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Indore News: गुजरात की पतंग, बरेली की डोर, सज गए इंदौर के बाजार

Wed, 07 Jan 2026 07:16 AM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर Published by: अर्जुन रिछारिया Updated Wed, 07 Jan 2026 07:16 AM IST
सार

Indore News: पतंगोत्सव को लेकर इंदौर का बाजार पूरी तरह सज गया है। इस साल गुजरात और राजस्थान में बनी पतंगें तथा बरेली की डोर से आसमान रंगीन होगा।

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indore news kite market ready for festival with gujarat rajasthan kites
indore news - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

विस्तार

पतंगोत्सव को लेकर इंदौर सहित पूरे प्रदेश में पतंगों की मांग तेजी से बढ़ गई है। इस बार इंदौर में उड़ने वाली पतंगें गुजरात और राजस्थान में बनी होंगी, जबकि इनकी डोर बरेली की होगी। बाजार में कागज और पन्नी दोनों तरह की पतंगों की भरमार है।

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गुजरात और राजस्थान से आई पतंगें
इस साल इंदौर में स्थानीय रूप से बनी पतंगों के साथ-साथ अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, जयपुर और जोधपुर में बनी पतंगें भी बाजार में पहुंची हैं। पतंग उड़ाने में इस्तेमाल होने वाली डोर उत्तर प्रदेश के बरेली से मंगाई गई है।

स्थानीय उत्पादन, फिर भी बाहर से मंगवानी पड़ती हैं पतंगें
इंदौर में सात से आठ महीने तक लगातार पतंग निर्माण का कार्य चलता है, लेकिन मांग के मुकाबले उत्पादन कम होने के कारण हर साल बाहर से बड़ी संख्या में पतंगें मंगवाई जाती हैं। रानीपुरा और छावनी ऐसे प्रमुख इलाके हैं, जहां बड़ी मात्रा में पतंगों की बिक्री होती है।

रिटेल बाजार में कागज की पतंगों की ज्यादा मांग
होलसेल के बाद अब रिटेल बाजार पूरी तरह सक्रिय हो गया है। इस साल कागज की जोधपुरी पतंग की सबसे ज्यादा मांग देखी जा रही है। पन्नी की पतंग नए आकारों में बाजार में आई है, जिनमें मटका, स्टार और रॉकेट शेप शामिल हैं। इसके अलावा पतंगों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कार्टून कैरेक्टर और ऑपरेशन सिंदूर थीम भी लोगों को पसंद आ रही है।

कीमतें और सप्लाई का दायरा
होलसेल में कागज की पतंग 3 रुपए से 50 रुपए तक और पन्नी की पतंग 1 रुपए 70 पैसे से लेकर 50 रुपए प्रति नग तक बिकी है। इंदौर के इन बाजारों से पतंगें प्रदेश के कई शहरों के अलावा महू, उज्जैन और देवास तक सप्लाई की जा रही हैं।

कारीगरों की संख्या लगातार घट रही
व्यापारियों के अनुसार, एक समय काछी मोहल्ला में 50 से अधिक कारीगर पतंग निर्माण से जुड़े थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर 5 से 8 रह गई है। नई पीढ़ी इस काम में रुचि नहीं ले रही है। फिलहाल काछी मोहल्ला में 10 से 12 दुकानें, रानीपुरा में 3, हरिसिद्धि में 1 और छावनी में कुछ बड़ी दुकानें हैं, जहां सालभर पतंग उपलब्ध रहती हैं।

डेकोरेटिव पतंगों की बढ़ी मांग
त्योहारों पर थीम डेकोरेशन का चलन बढ़ने के कारण छोटी सजावटी पतंगों की मांग भी तेजी से बढ़ी है। दो इंच से पांच इंच तक की छोटी पतंगें और छोटी फिरकियां सजावट के लिए खरीदी जा रही हैं। ये पतंगें कागज और पन्नी दोनों में उपलब्ध हैं।

बैटरी वाली चकरी को नहीं मिला बाजार
पिछले कुछ वर्षों से बाजार में ऑटोमैटिक बैटरी वाली चकरी उपलब्ध है, जिसकी कीमत 1800 से 2500 रुपए तक है। व्यापारियों के अनुसार महंगी होने के कारण इसका चलन नहीं बढ़ पाया है। पतंग उड़ाने के शौकीन आज भी पारंपरिक चकरी को ही ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

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