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Indore: कमेटी को टूटे रैलिंग, अधूरे बस स्टेशन और बिखरा मलबा मिला, हाईकोर्ट में पेश होगी रिपोर्ट

Wed, 10 Dec 2025 08:48 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Wed, 10 Dec 2025 08:48 PM IST
सार

बीआरटीएस का दौरा करने पहुंचे कमेटी सदस्यों काम की धीमी गति को लेकर असंतुष्ट नजर आए। उनका कहना था कि एक तरफ के रैलिंग हटाए गए है। स्टेशन तोड़ने में भी काफी समय लग रहा है।

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Indore: Committee finds broken railings, incomplete bus station and scattered debris, report to be presented i
हाईकोर्ट का दौरा किया कमेटी ने। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीआरटीएस के लिए हाईकोर्ट द्वारा गठित छह सदस्यीय कमेटी ने बुधवार को राजीव गांधी चौराहा से एलआईजी तक के हिस्से का दौरा किया। सदस्य बीआरटीएस हटाने के काम से अंसतुष्ठ नजर आए और उन्होंने अफसरों से कहा कि शिवाजी वाटिका के बस स्टेशन को तोड़ने में एक माह बीत चुके है। उसका सामान भी नहीं उठा है। दस से ज्यादा बस स्टेशनों को तोड़ने में कितना समय लगेगा।

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सिर्फ एक तरफ के रैलिंग हटाने के मामले में भी अफसरों ने कहा कि उन्हें हाईकोर्ट ने एक तरफ के रैंलिग हटाने के लिए कहा है। 15 दिसंबर तक कमेटी को हाईकोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपना होगी। पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने बस रैंलिग हटाने का काम धीमा होने पर नाराजगी जताई थी और यह टिप्पणी भी की थी कि- मकान, बिल्डिंग तोड़ने का काम दो-तीन घंटे में हो जाता है। रैलिंग हटाने में इतना समय क्यों लग रहा है। सुनवाई के दौरान एक माह में बस रैलिंग हटाने की बात निगमायुक्त ने की थी।

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सदस्य बोले- काम की गति धीमी

बीआरटीएस का दौरा करने पहुंचे कमेटी सदस्यों ने कहा कि दौरे में हमें टूटी रैलिंग दूसरी रैलिंग के टिकी मिली। टूटे स्टेशन का सामान मौके पर ही पड़ा था। धूल उड़ रही थी। काम की गति धीमी है। हम अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत करेंगे। कमेटी सदस्य गुरुवार को भी दौरा करेंगे।

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आपको बता दें कि 9 माह पहले इंदौर के बीआरटीएस को हटाने का फैसला लिया गया था। कोर्ट ने इसकी अनुमति दी थी, लेकिन अभी तक बस लेन हट नहीं पाई है। बस स्टेशन भी टूट नहीं पाए। राजगढ़ के एक ठेकेदार ने तोड़ने का ठेका लिया है, लेकिन काम बेमन से किया जा रहा है। पिछली सुनवाई के बाद एक तरफ के बस रैलिंग गैस कटर से काट कर दिया गया, लेकिन अभी तक उन्हें उठाया भी नहीं गया है।

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