Indore: इंदौर में जूना गणेश मोबाइल पर काॅल सुन करते है भक्तों की मनोकामना पूरी
जूनी इंदौर का प्राचीन मंदिर सैकड़ों साल पुराना है। इस मंदिर की स्थापना परमार राजाओं ने करवाई थी। औरंगजेब इस मंदिर को नुकसान पहुंचाने के मकसद से आया था लेकिन वह नुकसान नहीं पहुंचा पाया।
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हैलो..गणेशजी,मैं अपना घर बनाना चाहता हुं मेरी मनोकामना पूरी कर लेना। मेरे संकट दूर कर लेना। इस तरह के कई काॅल इंदौर के जूना गणेश के पुजारी के पास आते हैै। वे मोबाइल लंबोदर के कानों के पास लेे जातेे है और भक्त उन्हें अपनी मनोकामना बताते है।
हम बात कर रहे है जूना चिंतामन गणेश मंदिर की, जिनकी पहचान मोबाइल वाले गणेश जी से भी है। इस मंदिर का इतिहास पांच सौ साल पुराना हैै। पहले भक्त गणेशजी को चिट्ठियां लिखा करते थे, लेकिन तकनीक के बदलाव के बाद अब गणेशजी को काॅल आते हैै। कुछ काॅल तो कुछ सात समंदर पार विदेशों में भी आते हैै भक्त शादी या शुभ कार्य का प्रथम न्योता गणेश को अर्पित करते है।
मंदिर पुजारी मनोहर लाल पाठक बताते हे कि जूनी इंदौर का प्राचीन मंदिर सैकड़ों साल पुराना है। इस मंदिर की स्थापना परमार राजाओं ने करवाई थी। औरंगजेब इस मंदिर को नुकसान पहुंचाने के मकसद से आया था लेकिन वह नुकसान नहीं पहुंचा पाया। कई परिवारों के बच्चे अब विदेेश में है, लेकिन उनकी भगवान के प्रति आस्था हैै,इसलिए वे भी काॅल करते है। पुजारी पाठक उनको गजानन के दर्शन कराते हैं और उनकी समस्या गणेश को सुनाते है।जब उनकी समस्या का निवारण हो जाता है तो वे तब भी बाबा को धन्यवाद स्वरूप एक लेटर भेजते है।
पुजारी के अनुसार गजानन के पास अब तक अमेरिका, दुबई, नेपाल, रूस, जर्मनी, जापान जैसे कई देशों से भक्तों के फोन आते है और चिट्ठियां यहां पहुंचती हैं। वे बताते है कि हर दौर में भक्तों ने भगवान से जुड़ने का नया तरीका अपनाया। फोन कॉल से चिंतामन गणेश अपने दूर-दराज के भक्तों से संपर्क में बने रहते है। पहले वो चिट्ठी के जरिए संपर्क में रहते थे।
फिर जब मोबाइल आया तो साल 2003 से भगवान ने भक्तों की प्रार्थना फोन पर सुनना शुरू कर दी। गणेश चतुर्थी के मौके पर तो भगवान के लिए फोन कॉल्स की संख्या 200 तक पहुंच जाती है। इस मंदिर को होलकर राजघराना भी मानता है। राजपरिवार से भी पहले प्रसाद चढ़ाया जाता था।
