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डॉग बाइट: रेबीज इंजेक्शन के बाद भी संक्रमण हुआ, पति के अंतिम संस्कार के लिए भटकती रही पत्नी

Mon, 08 Sep 2025 04:30 PM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर Published by: अर्जुन रिछारिया Updated Mon, 08 Sep 2025 04:30 PM IST
सार

डॉग बाइट: अंतिम संस्कार तक के लिए नहीं थे पैसे, NGO ने की मदद, ब्रिज के नीचे रहता है परिवार, एमवाय अस्पताल में संक्रमण के बावजूद पति की सेवा करती रही पत्नी। 

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Indore News: Man dies of dog bite, family struggles for funeral expenses
अस्पताल में पति की सेवा करती पत्नी। अन्य फोटो में परिजन और बच्चे। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

विस्तार

इंदौर में कुत्ते के काटने से गोविंद पैवाल नामक व्यक्ति की मौत हो गई। गोविंद लंबे समय से रेबीज से पीड़ित थे। डॉक्टरों ने पहले ही उनकी स्थिति गंभीर बताते हुए बचने की संभावना कम बताई थी। इसके बावजूद उनकी पत्नी संगीता ने एमवाय अस्पताल के आइसोलेटेड यूनिट में उनकी सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ी।
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परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब
गोविंद पैवाल का परिवार ब्रिज के नीचे रहता है और बेहद गरीब है। पहले गोविंद नगर निगम के ठेकेदार के अधीन काम करते थे और बेलदारी से भी गुजर-बसर करते थे। परिवार में दो बेटे और एक बेटी है। बेटी की शादी हो चुकी है, लेकिन घर का खर्च बमुश्किल चल रहा था। रोजमर्रा का भोजन भी परिवार के लिए चुनौती है।
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एनजीओ ने उठाया अंतिम संस्कार का खर्च
गोविंद की मौत के बाद परिवार के पास अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं थे। इस बीच एक एनजीओ मदद के लिए आगे आया। एनजीओ ने मुफ्त शव वाहन उपलब्ध कराया और अंतिम संस्कार का पूरा इंतजाम किया। बेटे अजय ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी और फिर परिवार को ब्रिज के नीचे सुरक्षित छोड़ अन्य इंतजाम में जुट गया।

चेहरे पर काटने से तेजी से फैला संक्रमण
सरकारी हुकुमचंद अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. आशुतोष शर्मा ने बताया कि एंटी रेबीज इंजेक्शन का असर धीरे-धीरे होता है। लेकिन इस मामले में कुत्ते ने होंठ और चेहरे पर काटा था, जिसके चलते वायरस तेजी से दिमाग तक पहुंच गया। यही वजह मौत का कारण बन सकती है। स्थिति पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद साफ होगी।


प्रशासन की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
इस घटना ने नगर निगम और हुकुमचंद अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने और डॉग बाइट रोकने के लिए नसबंदी अभियान चलाया जाए। इंदौर में अभियान तो चला, लेकिन डॉग बाइट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पहले भी हाईकोर्ट में इस पर जनहित याचिकाएं दायर हो चुकी हैं।

रोजाना 150 से अधिक डॉग बाइट के केस
हुकुमचंद अस्पताल में प्रतिदिन 150 से अधिक डॉग बाइट के मरीज पहुंचते हैं। कई मामलों में घाव गंभीर होते हैं, जिनका इलाज चुनौतीपूर्ण है। एंटी रेबीज इंजेक्शन का फॉलोअप मरीजों को समय पर मिल रहा है या नहीं, यह व्यवस्था भी साफ नहीं है। गोविंद की मौत के बाद अब उनका परिवार प्रशासन से मदद की उम्मीद कर रहा है, क्योंकि घर का खर्च और बच्चों की देखभाल बड़ी चुनौती बन गई है।
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