फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   Indore: Many families migrated due to toxic waste, houses in villages were locked

Union Carbide Waste: भोपाल गैस त्रासदी के कचरे के खौफ से पीथमपुर के गांव हो रहे खाली, कई घरों पर लटके ताले

Sat, 04 Jan 2025 07:17 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Sat, 04 Jan 2025 07:17 PM IST
सार

यूनियन कार्बाइड के कचरे को पीथमपुर की रामकी कंपनी में जलाया जाना है। इस कंपनी से 200 मीटर दूर तारापुर गांव है। यहां कचरा पहुंच गया है, पर लोग पलायन कर गए हैं। कुछ घरों की चौखटों पर ताला लटका हुआ है, कुछ पर लगने वाला है। कारण है जहरीले कचरे की दहशत। गांव वाले मन में ये सवाल लेकर पलायन कर गए हैं कि जहरीले वातावरण में जिंदगी कटेगी कैसे ? यहां इनको समझाने वाला कोई नहीं है।    

विज्ञापन
Indore: Many families migrated due to toxic waste, houses in villages were locked
घरों में लगे ताले। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पीथमपुर की रामकी कंपनी से 200 मीटर दूर गांव में शनिवार की सुबह अमर उजाला की टीम पहुंची। मकसद था ये जानना कि 24 घंटे के हंगामे के बाद पीथमपुर का हाल कैसा है? पर जो तस्वीर सामने आई वो चौंका गई। गांव की गलियां सूनी थी। कुछ लोग परिवार के साथ मकानों की छत पर खड़े थे। वो देख रहे थे, उन 12 कंटेनर को, जो रामकी कंपनी में खड़े थे। इन कंटेनर को देखकर गांव वाले आपस में चर्चा भी कर रहे थे। ये नजारा देखकर अमर उजाला की टीम आगे बढ़ती है तो कुछ घरों की चौखट पर ताले नजर आते हैं। 

विज्ञापन


दरअसल ये बात चौंकाने वाली थी, क्योंकि गांव की आबादी महज 1500 है। करीब 300 परिवार इस गांव में रहते हैं। आखिर इतनी कम आबादी के गांव से लोग अचानक कहां चले गए? इस बात की तफ्तीश अमर उजाला की टीम ने की। पता चला, 337 टन जहरीले कचरे को निपटान के लिए पीथमपुर की रामकी कंपनी में लाया गया है। इससे लोगों में डर का माहौल है। इसकी वजह से लोग गांव छोड़कर जा रहे हैं।  जो परिवार यहां अभी रह रहे हैं, वे भी दूसरी जगह ठिकाना खोज रहे हैं। या फिर अपने गांव जाने की तैयारी में जुटे हैं। गांव वालों में डर की बड़ी वजह यह है कि साल 2008 में जो दस टन कचरा यहां दफनाया गया है। उसके कारण कई तरह की परेशानियां हो रही हैं। उसकी वजह से नदी का पानी काला पड़ चुका है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

इस गांव में विनोद कुमार पांच साल से रह रहे हैं।  वे मूलत: बिहार के रहने वाले हैं। उनका कहना है कि अक्सर परिवार में कोई न कोई बीमार रहता है। कमाई का बड़ा खर्च इलाज में चला जाता है। अब यहां 337 टन कचरा और आ गया है। हम जीने के लिए कमा रहे है। इस जहरीले कचरे के बीच तो रहना दुश्वार हो गया है, इसलिए परिवार को गांव भेज दिया है। वहीं दूसरी तरफ स्किन रोग से पीड़ित नंदकिशोर शाह का कहना है कि उनके पैर मेें दो बार चमड़ी से जुड़ी बीमारी हो चुकी है। यहां के पानी में खराबी हो चुकी है। पंद्रह साल पहले यहां सिर्फ कंपनी थी। बाद में यहां ट्रेंचिंग ग्राउंड भी बना दिया गया। यदि यहां कचरा जलाना है तो फिर तारापुर गांव को दूसरी जगह सरकार को बसाना चाहिए था।



गांव वालों का कहना है कि जमीन के नीचे से बोरिंग से निकला पानी हम लोग पीते थे। पर अब वो भी  पीने योग्य नहीं रह गया है। सरकार भले ही अलग-अलग जांचों में पानी के दूषित न होने का हवाला दे, लेकिन यहां के ग्रामीणों को उस पर विश्वास नहीं है। गांव वालों का दावा है कि पानी पीना तो दूर नहाने और बर्तन धोने के उपयोग के कारण ही उन्हें बीमारियां हो रही है। यहां चमड़ी से जुड़े रोगों की बात ग्रामीण ज्यादा करते हैं।

रात में जलाया जाता है कचरा
गांव वालों का कहना है कि रामकी कंपनी में प्रदेश के अन्य शहरों से भी खतरनाक अपशिष्ट निपटान के लिए लाए जाते हैं। अक्सर रात के समय कंपनी के भस्कम में कचरा जलाया जाता है। कई बार तो रात में विषैले धुएं के कारण नींद नहीं आती है। उधर पलायन को लेकर तहसीलदार अनिता बरेठा ने कहा कि ग्रामीणों में डर का माहौल है, इसलिए वे पलायन की बात कर रहे है। उन्हें समझाया गया है कि किसी भी कंटेनर से कचरा खाली नहीं किया गया है। डरने की कोई बात नहीं है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed