MP News: इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का विरोध, जमीन अधिग्रहण से गुस्साए किसानों ने किया प्रदर्शन
किसानों का कहना है कि हमें अधिग्रहण को लेकर पहले नहीं बताया गया। सीधे हमें नोटिस थमा दी गई। वहीं मुआवजा राशि भी बाजार से कम है। ऐसे में हम अपनी उपजाऊ जमीन इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए नहीं देंगे।
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इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण का नोटिस मिलने से नाराज किसानों ने मंगलवार को इंदौर जिला कलेक्ट्रेट के बाहर धरना प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में 16 गांवों के किसान शामिल हुए। किसानों ने प्रशासन और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
किसान संगठन 'भूमि बचाओ सेना' के एक सदस्य मुकेश पटवारी ने मीडिया को बताया कि बिना किसी पूर्व चर्चा के प्रस्तावित इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर के लिए हमारी उपजाऊ भूमि के अधिग्रहण के लिए हमे नोटिस दिए गए। इसके अलावा सरकार की ओर से दी मुआवजे की दर मौजूदा बाजार मूल्य से काफी कम है। किसान 3,200 एकड़ में फैले इस इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए अपनी जमीन नहीं देंगे।
जिला कलेक्टर ने किसानों को दिया आश्वासन
प्रदर्शन के दौरान पहुंचे जिला कलेक्टर मनीष सिंह ने किसानों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि उनकी सहमति के बिना उनकी जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। इसके अलावा जिला कलेक्टर ने कहा कि वे अगले कुछ दिनों में किसानों के साथ प्रस्तावित परियोजना पर चर्चा करने के लिए घटनास्थल का दौरा करेंगे।
दावा- एक लाख लोगों को कॉरिडोर से मिलेगा रोजगार
अधिकारियों के अनुसार यह कॉरिडोर मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर शहर को राज्य के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर से जोड़ेगा। इस परियोजना से कम से कम 15,000 करोड़ रुपये का निवेश आ सकता है।परियोजना के तहत इंदौर और पीथमपुर के बीच 19.60 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जाएगा और पूरे क्षेत्र को एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए सड़क के दोनों ओर 300 मीटर कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ये इकोनॉमिक कॉरिडोर कम से कम 15,000 करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करेगा और लगभग एक लाख लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करेगा।
