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Indore News: आबकारी विभाग ने बेची कार, आरटीओ बोला- कागज फर्जी, जब्त करेंगे, खरीदने वाले के डूबे डेढ़ लाख
Mon, 24 Apr 2023 04:41 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Mon, 24 Apr 2023 04:41 PM IST
सार
बिना कागज जांचे विभाग ने बोली में बेच दी कार, चेचिस नंबर और कार का नंबर निकला फर्जी, ग्राहक परेशान
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अजय वर्मा
- फोटो : न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
इंदौर के अजय वर्मा को आबकारी विभाग ने (government cars auction) में बिना कागज जांचे बोली में कार बेच दी। जब अजय कार का रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए आरटीओ गए तो पता चला कि उन्हें दिए गए कागज फर्जी हैं। कार का चेचिस नंबर और नंबर प्लेट पर लिखा नंबर दोनों ही फर्जी हैं। आरटीओ का कहना है कि कार का कहीं पर भी कोई रिकार्ड नहीं मिल रहा है। इसलिए कार को जब्त किया जाएगा। अब अजय के डेढ़ लाख रुपए डूब गए हैं जो उन्होंने आबकारी विभाग को जमा किए थे।
इंदौर आरटीओ में इन दिनों एक मामले की बहुत चर्चा है। यह मामला बीजलपुर के अजय वर्मा का है। अजय ने देवास आबकारी विभाग से सन्नी निशान कार खरीदी थी। आबकारी विभाग ने इसकी बोली 40 हजार से शुरू की थी। यह कार उन्हें एक लाख 36 हजार 214 रुपए में दी गई। कार पर वाहन नंबर MH.47.N 4557 लिखा था और उसका चेचिस नंबर EN.NO.FDPAE869F4 दिया गया। आबकारी विभाग से कार खरीदने के बाद जब अजय आरटीओ पहुंचे तो कई दिन तक वे परेशान होते रहे। अधिकारियों का कहना था कि उन्हें कार के बारे में जानकारी नहीं मिल पा रही है। बाद में मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा। जब जांच की गई तो पता चला कि कार का चेचिस नंबर और नंबर प्लेट दोनों ही गलत हैं। इस पर अजय ने बताया कि कार उसने आबकारी विभाग से खरीदी है और यह सब जानकारी उसे वहीं से दी गई है। इस पर आरटीओ ने कार को फर्जी बताते हुए जब्त करने का कहा। अब अजय आबकारी विभाग में फंसे अपने डेढ़ लाख रुपए वापस पाने के लिए दर दर भटक रहे हैं।
या तो रजिस्ट्रेशन हो या फिर मेरे पैसे वापस करें
अजय ने कहा कि या तो आरटीओ मेरी कार का रजिस्ट्रेशन करे या फिर मुझे मेरे पैसे वापस करे। इसमें मेरी क्या गलती है। मैंने तो यही सोचा था कि प्रशासन की बोली में कार मिल रही है तो पूरी तरह से सही होगी। जब कागजों की जांच हुई तो पता चला कि सब कागज फर्जी हैं।
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महाराष्ट्र का नंबर लिखा था
कार को शराब की तस्करी में पकड़ा गया था। उस पर महाराष्ट्र का नंबर लिखा था लेकिन जांच में वह नंबर फर्जी निकला।
कार जब्त ही होगी
आरटीओ अधिकारी हरदेश यादव ने बताया कि हम अपने स्तर पर गाड़ी के पूरे कागज जांच चुके हैं। अब कार को जब्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। आबकारी विभाग ने जो जानकारी दी है उसके आधार पर कार को कोई रिकार्ड नहीं मिल रहा है।
कैसे हुई गड़बड़
आबकारी विभाग को वाहन जब्ती के समय जो कागज मिले विभाग ने उसी के आधार पर गाड़ी को बोली में बेच दिया। यदि आरटीओ अधिकारियों से पहले कागज की जांच करवा लेते तो उसी समय यह गड़बड़ पता चल जाती।
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इंदौर आरटीओ में इन दिनों एक मामले की बहुत चर्चा है। यह मामला बीजलपुर के अजय वर्मा का है। अजय ने देवास आबकारी विभाग से सन्नी निशान कार खरीदी थी। आबकारी विभाग ने इसकी बोली 40 हजार से शुरू की थी। यह कार उन्हें एक लाख 36 हजार 214 रुपए में दी गई। कार पर वाहन नंबर MH.47.N 4557 लिखा था और उसका चेचिस नंबर EN.NO.FDPAE869F4 दिया गया। आबकारी विभाग से कार खरीदने के बाद जब अजय आरटीओ पहुंचे तो कई दिन तक वे परेशान होते रहे। अधिकारियों का कहना था कि उन्हें कार के बारे में जानकारी नहीं मिल पा रही है। बाद में मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा। जब जांच की गई तो पता चला कि कार का चेचिस नंबर और नंबर प्लेट दोनों ही गलत हैं। इस पर अजय ने बताया कि कार उसने आबकारी विभाग से खरीदी है और यह सब जानकारी उसे वहीं से दी गई है। इस पर आरटीओ ने कार को फर्जी बताते हुए जब्त करने का कहा। अब अजय आबकारी विभाग में फंसे अपने डेढ़ लाख रुपए वापस पाने के लिए दर दर भटक रहे हैं।
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या तो रजिस्ट्रेशन हो या फिर मेरे पैसे वापस करें
अजय ने कहा कि या तो आरटीओ मेरी कार का रजिस्ट्रेशन करे या फिर मुझे मेरे पैसे वापस करे। इसमें मेरी क्या गलती है। मैंने तो यही सोचा था कि प्रशासन की बोली में कार मिल रही है तो पूरी तरह से सही होगी। जब कागजों की जांच हुई तो पता चला कि सब कागज फर्जी हैं।
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महाराष्ट्र का नंबर लिखा था
कार को शराब की तस्करी में पकड़ा गया था। उस पर महाराष्ट्र का नंबर लिखा था लेकिन जांच में वह नंबर फर्जी निकला।
कार जब्त ही होगी
आरटीओ अधिकारी हरदेश यादव ने बताया कि हम अपने स्तर पर गाड़ी के पूरे कागज जांच चुके हैं। अब कार को जब्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। आबकारी विभाग ने जो जानकारी दी है उसके आधार पर कार को कोई रिकार्ड नहीं मिल रहा है।
कैसे हुई गड़बड़
आबकारी विभाग को वाहन जब्ती के समय जो कागज मिले विभाग ने उसी के आधार पर गाड़ी को बोली में बेच दिया। यदि आरटीओ अधिकारियों से पहले कागज की जांच करवा लेते तो उसी समय यह गड़बड़ पता चल जाती।
