Indore: निर्माण को लेकर प्रदेश में सबसे ज्यादा प्रयोग इंदौर में, टू-थ्री लेयर ब्रिज,सुरंग बन रही यहां
ब्रिज की ऊंचाई जमीन से 70 फीट ऊंची रखी गई है,क्योकि ब्रिज के नीचे से मेट्रो ट्रेक भी पार हो रहा है। ट्रेक और ब्रिज के बीच तय नियमों के तरह दूरी रखी गई है। ब्रिज ऊंचा होने के कारण इसकी लंबाई भी ज्यादा है। यह ब्रिज अरबिंदो अस्पताल के समीप उतरेगा।
विस्तार
मध्य प्रदेश के सबसे बड़े शहर इंदौर में सड़कों और विकास कार्यों में सबसे ज्यादा प्रयोग हो रहे है। यहां डबल डेकर और ट्रिपल लेयर ब्रिज बन रहे है। अब एक और डबल डेकर ब्रिज बनाने की प्लानिंग हो रही है। इंदौर जिले में हाईवे पर सुरंग भी प्रदेश में सबसे पहले बन रही है।
इंदौर में अब निर्माण कार्यों की गति तेज हो गई है। पहले जहां चार से पांच सालों में एक ब्रिज बमुश्किल तैयार होते थे, अब दो साल में चार-पांच ब्रिज एक साथ आकार ले रहे है।
70 फीट ऊंचाई पर बन रहा ब्रिज
इंदौर-उज्जैन रोड के लवकुश चौराहे पर डबल डेकर ब्रिज सालभर में बन कर तैयार हो जाएंगे। एक ब्रिज गांधी नगर की तरफ बना रहा है,जबकि एक ब्रिज इंदौर-उज्जैन रोड पर बन रहा है।
इस ब्रिज की ऊंचाई जमीन से 70 फीट ऊंची रखी गई है,क्योकि ब्रिज के नीचे से मेट्रो ट्रेक भी पार हो रहा है। ट्रेक और ब्रिज के बीच तय नियमों के तरह दूरी रखी गई है। ब्रिज ऊंचा होने के कारण इसकी लंबाई भी ज्यादा है। यह ब्रिज अरबिंदो अस्पताल के समीप उतरेगा।
एमआर-10 जंक्शन पर अंडर पास के उपर ब्रिज
इंदौर बाईपास से शहर में आने वाले वाहनों की एंट्री आसान करने के लिए एमआर-10 जंक्शन पर तीन रास्ते निकाले जा रहे है। विजय नगर चौराहा से हरदा बाइपास को जोड़ने के लिए अंडरपास बन रहा है। फिर देवास से राऊ की तरफ जाने वाले वाहनों के लिए एक ब्रिज बन रहा।
इसके बाद फिर विजय नगर से बायपास के पार की काॅलोनियों व सर्विस रोड को जोड़ने के लिए ब्रिज तैयार हो रहा है। इस तरह का प्रदेश में पहला ब्रिज इंदौर में ही तैयार हो रहा है। इसके अलावा इंदौर-खंडवा रोड फोरलेन रोड पर पहाड़ों को काट कर सुरंग भी बनाई जा रही है।
बीआरटीएस का प्रयोग भी सबसे पहले इंदौर में
पंद्रह साल पहले इंदौर में देश का पहला बीआटीएस प्रोजेक्ट मंजूर हुआ था। 300 करोड़ रुपये खर्च कर अलग-अलग लेन बनाई गई। आई बस के लिए एक लेन बनी। इंदौर के अलावा दिल्ली, पुणे, भोपाल और अहमदाबाद में बीआरटीएस बना था, लेकिन बीआरटीएस का सफल संचालन इंदौर और अहमदाबाद में हो रहा है। भोपाल में भी बीआरटीएस का काफी विरोध हुऔ और कुछ हिस्सों में उसे हटाने का फैसला लिया गया। दिल्ली और पुणे में भी बीआरटीएस हटा दिया गया।
