indore News: पोस्टरों में नेताओं पर कसे तंज, आप भी पढ़कर हो जाएंगे लोटपोट
Wed, 19 Mar 2025 11:20 AM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Wed, 19 Mar 2025 11:20 AM IST
सार
Indore News: पोस्टरों में भाजपा और कांग्रेस के नेताओं पर तंज कसा गया है। इन पोस्टरों में "रंगों की फुलझड़ी राजनीति के रंग, बुरा ना मानो होली है" जैसे स्लोगन के साथ इंदौर के दिग्गज नेताओं की राजनीति पर व्यंग्य किया गया है।
विज्ञापन
गोरा कुंड चौराहा पर लगे पोस्टर
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विस्तार
इंदौर में रंग पंचमी के अवसर पर हर साल की तरह इस बार भी गेर का आयोजन किया गया है। गेर का रूट शहर के प्रमुख इलाकों से होकर गुजरता है, और यह आयोजन इंदौर की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा बन चुका है। इस आयोजन में शहर के लोग एकत्र होते हैं और रंगों की होली खेलते हैं। रंग पंचमी पर आयोजित होने वाली गेर पर स्थानीय और दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं, जो इस उत्सव का हिस्सा बनते हैं।
50 साल पहले गोरा कुंड चौराहे पर दीवार लेखन
लगभग 50 साल पहले, गोरा कुंड चौराहा इंदौर में एक प्रसिद्ध स्थान हुआ करता था जहां पर दीवार लेखन के माध्यम से नेताओं पर तंज कसा जाता था। शहर के दिग्गज नेताओं के बारे में दीवारों पर व्यंग्य लेखन किया जाता था। यह दीवार लेखन उस समय शहर के राजनीतिक घटनाक्रमों पर लोगों की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति का एक प्रमुख रूप था। इस पर होने वाली आलोचनाओं और व्यंग्य लेखन ने उस समय के समाज को जागरूक करने और राजनीतिक परिस्थितियों पर सवाल उठाने का काम किया।
इंदौर के दिग्गज नेताओं पर पोस्टर के जरिए तंज
इस बार गोरा कुंड चौराहे पर पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें इंदौर के प्रमुख राजनीतिक नेताओं पर तंज कसा गया है। इन पोस्टरों में भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के साथ-साथ मंत्री और विधायक भी शामिल हैं। "रंगों की फुलझड़ी राजनीति के रंग, बुरा ना मानो होली है" जैसे स्लोगन के साथ इन पोस्टरों में नेताओं की राजनीति पर कटाक्ष किया गया है। इन पोस्टरों के माध्यम से इस बार भी राजनीतिक माहौल और नेताओं के कार्यों पर लोगों की प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है।
विज्ञापन
इस बार पोस्टर में हैं मजेदार व्यंग्य...
पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के लिए पोस्टर में लिखा गया है कि 'बुझी हुई बाती मत मान लेना। दीपक में लौ अभी बरकरार है'
कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को लेकर लगे पोस्टर में लिखा है कि 'सरकार से भी टकरा जाता हूं। हक की बात में डरता नहीं। दिल्ली भी खुश'। बता दें कि विजयवर्गीय के पिछले साल के पोस्टर में लिखा था कि 'लो मैं बन गया थानेदार भैया, अब डर काहे का?'
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी को लेकर पोस्ट में लिखा है कि गति जरूर धीमी है लेकिन पार्टी सुधार का काम तेजी से चल रहा है। वहीं पटवारी के पिछले साल के पोस्टर पर लिखा था 'म्हारे से काई दुश्मनी? पद पर बैठते ही खाली हुई गी रे कांग्रेस।''
पूर्व विधायक व कवि सत्यनारायण सत्तन के लिए लिखा है कि ""बोलबचन में अमिताभ बच्चने थे, हैं और जीवन पर्यंत बने ही रहेंगे।''
कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट को लेकर लिखा गया है कि पांचो ऊंग्लिया घी में और सिर कड़ाही में। इतना माल-मत्ता तो कांग्रेस में जिंदगी भर न कमा पाता। वहीं पिछले साल के पोस्टर में लिखा था ""खांटी भाजपाई तो आते नहीं मेरी चौखट पर। काहे का मंत्री?
महापौर पुष्यमित्र भार्गव के लिए लिखा है कि इंदौर को हर क्षेत्र में अव्वल बनाने में जुटा हूं भिया। दुखता रहे विरोधियों का पेट...। वहीं पिछले साल के पोस्टर में लिखा था कि ""बदला निजाम, तो आई जान में जान। नहीं तो सब जमा करने पर तुले थे।'
विधायक मालिनी लक्ष्मण गौड़ को लेकर लिखा "मोहन से ही वहीं मान, जो शिव दिया करते थे। कोई फ्रिक नहीं।''
पहली बार के विधायक गोलू शुक्ला के लिए लिखा है कि सनातनी विधायक के रूप में अभी तो यह शुरुआत है, देखते जाओ आगे-आगे होता है क्या?
पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय के लिए लिखा है कि पप्पा का अंगना अब मेरे ही जिम्मे है। लगा हूं भिया दिन रात विधानसभा क्षेत्र की सेवा में।
बीजेपी नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के लिए लिखा है कि यह सुदामा खाली हाथ नहीं रहा दयालु की दया काम आ गई।
पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता के लिए लिखा है कि हिम्मत नहीं हारूंगा। अभी भी रेस में। तभी तो फोटो कोई भी हो, मुंडी मेरी ही फंसी मिलेगी।
विधायक व पूर्व मंत्री उषा ठाकुर को लेकर पोस्ट में लिखा है कि म्यान से बाहर नहीं आ रही कटार। मंत्री पद नहीं तो बोल वचन भी अब थम गए।
भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष गौरव रणदीवे के लिए लिखा है कि 'नाम कमाकर गया हूं अध्यक्ष पद का रूतबा कायम कर लौटा हूं। वापसी का इंतजार करूंगा।'
समय के साथ बदलाव और बैनर-पोस्टर का प्रवेश
समय के साथ यह दीवार लेखन का तरीका धीरे-धीरे खत्म हो गया। अब दीवार लेखन की जगह बैनर और पोस्टरों ने ले ली है। राजनीतिक दलों और नेताओं की छवि पर तंज कसने के लिए बैनर और पोस्टर का इस्तेमाल ज्यादा प्रभावी और आधुनिक तरीका बन गया है। यह बदलाव इंदौर में राजनीतिक संवाद और अभिव्यक्ति के तरीके में समय के साथ आए परिवर्तन को दर्शाता है। अब गोरा कुंड चौराहा पर पोस्टरों के जरिए नेताओं और उनकी राजनीति पर व्यंग्य प्रस्तुत किया जा रहा है।
विज्ञापन
50 साल पहले गोरा कुंड चौराहे पर दीवार लेखन
लगभग 50 साल पहले, गोरा कुंड चौराहा इंदौर में एक प्रसिद्ध स्थान हुआ करता था जहां पर दीवार लेखन के माध्यम से नेताओं पर तंज कसा जाता था। शहर के दिग्गज नेताओं के बारे में दीवारों पर व्यंग्य लेखन किया जाता था। यह दीवार लेखन उस समय शहर के राजनीतिक घटनाक्रमों पर लोगों की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति का एक प्रमुख रूप था। इस पर होने वाली आलोचनाओं और व्यंग्य लेखन ने उस समय के समाज को जागरूक करने और राजनीतिक परिस्थितियों पर सवाल उठाने का काम किया।
विज्ञापन
इंदौर के दिग्गज नेताओं पर पोस्टर के जरिए तंज
इस बार गोरा कुंड चौराहे पर पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें इंदौर के प्रमुख राजनीतिक नेताओं पर तंज कसा गया है। इन पोस्टरों में भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के साथ-साथ मंत्री और विधायक भी शामिल हैं। "रंगों की फुलझड़ी राजनीति के रंग, बुरा ना मानो होली है" जैसे स्लोगन के साथ इन पोस्टरों में नेताओं की राजनीति पर कटाक्ष किया गया है। इन पोस्टरों के माध्यम से इस बार भी राजनीतिक माहौल और नेताओं के कार्यों पर लोगों की प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है।
विज्ञापन
इस बार पोस्टर में हैं मजेदार व्यंग्य...
पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के लिए पोस्टर में लिखा गया है कि 'बुझी हुई बाती मत मान लेना। दीपक में लौ अभी बरकरार है'
कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को लेकर लगे पोस्टर में लिखा है कि 'सरकार से भी टकरा जाता हूं। हक की बात में डरता नहीं। दिल्ली भी खुश'। बता दें कि विजयवर्गीय के पिछले साल के पोस्टर में लिखा था कि 'लो मैं बन गया थानेदार भैया, अब डर काहे का?'
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी को लेकर पोस्ट में लिखा है कि गति जरूर धीमी है लेकिन पार्टी सुधार का काम तेजी से चल रहा है। वहीं पटवारी के पिछले साल के पोस्टर पर लिखा था 'म्हारे से काई दुश्मनी? पद पर बैठते ही खाली हुई गी रे कांग्रेस।''
पूर्व विधायक व कवि सत्यनारायण सत्तन के लिए लिखा है कि ""बोलबचन में अमिताभ बच्चने थे, हैं और जीवन पर्यंत बने ही रहेंगे।''
कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट को लेकर लिखा गया है कि पांचो ऊंग्लिया घी में और सिर कड़ाही में। इतना माल-मत्ता तो कांग्रेस में जिंदगी भर न कमा पाता। वहीं पिछले साल के पोस्टर में लिखा था ""खांटी भाजपाई तो आते नहीं मेरी चौखट पर। काहे का मंत्री?
महापौर पुष्यमित्र भार्गव के लिए लिखा है कि इंदौर को हर क्षेत्र में अव्वल बनाने में जुटा हूं भिया। दुखता रहे विरोधियों का पेट...। वहीं पिछले साल के पोस्टर में लिखा था कि ""बदला निजाम, तो आई जान में जान। नहीं तो सब जमा करने पर तुले थे।'
विधायक मालिनी लक्ष्मण गौड़ को लेकर लिखा "मोहन से ही वहीं मान, जो शिव दिया करते थे। कोई फ्रिक नहीं।''
पहली बार के विधायक गोलू शुक्ला के लिए लिखा है कि सनातनी विधायक के रूप में अभी तो यह शुरुआत है, देखते जाओ आगे-आगे होता है क्या?
पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय के लिए लिखा है कि पप्पा का अंगना अब मेरे ही जिम्मे है। लगा हूं भिया दिन रात विधानसभा क्षेत्र की सेवा में।
बीजेपी नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के लिए लिखा है कि यह सुदामा खाली हाथ नहीं रहा दयालु की दया काम आ गई।
पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता के लिए लिखा है कि हिम्मत नहीं हारूंगा। अभी भी रेस में। तभी तो फोटो कोई भी हो, मुंडी मेरी ही फंसी मिलेगी।
विधायक व पूर्व मंत्री उषा ठाकुर को लेकर पोस्ट में लिखा है कि म्यान से बाहर नहीं आ रही कटार। मंत्री पद नहीं तो बोल वचन भी अब थम गए।
भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष गौरव रणदीवे के लिए लिखा है कि 'नाम कमाकर गया हूं अध्यक्ष पद का रूतबा कायम कर लौटा हूं। वापसी का इंतजार करूंगा।'
समय के साथ बदलाव और बैनर-पोस्टर का प्रवेश
समय के साथ यह दीवार लेखन का तरीका धीरे-धीरे खत्म हो गया। अब दीवार लेखन की जगह बैनर और पोस्टरों ने ले ली है। राजनीतिक दलों और नेताओं की छवि पर तंज कसने के लिए बैनर और पोस्टर का इस्तेमाल ज्यादा प्रभावी और आधुनिक तरीका बन गया है। यह बदलाव इंदौर में राजनीतिक संवाद और अभिव्यक्ति के तरीके में समय के साथ आए परिवर्तन को दर्शाता है। अब गोरा कुंड चौराहा पर पोस्टरों के जरिए नेताओं और उनकी राजनीति पर व्यंग्य प्रस्तुत किया जा रहा है।
