{"_id":"697e05da163bae22730bfcc5","slug":"indore-news-female-doctor-suffers-cardiac-arrest-at-usicon-2026-updates-on-robotic-surgery-and-ai-in-urology-2026-01-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Indore News: महिला डॉक्टर को मंच पर आया हार्ट अटैक, डॉक्टरों की इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में मचा हड़कंप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Indore News: महिला डॉक्टर को मंच पर आया हार्ट अटैक, डॉक्टरों की इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में मचा हड़कंप
Sat, 31 Jan 2026 07:08 PM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Sat, 31 Jan 2026 07:08 PM IST
सार
Indore News: इंदौर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय यूरोलॉजी कॉन्फ्रेंस के दौरान मैंगलोर की डॉक्टर श्रीन बुटोले को मंच पर संबोधन देते समय कार्डियक अरेस्ट आ गया, जिन्हें तत्काल सीपीआर देकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। वर्तमान में उनकी हालत स्थिर है।
विज्ञापन
डॉक्टर श्रीन बुटोले
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विस्तार
इंदौर में एक महिला डॉक्टर को मंच पर ही कार्डियक अरेस्ट आ गया। वहां मौजूद डॉक्टरों और डेलिगेट्स ने तत्काल उन्हें सीपीआर दिया। उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए और इलाज शुरू किया गया। डॉक्टर श्रीन बुटोले मैंगलोर से इंटरनेशनल यूरोलॉजी कॉन्फ्रेंस यूसीकॉन 2026 में पार्टिसिपेट करने इंदौर आईं थीं। वे मंच पर संबोधित कर रहीं थी तभी उनकी हालत बिगड़ी और वह गिर पड़ीं। डॉक्टरों के अनुसार फिलहाल उनकी हालत स्थिर है।
सर्जरी की नई तकनीकों का किया प्रदर्शन
दरअसल, इंदौर में ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में 70 से अधिक अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी और देश के वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट्स की इंटरनेशनल यूरोलॉजी कॉन्फ्रेंस यूसीकॉन 2026 चल रही है। इसमें पहले और दूसरे दिन रोबोटिक, लेजर और मिनिमली इनवेसिव सर्जरी की नई तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। सेमी-लाइव सर्जिकल सेशन, इंटरनेशनल सोसाइटी लेक्चर, यूरो-ऑन्कोलॉजी केस डिस्कशन, एंडो-यूरोलॉजी अपडेट्स और विश्वस्तरीय विशेषज्ञों द्वारा लाइव सर्जरी का सीधा प्रसारण किया गया।
‘फ्यूचर रेडी यूरोलॉजी’ पर आधारित रहा तीसरा दिन
आज तीसरे दिन इंदौर में चिकित्सा विज्ञान का ऐसा भविष्य दिखाई दिया, जहां इंसानी अनुभव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस साथ मिलकर इलाज की नई परिभाषा गढ़ते नजर आए। सुबह से ही ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर के हर हॉल में डॉक्टरों, सर्जनों और शोधकर्ताओं की हलचल थी। कहीं रोबोटिक सर्जरी की नई तकनीकों पर चर्चा चल रही थी, तो कहीं मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स की मदद से बीमारी को पहले पहचानने के तरीके समझाए जा रहे थे। देश-विदेश से आए विशेषज्ञों ने माना कि आने वाले दशक में चिकित्सा केवल हाथों की कला नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी की सटीकता का भी मेल होगी, और Day-3 इसी ‘फ्यूचर रेडी यूरोलॉजी’ को समर्पित रहा।
विज्ञापन
एआई से बढ़ रही सर्जरी में सफलता की दर
दिन की शुरुआत से ही एडवांस्ड सेशन्स, केस-बेस्ड डिस्कशन और टेक्निकल डेमो ने माहौल को पूरी तरह अकादमिक बना दिया। बड़े-बड़े स्क्रीन पर जटिल सर्जरी की बारीकियां समझाई गईं, रोबोटिक आर्म्स की सटीकता दिखाई गई और यह बताया गया कि कैसे लेजर और मिनिमली इनवेसिव तकनीकों से मरीजों को कम दर्द, कम ब्लड लॉस और जल्दी रिकवरी मिल रही है। युवा डॉक्टरों के लिए यह दिन किसी लाइव क्लासरूम से कम नहीं था, जहां वे किताबों से नहीं बल्कि असली सर्जरी देखकर सीख रहे थे। विशेषज्ञों ने बताया कि अब एआई की मदद से सर्जरी की प्लानिंग पहले से अधिक सटीक हो रही है, जिससे ऑपरेशन का समय घट रहा है और सफलता दर बढ़ रही है।
3डी प्रिंटिंग की मदद से सर्जरी-स्पेसिफिक मॉडल तैयार हो रहे
इसी टेक्नोलॉजी फोकस के बीच तीसरे दिन 3डी प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी पर भी एक महत्वपूर्ण चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि अब 3डी प्रिंटिंग की मदद से मेडिकल इंस्ट्रूमेंट्स, इम्प्लांट्स और सर्जरी-स्पेसिफिक मॉडल तैयार करना संभव हो गया है। हालांकि यह तकनीक कुछ महंगी है, पर इसकी सटीकता और कस्टमाइजेशन क्षमता इसे बेहद प्रभावी बनाती है। डॉक्टरों ने समझाया कि 3डी प्रिंटेड मॉडल सर्जन को ऑपरेशन से पहले मरीज के शरीर की संरचना को बिल्कुल वास्तविक रूप में समझने में मदद करते हैं, जिससे सर्जरी का समय घटता है, जटिलताओं का जोखिम कम होता है और मरीज की रिकवरी बेहतर होती है। आने वाले समय में 3डी प्रिंटिंग ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स और पार्ट्स तैयार करेगी जो पूरी तरह मरीज की जरूरत के मुताबिक होंगे और यही इसे ‘फ्यूचर मेडिसिन’ का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाता है।
विज्ञापन
सर्जरी की नई तकनीकों का किया प्रदर्शन
दरअसल, इंदौर में ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में 70 से अधिक अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी और देश के वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट्स की इंटरनेशनल यूरोलॉजी कॉन्फ्रेंस यूसीकॉन 2026 चल रही है। इसमें पहले और दूसरे दिन रोबोटिक, लेजर और मिनिमली इनवेसिव सर्जरी की नई तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। सेमी-लाइव सर्जिकल सेशन, इंटरनेशनल सोसाइटी लेक्चर, यूरो-ऑन्कोलॉजी केस डिस्कशन, एंडो-यूरोलॉजी अपडेट्स और विश्वस्तरीय विशेषज्ञों द्वारा लाइव सर्जरी का सीधा प्रसारण किया गया।
विज्ञापन
‘फ्यूचर रेडी यूरोलॉजी’ पर आधारित रहा तीसरा दिन
आज तीसरे दिन इंदौर में चिकित्सा विज्ञान का ऐसा भविष्य दिखाई दिया, जहां इंसानी अनुभव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस साथ मिलकर इलाज की नई परिभाषा गढ़ते नजर आए। सुबह से ही ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर के हर हॉल में डॉक्टरों, सर्जनों और शोधकर्ताओं की हलचल थी। कहीं रोबोटिक सर्जरी की नई तकनीकों पर चर्चा चल रही थी, तो कहीं मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स की मदद से बीमारी को पहले पहचानने के तरीके समझाए जा रहे थे। देश-विदेश से आए विशेषज्ञों ने माना कि आने वाले दशक में चिकित्सा केवल हाथों की कला नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी की सटीकता का भी मेल होगी, और Day-3 इसी ‘फ्यूचर रेडी यूरोलॉजी’ को समर्पित रहा।
विज्ञापन
एआई से बढ़ रही सर्जरी में सफलता की दर
दिन की शुरुआत से ही एडवांस्ड सेशन्स, केस-बेस्ड डिस्कशन और टेक्निकल डेमो ने माहौल को पूरी तरह अकादमिक बना दिया। बड़े-बड़े स्क्रीन पर जटिल सर्जरी की बारीकियां समझाई गईं, रोबोटिक आर्म्स की सटीकता दिखाई गई और यह बताया गया कि कैसे लेजर और मिनिमली इनवेसिव तकनीकों से मरीजों को कम दर्द, कम ब्लड लॉस और जल्दी रिकवरी मिल रही है। युवा डॉक्टरों के लिए यह दिन किसी लाइव क्लासरूम से कम नहीं था, जहां वे किताबों से नहीं बल्कि असली सर्जरी देखकर सीख रहे थे। विशेषज्ञों ने बताया कि अब एआई की मदद से सर्जरी की प्लानिंग पहले से अधिक सटीक हो रही है, जिससे ऑपरेशन का समय घट रहा है और सफलता दर बढ़ रही है।
3डी प्रिंटिंग की मदद से सर्जरी-स्पेसिफिक मॉडल तैयार हो रहे
इसी टेक्नोलॉजी फोकस के बीच तीसरे दिन 3डी प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी पर भी एक महत्वपूर्ण चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि अब 3डी प्रिंटिंग की मदद से मेडिकल इंस्ट्रूमेंट्स, इम्प्लांट्स और सर्जरी-स्पेसिफिक मॉडल तैयार करना संभव हो गया है। हालांकि यह तकनीक कुछ महंगी है, पर इसकी सटीकता और कस्टमाइजेशन क्षमता इसे बेहद प्रभावी बनाती है। डॉक्टरों ने समझाया कि 3डी प्रिंटेड मॉडल सर्जन को ऑपरेशन से पहले मरीज के शरीर की संरचना को बिल्कुल वास्तविक रूप में समझने में मदद करते हैं, जिससे सर्जरी का समय घटता है, जटिलताओं का जोखिम कम होता है और मरीज की रिकवरी बेहतर होती है। आने वाले समय में 3डी प्रिंटिंग ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स और पार्ट्स तैयार करेगी जो पूरी तरह मरीज की जरूरत के मुताबिक होंगे और यही इसे ‘फ्यूचर मेडिसिन’ का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाता है।
