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Indore: लिट चौक में पहुंचे अभिनेता पंकज त्रिपाठी, बोले- किरदार सच्चा होने के साथ मनोरंजक भी लगना चाहिए
Sat, 17 Dec 2022 09:32 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sat, 17 Dec 2022 09:32 PM IST
सार
इंदौर में आयोजित लिट चौक में पहुंचे पंकज त्रिपाठी ने कहा कि साथ में यह भी ध्यान रखता हूं कि किरदार मनोरंजक लगे। सिनेमा को लेकर दर्शक का पहला मापदंड मनोरंजन है। कोई भी ज्ञान के लिए सिनेमा नहीं देखता।
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इंदौर के लिट चौक में मशहूर अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने भी शिरकत की।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इंदौर में चल रहे लिट चौक फेस्टिवल में शनिवार को अभिनेता पंकज त्रिपाठी खास मेहमान थे। उन्हें देखने के लिए भीड़ भी ज्यादा जुटी। पंकज ने सिनेमा, समाज, साहित्य से जुड़े विषयों पर चर्चा की। जब उनसे उनके अभिनय की सहजता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि- मैं हमेशा अपने अभिनय में कलात्मकता का ध्यान तो रखता हूं। कोशिश रहती है कि किरदार सहज लगे, सच्चा लेगा।
पंकज त्रिपाठी ने कहा कि साथ में यह भी ध्यान रखता हूं कि किरदार मनोरंजक लगे। सिनेमा को लेकर दर्शक का पहला मापदंड मनोरंजन है। कोई भी ज्ञान के लिए सिनेमा नहीं देखता। मनोरंजन के साथ जो सिनेमा ज्ञान दे जाए, तो वह सफल होता है। मैं एक्टिंग के समय यह ध्यान रखता हूं कि समाज में दुनिया में क्या चल रहा है, उसे किरदार से जोड़ा जाए, ताकि दर्शक जल्दी कनेक्ट हो सकें। पंकज बोले कि मैं अक्सर साहित्य की बातें करता हूं, मैंने कभी यह प्रयास नहीं किए कि युवा पीढ़ी मेरी फैन बने, लेकिन पता नहीं मैंने युवाओं की कौन सी नब्ज पकड़ ली।
संचारक्रांति हमारी कल्पनाशक्ति को सीमित कर रही
पंकज त्रिपाठी ने कहा कि जब आप सिनेमा देखते हैं तो विजुअल इमेज आपके दिमाग में छाई रहती है। तब कल्पना का उपयोग नहीं होता। किताबें पढ़ने से कल्पनाशक्ति बढ़ती है, इसलिए सिनेमा का आदमी होते हुए भी मैं किताबों से दूर नहीं रहता। नई पीढ़ी तो हर सवाल गूगल से पूछ लेती है। हम जब बच्चे थे तो गूगल नहीं था। मन में आए हर सवाल को अपनी कल्पनाशक्ति से खोजते थे। संचारक्रांति हमारी कल्पनाशक्ति को सीमित कर रही है। पंकज ने कहा कि सोशल मीडिया पर लोगों को अपनी राय रखने की छूट रहती है, लेकिन यह भी सोचें कि हम यह राय क्यों रख रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिए आप तक जो पहुंच रहा है। उस बारे में चार बार सोचें कि वह आप तक क्यों पहुंच रहा है।
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सरलता डीएनए में है
जब उनसे पूछा गया कि अमिनेता होने के बावजूद आपमें इतनी सहजता कैसे है? तो उन्होंने कहा कि सरलता-सहजता मेरे डीएनए में है। बुनावट हमारी वैसी हुई है। चाहे अमीर हो या गरीब, सब एक ही ऑक्सीजन लेते हैं। जब प्रकृति ने हमें नहीं बांटा तो हम कौन होते हैं एक-दूसरे को बांटने वाले। पंकज ने कहा कि हमें बेसिक से जुड़े रहना जरूरी है। लोग बेसिक भूल जाते हैं।
देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं
पंकज ने कहा कि देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। बस उन्हें निखारने की जरूरत है। मैं एक छोटे से कस्बे से आया। मेरी यात्रा साबित करती है कि यह किसी के साथ भी हो सकता है। बस परिश्रम और प्रयासों में कोई कमी नहीं रहना चाहिए।
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पंकज त्रिपाठी ने कहा कि साथ में यह भी ध्यान रखता हूं कि किरदार मनोरंजक लगे। सिनेमा को लेकर दर्शक का पहला मापदंड मनोरंजन है। कोई भी ज्ञान के लिए सिनेमा नहीं देखता। मनोरंजन के साथ जो सिनेमा ज्ञान दे जाए, तो वह सफल होता है। मैं एक्टिंग के समय यह ध्यान रखता हूं कि समाज में दुनिया में क्या चल रहा है, उसे किरदार से जोड़ा जाए, ताकि दर्शक जल्दी कनेक्ट हो सकें। पंकज बोले कि मैं अक्सर साहित्य की बातें करता हूं, मैंने कभी यह प्रयास नहीं किए कि युवा पीढ़ी मेरी फैन बने, लेकिन पता नहीं मैंने युवाओं की कौन सी नब्ज पकड़ ली।
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संचारक्रांति हमारी कल्पनाशक्ति को सीमित कर रही
पंकज त्रिपाठी ने कहा कि जब आप सिनेमा देखते हैं तो विजुअल इमेज आपके दिमाग में छाई रहती है। तब कल्पना का उपयोग नहीं होता। किताबें पढ़ने से कल्पनाशक्ति बढ़ती है, इसलिए सिनेमा का आदमी होते हुए भी मैं किताबों से दूर नहीं रहता। नई पीढ़ी तो हर सवाल गूगल से पूछ लेती है। हम जब बच्चे थे तो गूगल नहीं था। मन में आए हर सवाल को अपनी कल्पनाशक्ति से खोजते थे। संचारक्रांति हमारी कल्पनाशक्ति को सीमित कर रही है। पंकज ने कहा कि सोशल मीडिया पर लोगों को अपनी राय रखने की छूट रहती है, लेकिन यह भी सोचें कि हम यह राय क्यों रख रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिए आप तक जो पहुंच रहा है। उस बारे में चार बार सोचें कि वह आप तक क्यों पहुंच रहा है।
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सरलता डीएनए में है
जब उनसे पूछा गया कि अमिनेता होने के बावजूद आपमें इतनी सहजता कैसे है? तो उन्होंने कहा कि सरलता-सहजता मेरे डीएनए में है। बुनावट हमारी वैसी हुई है। चाहे अमीर हो या गरीब, सब एक ही ऑक्सीजन लेते हैं। जब प्रकृति ने हमें नहीं बांटा तो हम कौन होते हैं एक-दूसरे को बांटने वाले। पंकज ने कहा कि हमें बेसिक से जुड़े रहना जरूरी है। लोग बेसिक भूल जाते हैं।
देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं
पंकज ने कहा कि देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। बस उन्हें निखारने की जरूरत है। मैं एक छोटे से कस्बे से आया। मेरी यात्रा साबित करती है कि यह किसी के साथ भी हो सकता है। बस परिश्रम और प्रयासों में कोई कमी नहीं रहना चाहिए।
