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Indore News: इंदौर के 17 मशहूर पिकनिक स्पॉट्स पर प्रतिबंध, चले गए तो होगी कानूनी कार्रवाई
Thu, 25 Jun 2026 09:29 PM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Thu, 25 Jun 2026 09:29 PM IST
सार
इंदौर जिला प्रशासन ने मानसून के दौरान हादसों और जनहानि को रोकने के लिए महू तहसील के तिंछा फॉल, चोरल डैम और हथियारी खो सहित 17 प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आम जनता के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है।
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तिंछा फॉल भी प्रतिबंधित हुआ।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विस्तार
इंदौर जिला प्रशासन ने मानसून के सीजन को देखते हुए एक महत्वपूर्ण सुरक्षात्मक कदम उठाया है। प्रशासन द्वारा महू तहसील के अंतर्गत आने वाले कुल 17 प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आम जनता और पर्यटकों के प्रवेश को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह सख्त निर्णय बारिश के मौसम में इन क्षेत्रों में होने वाले संभावित हादसों, जलभराव और जनहानि की आशंका को पूरी तरह से समाप्त करने के उद्देश्य से लिया गया है। इस संबंध में इंदौर के कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी द्वारा आधिकारिक तौर पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 163 के तहत एक विशेष प्रतिबंधात्मक आदेश भी जारी कर दिया गया है। प्रशासन द्वारा जारी किया गया यह नया नियम 25 जून 2026 से आगामी 22 अगस्त 2026 तक पूरी तरह से प्रभावी रहेगा।
दुर्घटनाओं को रोकने और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए लिया गया निर्णय
विगत वर्षों के अनुभवों को देखते हुए जिला प्रशासन ने इस बार पहले ही सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, पिछले साल में मानसूनी वर्षा के दौरान इन टापुओं, प्राकृतिक झरनों और गहरी खाइयों वाले नदी-नालों के क्षेत्रों में कई गंभीर हादसे दर्ज किए जा चुके हैं। प्रशासन ने पाया है कि पर्यटन स्थलों पर पहुंचने वाले लोग और सैलानी अक्सर अपनी सुरक्षा से जुड़े मानकों की अनदेखी कर देते हैं और बेहद खतरनाक व प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश कर जाते हैं। इस तरह की लापरवाही के कारण ही अचानक से बड़ी दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त, लगातार होने वाली मानसूनी बारिश की वजह से पहाड़ी झरनों और स्थानीय नदी-नालों का जलस्तर अचानक से अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाता है, जिससे वहां मौजूद लोगों के लिए खतरा और अधिक गंभीर हो जाता है।
इन प्रमुख 17 पर्यटन स्थलों के प्रतिबंधित क्षेत्रों में पूरी तरह से पाबंदी
प्रशासनिक आदेश में स्पष्ट किया गया है कि महू क्षेत्र के सबसे लोकप्रिय और आकर्षक माने जाने वाले पर्यटन स्थलों पर अब सुरक्षा के लिहाज से सख्त घेराबंदी रहेगी। इस आदेश के दायरे में तिंछा फॉल, चोरल फॉल, चोरल डैम, शीतलामाता फॉल, कजलिगढ़, मेंढ़ी कुंड, जामन्या कुंड, मोहाड़ी फॉल, रस्की वाटर फॉल, लोहिया कुंड, जलजमनी, गढ़ी कुंड, टिंडिया महादेव, बाघनिया कुंड, गोगी भड़क और हथियारी खो सहित अन्य सभी प्रमुख पिकनिक स्पॉट शामिल हैं। इन सभी चिन्हित पर्यटन स्थलों के खतरनाक और प्रतिबंधित दायरों में किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित घोषित कर दिया गया है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।
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नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई
इस प्रतिबंधात्मक आदेश को जमीनी स्तर पर पूरी तरह से लागू करने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। इसके तहत संबंधित जनपद पंचायत, नगर परिषद और नगर पालिका के सभी जिम्मेदार अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन सभी चिन्हित स्थलों पर तत्काल प्रभाव से चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा घेरे तैयार करें। इसके साथ ही क्षेत्र के सभी संबंधित थाना प्रभारियों को भी इस आदेश का बेहद कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासन ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि कोई भी व्यक्ति इस आदेश की अवहेलना करता हुआ या प्रतिबंधित क्षेत्र में जाता हुआ पाया गया, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 सहित अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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दुर्घटनाओं को रोकने और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए लिया गया निर्णय
विगत वर्षों के अनुभवों को देखते हुए जिला प्रशासन ने इस बार पहले ही सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, पिछले साल में मानसूनी वर्षा के दौरान इन टापुओं, प्राकृतिक झरनों और गहरी खाइयों वाले नदी-नालों के क्षेत्रों में कई गंभीर हादसे दर्ज किए जा चुके हैं। प्रशासन ने पाया है कि पर्यटन स्थलों पर पहुंचने वाले लोग और सैलानी अक्सर अपनी सुरक्षा से जुड़े मानकों की अनदेखी कर देते हैं और बेहद खतरनाक व प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश कर जाते हैं। इस तरह की लापरवाही के कारण ही अचानक से बड़ी दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त, लगातार होने वाली मानसूनी बारिश की वजह से पहाड़ी झरनों और स्थानीय नदी-नालों का जलस्तर अचानक से अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाता है, जिससे वहां मौजूद लोगों के लिए खतरा और अधिक गंभीर हो जाता है।
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इन प्रमुख 17 पर्यटन स्थलों के प्रतिबंधित क्षेत्रों में पूरी तरह से पाबंदी
प्रशासनिक आदेश में स्पष्ट किया गया है कि महू क्षेत्र के सबसे लोकप्रिय और आकर्षक माने जाने वाले पर्यटन स्थलों पर अब सुरक्षा के लिहाज से सख्त घेराबंदी रहेगी। इस आदेश के दायरे में तिंछा फॉल, चोरल फॉल, चोरल डैम, शीतलामाता फॉल, कजलिगढ़, मेंढ़ी कुंड, जामन्या कुंड, मोहाड़ी फॉल, रस्की वाटर फॉल, लोहिया कुंड, जलजमनी, गढ़ी कुंड, टिंडिया महादेव, बाघनिया कुंड, गोगी भड़क और हथियारी खो सहित अन्य सभी प्रमुख पिकनिक स्पॉट शामिल हैं। इन सभी चिन्हित पर्यटन स्थलों के खतरनाक और प्रतिबंधित दायरों में किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित घोषित कर दिया गया है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।
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नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई
इस प्रतिबंधात्मक आदेश को जमीनी स्तर पर पूरी तरह से लागू करने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। इसके तहत संबंधित जनपद पंचायत, नगर परिषद और नगर पालिका के सभी जिम्मेदार अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन सभी चिन्हित स्थलों पर तत्काल प्रभाव से चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा घेरे तैयार करें। इसके साथ ही क्षेत्र के सभी संबंधित थाना प्रभारियों को भी इस आदेश का बेहद कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासन ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि कोई भी व्यक्ति इस आदेश की अवहेलना करता हुआ या प्रतिबंधित क्षेत्र में जाता हुआ पाया गया, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 सहित अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
