Indore: विस्फोट विशेषज्ञ शरद सरवटे बोले- सुरंग में खोदाई के दौरान पत्थर तोड़ने के लिए नियंत्रित विस्फोट तकनीक
सुरंग में फंसे 41मजदूरों को निकालने के लिए इंदौर से आगर मशीन भेजी गई है। इस तरह की मशीन देश में दिल्ली और इंदौर में है। दिल्ली वाली मशीन खराब होने के बाद इंदौर से वायुसेना के विमान की मदद से देहरादून मशीन भेजी गई थी।
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उत्तराखंड की सिलक्यारा टनल में फंसे 41 मजदूरों के बचाव अभियान पर देशभर की निगाहें लगी हुई है और विशेषज्ञ अपनी राय भी बचाव कार्य में लगी टीम को दे रहे है। 100 से अधिक बिल्डिंगों को विस्फोट से धराशाई कर चुके इंदौर के विस्फोट विशेषज्ञ शरद सरवटे का इस बारे में कहना है कि पहले एक मशीन वहां खराब हो गई,क्योकि बीच में बड़ी चट्टान आ गई थी। पहाड़ पर मजदूरों को निकालने के लिए बड़ा छेद करने में इस तरह की समस्या फिर आ सकती है, लेकिन उसका भी रास्ता है।
नियंत्रित विस्फोट के जरिए उन चट्टानों को तोड़ा जा सकता है। दरअसल कई बार पथरीले क्षेत्रों में बोरिंग के दौरान यह समस्या आती है। तब चट्टान तोड़ने के लिए नियंत्रित विस्फोट किया जाता है। यह तकनीक वहां भी अपनाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि यदि उत्तराखंड सरकार उनसे मदद लेती है तो वे इसके लिए तैयार है। नियंत्रित विस्फोट से कंपन का खतरा भी ज्यादा नहीं रहता है।
इदौर से भेजी गई है मशीन
सुरंग में फंसे 41मजदूरों को निकालने के लिए इंदौर से आगर मशीन भेजी गई है। इस तरह की मशीन देश में दिल्ली और इंदौर में है। दिल्ली वाली मशीन खराब होने के बाद इंदौर से वायुसेना के विमान की मदद से देहरादून मशीन भेजी गई थी, हालांकि उसका उपयोग फिलहाल नहीं हो रहा है,क्योकि अब खोदाई पहाड़ के उपरी हिस्से नीचे की तरफ हो रही है। इस हिस्से में 60 मीटर तक खोदाई की जाना है। अभी तक 30 मीटर तक बड़ा छेंद कर 800 एमएम व्यास के पाइप डाले जा चुके है। उनकी मदद से मजदूरों को बाहर निकाला जाएगा। काम पूरा होनेे के बाद वायुसेना का विमान फिर मशीन इंदौर भेज देगा।
