विद्युत वितरण कंपनियों की रैंकिंग मेें अदानी की कंपनी टाॅप पर, मध्य प्रदेश की एक भी कंपनी टाॅप 25 में नहीं
केंद्र सरकार ने देशभर की बिजली कंपनियों की रैंकिंग जारी की है । इसमें मप्र की एक भी बिजली कंपनी टाॅप 25 में नहीं आ पाई। इंदौर की पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को 27वीं रैंक मिली है,जबकि भोपाल की मध्यक्षेत्र वितरण कंपनी को 37वीं रैंक मिली है।
विस्तार
अदानी समूह के शेयर भले ही लुढ़क गए हो, लेकिन उनकी बिजली कंपनी की रैंकिंग टाॅप पर है,जबकि मध्य प्रदेश की चार विद्युत कंपनियों मेें से एक भी टाॅप 25 में नहीं आ सकी। इंदौर की बिजली कंपनी की रैकिंग भी पिछले साल की तुलना में फिसली हैै। पिछले साल पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की 24 वीं रैंक थी, जो तीन पायदान फिसल कर 27 पर जा पहुंची।
केंद्र सरकार ने देशभर की बिजली कंपनियों की रैंकिंग जारी की है । इसमें मप्र की एक भी बिजली कंपनी टाॅप 25 में नहीं अा पाई। इंदौर की पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को 27वीं रैंक मिली है,जबकि भोपाल की मध्यक्षेत्र वितरण कंपनी को 37वीं रैंक, जबलपुर की पूर्व क्षेत्र वितरण कंपनी को 38वी रैंक मिली है। इन दोनों कंपनियों की रैकिंग में 10 अंकों का सुधार हुआ है। पश्चिम विद्युत वितरण कंपनी ने रैंकिंग सुधारने के लिए इस बार स्मार्ट मीटर भी लगाए,लेकिन फिर भी रैंकिंग में सुधार नहीं हो सका।
केंद्रीय उर्जा मंत्रालय देश भर की बिजली कंपनियों को अलग-अलग मापदंडों पर आंकलन कर हर साल रैकिंग और ग्रेड जारी करता है। देश के विद्युत ढांचे को बेहतर बनाने के लिए वर्ष 2012 से सरकार यह रैंकिंग कर रही है।बीते साल के सर्वे में 52 कंपनियां शामिल थी। इसमें राज्य के अधीन व निजी वितरण कंपनियां शामिल है।
इंदौर की बिजली कंपनी जो बीते 24वीं रैंक पर थी इस साल खिसक कर 27वें स्थान पर आ गई। मध्य क्षेत्र कंपनी(भोपाल) जो बीते सात 48वीं रैंक पर थी इस साल 11 रैंक उछलकर 37वें और पूर्व क्षेत्र कंपनी जो बीते वर्ष 47वें नंबर पर थी इस बार नौ स्थान ऊपर उठकर 38 वें स्थान पर आ गई।
यह होगा नुकसान
हर साल बिजली ढांचे को बेहतर बनाने के लिए सरकार द्वारा अनुदान से लेकर विभिन्न योजनाएं जारी की जाती है। इन योजनाओं का लाभ वितरण कंपनियों की रैंकिंग और कार्य की गुणवत्ता के आधार पर दिया जाता है। बिजली आपूर्ति करने वाली जेनरेशन कंपनियां भी रैकिंग के आधार पर सुविधा व लाभ प्रदान करती है। सीधे तौर पर जिनकी रैंक और ग्रेड गिरती है उन कंपनियों पर वसूली बढ़ाने और आर्थिक सेहत सुधारने का दबाव रहता है।
