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Indore Janmashtami: 1922 में मिला इंदौर को पहला सिनेमाघर, जन्माष्टमी से रहा विशेष नाता, जानें क्या था खास

Sat, 16 Aug 2025 08:49 PM IST
Kamlesh Sen कमलेश सेन
Updated Sat, 16 Aug 2025 08:49 PM IST
सार

नगर के पहले सिनेमा घर का श्रेय नरहर बालकृष्ण अडसुले को जाता है, जिन्होंने 1922 में "श्रीकृष्ण सिनेमा" की स्थापना की थी। यहां पहली मूक फिल्म कालिया मर्दन और पहली बोलती फिल्म आलम आरा प्रदर्शित हुई थी। जन्माष्टमी पर अंतिम शो 15 मिनट पहले छोड़ा जाता था और सिनेमाघरों में पूजन व प्रसाद वितरण का आयोजन होता था।

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Indore Janmashtami: The history of Indore's cinema halls and Janmashtami is unique
नरहर बालकृष्ण अडसुले। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंदौर नगर में जन्माष्टमी का विशेष महत्व रहा है। एक समय था जब यह त्योहार सिनेमाघरों में भी धूमधाम से मनाया जाता था। नगर के पहले सिनेमा घर का श्रेय नरहर बालकृष्ण अडसुले को जाता है, जिन्होंने 1922 में "श्रीकृष्ण सिनेमा" की स्थापना की थी। श्री कृष्ण जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी को नगर के सिनेमा घरों में विशेष कार्यक्रम मनाया जाता था। 

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अडसुले ने अपनी आटा चक्की का व्यवसाय छोड़कर नगर में श्रीकृष्ण सिनेमा घर 1922 में बांस, टीन और खप्परों को जोड़कर निर्माण किया, जिसका नाम उन्होंने श्रीकृष्ण रखा था। इसी सिनेमा घर में पहली मूक फिल्म "कालिया मर्दन" दिखाई गई थी और पहली बोलती फिल्म "आलम आरा" भी प्रदर्शित की गई थी।
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जन्माष्टमी पर विशेष आयोजन 
नगर के छविघरों में जन्माष्टमी पर रात्रि में अंतिम शो जो 12 बजे छूटता था। उसे जन्माष्टमी के दिन 15 मिनट पहले छोड़ दिया जाता और जन्माष्टमी उत्सव मनाया जाता था और प्रसाद वितरण होता था। 
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बंद हो गई प्रथा
एक दर्शक विनोद जोशी के अनुसार मैंने स्वयं ने जन्माष्टमी पर सिनेमाघरों में अंत में पूजन और प्रसाद वितरण कार्यक्रम में भाग लिया। नगर में जन्माष्टमी के अवसर पर कई सिनेमघरों में कृष्ण से जुड़ी फिल्मों का प्रदर्शन होता रहा। बाद में यह प्रथा बंद हो गई।

महाराजा और श्रीकृष्ण में विशेष आयोजन
नगर के दो सिनेमा घरों में श्रीकृष्ण और महाराजा में विशेष आयोजन जन्माष्टमी पर होता था। एक संयोग रहा कि इन सिनेमा घरों में श्रीकृष्णा जन्म उत्सव पर कृष्ण चरित्र से जुड़ी फिल्म प्रदर्शित की जाती थी। उस दौर में धार्मिक फिल्मों का एक अलग की क्रेज था। 1938 में गोपाल कृष्ण फिल्म का प्रदर्शन श्रीकृष्ण में हुआ था और रात्रि में 12 बजे विशेष आयोजन और पूजा होती थी। बाद ने महाराजा में जय राधे कृष्ण (1974) और नवीनचित्रा में बलराम श्रीकृष्ण (1968) फिल्म का प्रदर्शन हुआ था।

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