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अंबेडकर जयंती: ऐसे हुई थी बाबा साहब की जन्मस्थली की खोज, वर्षों के संघर्ष के बाद स्मारक के लिए मिली जमीन
सार
संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के जन्मस्थल की खोज का किस्सा रोचक है। काफी खोजबीन के बाद पता चला था कि वे महू में स्थित बैरक में जन्मे थे। संघर्षों के बाद बैरक की जमीन को हासिल कर यहां स्मारक बनाया गया।
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जिस जगह हुआ था बाबा साहब का जन्म वहां बना है स्मारक
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर महू स्थित उनके स्मारक पर भव्य आयोजन किया जाएगा, लेकिन क्या आपको पता है कि यह स्मारक कैसे बना। इसके पीछे का किस्सा बड़ा रोचक है। आइये जानते हैं कि आखिर कैसे बाबा साहब की जन्मस्थली का पता चला।
दरअसल 1956 में जब बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का निधन हुआ उसके कई साल बाद 1970 में महाराष्ट्र के भंते धर्मशील ने बाबा साहब के जन्मस्थान की खोज शुरू की। असल में यह इसलिए हुआ क्योंकि बाबा साहब के जन्मस्थल को लेकर विरोधाभास था। कुछ लोग उन्हें महाराष्ट्र के रत्नागिरी का मानते थे तो कुछ मध्यप्रदेश के महू का। इसके बाद भंते धर्मशील ने खोज शुरू की। भंते धर्मशील का पता चला कि बाबा साहब के पिता रामजी सकपाल सेना में सूबेदार थे और महू में पदस्थ थे। इसके बाद वे महू पहुंचे। उन्होंने उस बैरक को खोजा जहां पिता रहते थे। वहां पर बाबा साहब के जन्म के प्रमाण मिले। बाद में इसकी आधिकारिक जानकारी भी मिली कि बाबा साहब का जन्म इसी बैरक में हुआ था। वह बैरक 22500 वर्ग फुट का था।
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इसके बाद भंते धर्मशील ने संघर्ष करते हुए सरकार से 22500 वर्ग फीट जमीन उनके स्मारक के लिए हासिल की। कई सालों तक संघर्ष किया। आंबेडकर स्मारक बनाने के लिए डॉ. आंबेडकर मेमोरियल सोसायटी का गठन किया और जमीन हासिल करने के लिए आर्मी व सरकार से वर्षों तक पत्राचार किया। लंबे संघर्ष के बाद 1976 में स्मारक के लिए जमीन मिली। 14 अप्रैल 1991 को 100वीं जयंती पर तत्कालीन मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा ने जन्म स्थली पर स्मारक की आधारशिला रखी। इसी वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी, अटलबिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, कांशीराम, मायावती सहित देश के शीर्ष नेता जन्मभूमि पर एक साथ जमा हुए। स्मारक के अंदर भित्तीचित्र हैं और बाबा साहब का अपनी पत्नी के साथ फोटो भी है। उनका अस्थि कलश भी रखा हुआ है।
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दरअसल 1956 में जब बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का निधन हुआ उसके कई साल बाद 1970 में महाराष्ट्र के भंते धर्मशील ने बाबा साहब के जन्मस्थान की खोज शुरू की। असल में यह इसलिए हुआ क्योंकि बाबा साहब के जन्मस्थल को लेकर विरोधाभास था। कुछ लोग उन्हें महाराष्ट्र के रत्नागिरी का मानते थे तो कुछ मध्यप्रदेश के महू का। इसके बाद भंते धर्मशील ने खोज शुरू की। भंते धर्मशील का पता चला कि बाबा साहब के पिता रामजी सकपाल सेना में सूबेदार थे और महू में पदस्थ थे। इसके बाद वे महू पहुंचे। उन्होंने उस बैरक को खोजा जहां पिता रहते थे। वहां पर बाबा साहब के जन्म के प्रमाण मिले। बाद में इसकी आधिकारिक जानकारी भी मिली कि बाबा साहब का जन्म इसी बैरक में हुआ था। वह बैरक 22500 वर्ग फुट का था।
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इसके बाद भंते धर्मशील ने संघर्ष करते हुए सरकार से 22500 वर्ग फीट जमीन उनके स्मारक के लिए हासिल की। कई सालों तक संघर्ष किया। आंबेडकर स्मारक बनाने के लिए डॉ. आंबेडकर मेमोरियल सोसायटी का गठन किया और जमीन हासिल करने के लिए आर्मी व सरकार से वर्षों तक पत्राचार किया। लंबे संघर्ष के बाद 1976 में स्मारक के लिए जमीन मिली। 14 अप्रैल 1991 को 100वीं जयंती पर तत्कालीन मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा ने जन्म स्थली पर स्मारक की आधारशिला रखी। इसी वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी, अटलबिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, कांशीराम, मायावती सहित देश के शीर्ष नेता जन्मभूमि पर एक साथ जमा हुए। स्मारक के अंदर भित्तीचित्र हैं और बाबा साहब का अपनी पत्नी के साथ फोटो भी है। उनका अस्थि कलश भी रखा हुआ है।
