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इंदौर: वॉटर पार्क के पास बैठा दिखा तेंदुआ, चेहरे पर जख्म के निशान
Thu, 22 Oct 2026 11:02 AM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Thu, 22 Oct 2026 11:02 AM IST
सार
इंदौर के खुड़ैल थाना क्षेत्र में क्रिसेंट वॉटर पार्क के पास एक घायल तेंदुआ देखा गया जिसके सिर और चेहरे पर चोट के निशान थे। रालामंडल की पहाड़ियों से गांव में आने की आशंका।
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गांव वालों को दिखा घायल तेंदुआ।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल
विस्तार
इंदौर के पास खुड़ैल थाना क्षेत्र में क्रिसेंट वॉटर पार्क के नजदीक बुधवार सुबह एक तेंदुआ एक रहवासी मकान के पास बैठा हुआ दिखाई दिया जिससे स्थानीय लोगों में भारी दहशत फैल गई। ग्रामीणों के अनुसार तेंदुए के चेहरे और सिर पर गंभीर चोट के निशान साफ तौर पर दिखाई दे रहे थे जिसे देखकर यह अनुमान लगाया गया कि वह किसी अन्य वन्यजीव के साथ हुए संघर्ष में घायल हो गया होगा। सुबह के समय अचानक तेंदुए को इस तरह आबादी के करीब बैठे देखकर आसपास के इलाकों में हड़कंप मच गया और लोगों ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस तथा वन विभाग के अधिकारियों को दी।
पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं और इलाके में बड़े पैमाने पर तेंदुए की तलाश शुरू कर दी गई। हालांकि अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाने के बावजूद वन विभाग के अधिकारियों ने अब तक आधिकारिक तौर पर तेंदुए की मौजूदगी और उसकी चोटों की पुष्टि नहीं की है। इसके बावजूद सुरक्षा के मद्देनजर अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों को सतर्क रहने और अकेले बाहर न निकलने की सलाह दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
पहले भी मवेशियों का शिकार कर चुका है तेंदुआ
स्थानीय निवासी हरिओम ठाकुर ने बताया कि बुधवार सुबह उनके घर के पास तेंदुआ सुस्त हालत में बैठा हुआ था जो बाद में वहां से भाग निकला। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इससे पहले बीते आठ अक्टूबर को भी यही तेंदुआ उनके फार्म हाउस के भीतर घुस आया था और वहां बंधे हुए मवेशियों का शिकार किया था। उस समय ग्रामीणों ने शोर मचाकर और मशक्कत करके उसे वहां से भगाया था। हरिओम पेशे से एक किसान हैं और कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रवक्ता रह चुके हैं जो वर्तमान में खेती के साथ-साथ प्रॉपर्टी का कार्य भी संभालते हैं।
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रालामंडल की पहाड़ियों से आने की आशंका
हरिओम ठाकुर के अनुसार उनके घर और फार्म हाउस के बिल्कुल पास ही रालामंडल की पहाड़ियां स्थित हैं जहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के रूप में किसी भी प्रकार की फेंसिंग या जालियां नहीं लगाई गई हैं। इसी खुली हुई भौगोलिक स्थिति के कारण इस इलाके में अक्सर जंगली जानवरों की आवाजाही बनी रहती है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि इन दिनों खेतों में फसलों की सिंचाई और पानी डालने का मुख्य समय चल रहा है जिसके चलते किसानों को खेतों में जाना पड़ता है। यदि वन विभाग इस गंभीर मामले में समय रहते उचित ध्यान नहीं देगा तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
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पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं और इलाके में बड़े पैमाने पर तेंदुए की तलाश शुरू कर दी गई। हालांकि अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाने के बावजूद वन विभाग के अधिकारियों ने अब तक आधिकारिक तौर पर तेंदुए की मौजूदगी और उसकी चोटों की पुष्टि नहीं की है। इसके बावजूद सुरक्षा के मद्देनजर अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों को सतर्क रहने और अकेले बाहर न निकलने की सलाह दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
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पहले भी मवेशियों का शिकार कर चुका है तेंदुआ
स्थानीय निवासी हरिओम ठाकुर ने बताया कि बुधवार सुबह उनके घर के पास तेंदुआ सुस्त हालत में बैठा हुआ था जो बाद में वहां से भाग निकला। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इससे पहले बीते आठ अक्टूबर को भी यही तेंदुआ उनके फार्म हाउस के भीतर घुस आया था और वहां बंधे हुए मवेशियों का शिकार किया था। उस समय ग्रामीणों ने शोर मचाकर और मशक्कत करके उसे वहां से भगाया था। हरिओम पेशे से एक किसान हैं और कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रवक्ता रह चुके हैं जो वर्तमान में खेती के साथ-साथ प्रॉपर्टी का कार्य भी संभालते हैं।
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रालामंडल की पहाड़ियों से आने की आशंका
हरिओम ठाकुर के अनुसार उनके घर और फार्म हाउस के बिल्कुल पास ही रालामंडल की पहाड़ियां स्थित हैं जहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के रूप में किसी भी प्रकार की फेंसिंग या जालियां नहीं लगाई गई हैं। इसी खुली हुई भौगोलिक स्थिति के कारण इस इलाके में अक्सर जंगली जानवरों की आवाजाही बनी रहती है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि इन दिनों खेतों में फसलों की सिंचाई और पानी डालने का मुख्य समय चल रहा है जिसके चलते किसानों को खेतों में जाना पड़ता है। यदि वन विभाग इस गंभीर मामले में समय रहते उचित ध्यान नहीं देगा तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
