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इंदौर: सरकारी फंड ट्रांसफर करने के नाम पर ठगा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता का बैंक खाता खाली
Tue, 08 Sep 2026 07:01 AM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Tue, 08 Sep 2026 07:01 AM IST
सार
इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र में एक शातिर ठग ने खुद को नायब तहसीलदार बताकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता केशकली पाल यादव से शौचालय मरम्मत की राशि खाते में भेजने के बहाने ₹50,000 की ऑनलाइन ठगी कर ली।
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INDORE NEWS
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विस्तार
इंदौर में साइबर अपराध के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। यहां तक कि अब तो साइबर ठग सरकारी अधिकारी बनकर नागरिकों और कर्मचारियों को निशाना बनाने लगे हैं। बाणगंगा थाना क्षेत्र में इसी तरह की धोखाधड़ी की एक गंभीर घटना सामने आई है। यहां एक शातिर अपराधी ने खुद को नायब तहसीलदार बताकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से लगभग पचास हजार रुपये ठग लिए। आरोपी ने आंगनवाड़ी केंद्र के शौचालय निर्माण एवं मरम्मत का पैसा बैंक खाते में स्थानांतरित करने का झांसा दिया। फर्जी डिजिटल ट्रांजैक्शन का जाल बुनकर आरोपी ने पीड़ित महिला के खाते से 50 हजार रुपये निकाल लिए। बैंक से राशि कटने का पता चलते ही पीड़िता ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया। बाणगंगा थाना पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर आरोपी के फोन नंबरों की सर्विलांस और तकनीकी जांच शुरू कर दी है।
झांसा देकर खाते से साफ किए 50 हजार रुपये
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराध के नए-नए तरीकों से आम लोग बुरी तरह परेशान हैं। बाणगंगा थाना क्षेत्र स्थित नंद नगर की निवासी केशकली पाल यादव, जो आंगनवाड़ी कार्यकर्ता होने के साथ-साथ अस्पताल में भी अपनी सेवाएं देती हैं, कुछ दिन पहले वह इस साइबर जालसाजी का शिकार हो गईं। पीड़ित महिला के पास एक अज्ञात नंबर से फोन आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद की पहचान नायब तहसीलदार के रूप में कराई। आरोपी ने महिला को विश्वास दिलाया कि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देश पर आंगनवाड़ी के शौचालय मरम्मत के लिए निर्धारित सरकारी राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जा रही है।
इस तरह रचा धोखाधड़ी का जाल
पीड़िता का भरोसा जीतने के लिए जालसाज ने शुरुआत में उनके खाते में 10 रुपये भेजे और उसकी पुष्टि कराई। इसके बाद आरोपी ने 39,990 रुपये के असफल ट्रांजेक्शन का एक फर्जी संदेश भेजा और तकनीकी खराबी का बहाना बनाकर 15 हजार तथा 35 हजार रुपये के दो अन्य फर्जी ट्रांजैक्शन दिखाए। इस प्रक्रिया में सरकारी पैसे खाते में आने के बजाय पीड़िता के अपने ही बैंक अकाउंट से 50 हजार रुपये कटकर आरोपी के खाते में स्थानांतरित हो गए। जैसे ही मोबाइल पर पैसे कटने का संदेश आया, पीड़िता स्तब्ध रह गईं। उन्होंने बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद केस बाणगंगा थाने को भेजा गया। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर संबंधित नंबरों तथा बैंक खातों का ब्योरा खंगालना शुरू कर दिया है।
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झांसा देकर खाते से साफ किए 50 हजार रुपये
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराध के नए-नए तरीकों से आम लोग बुरी तरह परेशान हैं। बाणगंगा थाना क्षेत्र स्थित नंद नगर की निवासी केशकली पाल यादव, जो आंगनवाड़ी कार्यकर्ता होने के साथ-साथ अस्पताल में भी अपनी सेवाएं देती हैं, कुछ दिन पहले वह इस साइबर जालसाजी का शिकार हो गईं। पीड़ित महिला के पास एक अज्ञात नंबर से फोन आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद की पहचान नायब तहसीलदार के रूप में कराई। आरोपी ने महिला को विश्वास दिलाया कि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देश पर आंगनवाड़ी के शौचालय मरम्मत के लिए निर्धारित सरकारी राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जा रही है।
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इस तरह रचा धोखाधड़ी का जाल
पीड़िता का भरोसा जीतने के लिए जालसाज ने शुरुआत में उनके खाते में 10 रुपये भेजे और उसकी पुष्टि कराई। इसके बाद आरोपी ने 39,990 रुपये के असफल ट्रांजेक्शन का एक फर्जी संदेश भेजा और तकनीकी खराबी का बहाना बनाकर 15 हजार तथा 35 हजार रुपये के दो अन्य फर्जी ट्रांजैक्शन दिखाए। इस प्रक्रिया में सरकारी पैसे खाते में आने के बजाय पीड़िता के अपने ही बैंक अकाउंट से 50 हजार रुपये कटकर आरोपी के खाते में स्थानांतरित हो गए। जैसे ही मोबाइल पर पैसे कटने का संदेश आया, पीड़िता स्तब्ध रह गईं। उन्होंने बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद केस बाणगंगा थाने को भेजा गया। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर संबंधित नंबरों तथा बैंक खातों का ब्योरा खंगालना शुरू कर दिया है।
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