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Indore: सालभर बाद भी नहीं मिला इंदौर के हुकमचंद मिल के 1200 श्रमिकों को पैसा

Wed, 25 Dec 2024 07:43 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Wed, 25 Dec 2024 07:43 PM IST
सार

32 साल पहले हुकमचंद मिल अचानक बंद हो गई थी। मिल श्रमिकों को ग्रेज्यूएटी और पीएफ की राशि नहीं मिली पाई थी। मिल जब बंद हुई थी, तब पांच हजार से ज्यादा श्रमिक काम कर रहे थे। श्रमिकों ने कोर्ट में याचिका लगाई और 31 साल बाद उनके हक में फैसला हुआ था।

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Indore: Even after a year, 1200 workers of Indore's Hukam Chand Mill did not get their money
हुकमचंद मिल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पिछले साल 25 दिसंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 218 करोड़ रुपये हुकमचंद मिल के श्रमिकों को देने के लिए परिसमापक के खाते में डाले थे, लेकिन 1200 श्रमिक के परिवारों को अभी भी उनके हक के पैसे का इंतजार है।

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जिन श्रमिकों की मौत हो चुकी है। उनके वारिस तय अभी तक कमेटी ने नहीं किए है,जबकि पांच साल पहले भी कई उन लोगों के खाते में मिल के 50 करोड़ रुपये की राशि जमा की गई थी।

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218 करोड़ रुपये पांच हजार श्रमिकों के खाते में जाना थे। जो श्रमिक जीवित थे। उन्हें तो राशि मिल गई, लेकिन मृत श्रमिकों के परिवार राशि के लिए चक्कर काट रहे है। वे बार-बार समिति से उनके हक का पैसा खाते में जमा करने के लिए कह रहे है।


पैसे से वंचित परिवारों का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन कमेटी द्वारा नहीं किया जा रहा है। करीब 80 करोड़ से अधिक की राशि अभी तक नहीं बंट पाई है। हुकमचंद मिल श्रमिक समिति के अध्यक्ष नरेंद्र श्रीवंश का कहना हैै कि सभी श्रमिकों के दस्तावेज कोर्ट द्वारा तय

 

32 साल पहले बंद हुई थी मिल

32 साल पहले हुकमचंद मिल अचानक बंद हो गई थी। मिल श्रमिकों को ग्रेज्यूएटी और पीएफ की राशि नहीं मिली पाई थी। मिल जब बंद हुई थी, तब पांच हजार से ज्यादा श्रमिक काम कर रहे थे। श्रमिकों ने कोर्ट में याचिका लगाई और 31 साल बाद उनके हक में फैसला हुआ था।

नगर निगम से हाऊसिंग बोर्ड को 40 एकड़ जमीन खरीदी। इस जमीन पर हाऊसिंग प्रोजेक्ट भी जल्दी ही शुरू होने वाला है, लेकिन जिन परिवारों को पैसा नहीं मिला है। वे इस पर आपत्ति ले सकते है।

 

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