फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore: This is how the birthplace of Babasaheb Ambedkar was discovered, after many years of struggle, land was found for the memorial

अंबेडकर जयंती: ऐसे हुई थी बाबा साहब की जन्मस्थली की खोज, वर्षों के संघर्ष के बाद स्मारक के लिए मिली जमीन

Chandraprakash Sharma चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Thu, 14 Apr 2022 02:36 PM IST
सार

संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के जन्मस्थल की खोज का किस्सा रोचक है। काफी खोजबीन के बाद पता चला था कि वे महू में स्थित बैरक में जन्मे थे। संघर्षों के बाद बैरक की जमीन को हासिल कर यहां स्मारक बनाया गया। 

विज्ञापन
Indore: This is how the birthplace of Babasaheb Ambedkar was discovered, after many years of struggle, land was found for the memorial
जिस जगह हुआ था बाबा साहब का जन्म वहां बना है स्मारक - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर महू स्थित उनके स्मारक पर भव्य आयोजन किया जाएगा, लेकिन क्या आपको पता है कि यह स्मारक कैसे बना। इसके पीछे का किस्सा बड़ा रोचक है। आइये जानते हैं कि आखिर कैसे बाबा साहब की जन्मस्थली का पता चला।
विज्ञापन


दरअसल 1956 में जब बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का निधन हुआ उसके कई साल बाद 1970 में महाराष्ट्र के भंते धर्मशील ने बाबा साहब के जन्मस्थान की खोज शुरू की। असल में यह इसलिए हुआ क्योंकि बाबा साहब के जन्मस्थल को लेकर विरोधाभास था। कुछ लोग उन्हें महाराष्ट्र के रत्नागिरी का मानते थे तो कुछ मध्यप्रदेश के महू का। इसके बाद भंते धर्मशील ने खोज शुरू की। भंते धर्मशील का पता चला कि बाबा साहब के पिता रामजी सकपाल सेना में सूबेदार थे और महू में पदस्थ थे। इसके बाद वे महू पहुंचे। उन्होंने उस बैरक को खोजा जहां पिता रहते थे। वहां पर बाबा साहब के जन्म के प्रमाण मिले। बाद में इसकी आधिकारिक जानकारी भी मिली कि बाबा साहब का जन्म इसी बैरक में हुआ था। वह बैरक 22500 वर्ग फुट का था।
विज्ञापन


विज्ञापन
विज्ञापन


इसके बाद भंते धर्मशील ने संघर्ष करते हुए सरकार से 22500 वर्ग फीट जमीन उनके स्मारक के लिए हासिल की। कई सालों तक संघर्ष किया। आंबेडकर स्मारक बनाने के लिए डॉ. आंबेडकर मेमोरियल सोसायटी का गठन किया और जमीन हासिल करने के लिए आर्मी व सरकार से वर्षों तक पत्राचार किया। लंबे संघर्ष के बाद 1976 में स्मारक के लिए जमीन मिली।  14 अप्रैल 1991 को 100वीं जयंती पर तत्कालीन मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा ने जन्म स्थली पर स्मारक की आधारशिला रखी। इसी वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी, अटलबिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, कांशीराम, मायावती सहित देश के शीर्ष नेता जन्मभूमि पर एक साथ जमा हुए। स्मारक के अंदर भित्तीचित्र हैं और बाबा साहब का अपनी पत्नी के साथ फोटो भी है। उनका अस्थि कलश भी रखा हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed