इंदौर होगा अब और भी स्मार्ट, बिजली चोरी पर ऐसे कसी जाएगी लगाम
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मध्य प्रदेश की स्मार्ट सिटी इंदौर में अब बिजली चोरी रोकने के लिए तगड़ा इतंजाम होने जा रहा है। इसके लिए इंदौर में 12 हजार मीटर लगाए जा चुके हैं। बता दें, इसके लिए पहले चरण का काम पूरा किया जा चुका है। इसके आगे की योजना में चार महीने के भीतर बाकि बचे 63 हजार मीटर लगाने का लक्ष्य दिया गया है। यह कार्य प्रत्येक जोन को मीटर आवंटित कर सौंप दिया गया है। कंपनी का भी यही मानना है कि नए रेडियो फ्रिक्वेंसी मीटर लगाने से उनके राजस्व में बढोतरी होगी और मीटर रीडरों पर भी निर्भरता खत्म होगी।
शहर की पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी रोजाना शहर में पांच सौ से ज्यादा पुराने बिजली के मीटर बदल रही है। विद्युत विभाग के अधिकारियों द्वारा इसका दावा किया जा रहा है। देश में अब तक किसी भी शहर में लगने वाले स्मार्ट मीटरों की यह सबसे ज्यादा संख्या है।
इन स्मार्ट मीटर का शुरूआत में कैट रोड और एआईआर फीडर पर परीक्षण सफल रहा। वहीं नए मीटरों से तीन महीनों के बिल भी जारी किए जा चुके हैं। अब उम्मीद की जा रही है कि सेल्फ मीटर रीडिंग और स्मार्ट मीटर के जरिए आने वाले नए साल में कंपनी करीब एक लाख उपभोक्ताओं की रीडिंग के बिना बिजली बिल हासिल करेगी।
विद्युत विभाग के एमडी आकाश त्रिपाठी ने दावा किया है कि स्मार्ट मीटर को लगाने की एवज में उपभोक्ताओं से कोई पैसा नहीं लिया जा रहा है। उपभोक्ताओं को भी इस मीटर से लाभ मिलेगा। इलाके में बिजली गुल होती है या कोई मीटर से छेड़छाड़ करता है तो कंट्रोल रूम के अधिकारियों को इसका अलर्ट मिल जाएगा।
इन सबकी मॉनिटरिंग के लिए इंदौर में देश का दूसरा सबसे बड़ा कंट्रोल रूम बनाया गया है। कंट्रोल रूम में तैनात अधिकारियों को इन मीटरों के माध्यम से इस बात की जानकारी मिलेगी कि किस फिडर पर बिजली का अधिक लोड आ रहा है, जिससे बिजली की बचत भी की जा सकेगी।
इलाके में बिजली गुल होने के बाद भी यदि लाइनमेन एक घंटे में खराबी ठीक न करें तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। इसके अलावा तय समय में बिल जमा नहीं होने पर दफ्तर से ही कनेक्शन काट दिया जाएगा।
