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Mahashivratri: 1100 साल पुराने शिव मंदिर में कई दुर्लभ मूर्तियां, छह साल पहले खुदाई में मिला, इंदौर के पास
Thu, 07 Mar 2024 10:55 AM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Thu, 07 Mar 2024 10:55 AM IST
सार
महाशिवरात्रि विशेष : इंदौर के पास मिले इस शिव मंदिर का पुरातत्व विभाग संरक्षण कर रहा है। इसे पर्यटन स्थल में भी शामिल कर लिया गया है।
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देवबड़ला में छह साल पहले प्राचीन शिव मंदिर
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
विंध्याचल पर्वत श्रंखला और मालवा के पठार से जुड़े देवबड़ला में छह साल पहले प्राचीन शिव मंदिर मिला। खुदाई के दौरान इसकी जानकारी मिली। इसमें त्रिमूर्ति आकार की शिव प्रतिमा है, जो 1100 साल प्राचीन है। यहीं से नेवज नदी का उद्मगम हुआ है। भारतीय पुरातत्व विभाग (Archaeological Survey of India) ने यह स्थान सीहोर जिले के जावर के घने जंगल में खोजा था। अब यह देवांचल धाम, देवबड़ला के नाम से लोकप्रिय हो रहा है। इंदौर के ग्रुप राइड्ज ऑफ राइडर्स Rides Of Riders ने इस रविवार को यहां विजिट किया। महाशिवरात्रि को ध्यान में रखते हुए युवाओं की यह टीम 2016 में पुरातत्व विभाग द्वारा खोजे गए 1100 साल पुराने शिवालय पहुंची। ग्रुप एडमिन ज्ञानदीप श्रीवास्तव ने बताया इस राइड में हमारे 20 राइडर सम्मलित हुए थे।
देवबड़ला में प्राचीन भगवान भोलेनाथ का मंदिर है, जो हरियाली से घिरा हुआ है। पर्यटन विकास निगम ने यहां पर पुरा धरोहर को सहेजने का काम शुरू किया है।
जावर के बीलपान ग्राम पंचायत के तहत आने वाले ऐतिहासिक देवबड़ला देवाचंल धाम का इतिहास करीब 1100 साल पुराना है। साल 2016 में दुर्लभ प्रतिमा होने की जानकारी मिलने के बाद पुरातत्व विभाग ने जनवरी 2017 में खुदाई शुरू की थी। इसमें परमाकालीन दो मंदिर मिले थे। इन मंदिरों से 11वीं, 12वीं शताब्दी की 20 प्राचीन व दुर्लभ प्रतिमाएं थी। मंदिर क्रमांक एक शिव मंदिर और मंदिर क्रमांक दो विष्णु मंदिर से मिली प्रतिमा हिन्दू देवी देवताओं की थी। इनमें ब्रमदेव, गौरी, भैरव, भूवराह, देवी लक्ष्मी, योगिनी और शिव नटराज की प्राचीन प्रतिमाएं शामिल थी। पुरातत्व विभाग वर्तमान में यहां 51 फीट ऊंचाई के दो मंदिर का निर्माण करा रहा है, जिसमें एक का काम पूरा हो गया है, जबकि दूसरे का चल रहा है। अब देवबड़ला का नाम पर्यटन स्थल में शामिल हो गया है। हर साल महाशिरात्रि पर मेला लगता है, जिसमें 50 हजार से अधिक लोग सम्मिलित होते हैं।
रास्ता
इंदौर से देवास होते हुए भोपाल रोड पर सोनकच्छ के बाद भोपाल रोड पर ही मेहतवारा गांव आता है। इंदौर से यहां तक की दूरी 80 km है। यहां से सीधे हाथ पे 7 km पर बिलपान गांव आता है। इस गांव से सीधा रास्ता देवांचल धाम को जाता है जो तीन km की दूरी पर स्तिथ है। रोड पूरा बना हुआ है। ज्ञानदीप ने कहा कि परिवार के साथ जरूर जाना चाहिए। बेहद ही सुंदर जगह पर बसा हुआ है।
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देवबड़ला में प्राचीन भगवान भोलेनाथ का मंदिर है, जो हरियाली से घिरा हुआ है। पर्यटन विकास निगम ने यहां पर पुरा धरोहर को सहेजने का काम शुरू किया है।
जावर के बीलपान ग्राम पंचायत के तहत आने वाले ऐतिहासिक देवबड़ला देवाचंल धाम का इतिहास करीब 1100 साल पुराना है। साल 2016 में दुर्लभ प्रतिमा होने की जानकारी मिलने के बाद पुरातत्व विभाग ने जनवरी 2017 में खुदाई शुरू की थी। इसमें परमाकालीन दो मंदिर मिले थे। इन मंदिरों से 11वीं, 12वीं शताब्दी की 20 प्राचीन व दुर्लभ प्रतिमाएं थी। मंदिर क्रमांक एक शिव मंदिर और मंदिर क्रमांक दो विष्णु मंदिर से मिली प्रतिमा हिन्दू देवी देवताओं की थी। इनमें ब्रमदेव, गौरी, भैरव, भूवराह, देवी लक्ष्मी, योगिनी और शिव नटराज की प्राचीन प्रतिमाएं शामिल थी। पुरातत्व विभाग वर्तमान में यहां 51 फीट ऊंचाई के दो मंदिर का निर्माण करा रहा है, जिसमें एक का काम पूरा हो गया है, जबकि दूसरे का चल रहा है। अब देवबड़ला का नाम पर्यटन स्थल में शामिल हो गया है। हर साल महाशिरात्रि पर मेला लगता है, जिसमें 50 हजार से अधिक लोग सम्मिलित होते हैं।
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रास्ता
इंदौर से देवास होते हुए भोपाल रोड पर सोनकच्छ के बाद भोपाल रोड पर ही मेहतवारा गांव आता है। इंदौर से यहां तक की दूरी 80 km है। यहां से सीधे हाथ पे 7 km पर बिलपान गांव आता है। इस गांव से सीधा रास्ता देवांचल धाम को जाता है जो तीन km की दूरी पर स्तिथ है। रोड पूरा बना हुआ है। ज्ञानदीप ने कहा कि परिवार के साथ जरूर जाना चाहिए। बेहद ही सुंदर जगह पर बसा हुआ है।
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