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Indore News: अब शुरू हुई नई चर्चा-क्या बड़े शहरों के लिए भाजपा बदलेगी गाइडलाइन...विधायकों को देगी टिकट
Sun, 12 Jun 2022 01:43 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Sun, 12 Jun 2022 01:43 PM IST
सार
महापौर प्रत्याशी चयन में भाजपा में खींचतान जारी है। अब नई चर्चा होने लगी है कि इंदौर, भोपाल जैसे बड़े शहरों के लिए भाजपा गाइडलाइन बदल सकती है और विधायकों को टिकट दे सकती है। इसे लेकर पार्टी में मंथन चल रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
महापौर प्रत्याशी की घोषणा के मामले में भाजपा उलझ गई है। मप्र के चार महानगरों में भाजपा की स्थिति ऐसी हो गई है कि किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पा रही। सीएम के सपनों के शहर इंदौर में स्थिति विकट है और यहां रोज नए नाम चर्चाओं में आ रहे हैं। इसी बीच अब फिर से खबर चली है कि कुछ नगरों में भाजपा विधायकों को चुनाव लड़वाने का फॉर्मूला अपना सकती है।
दरअसल, इंदौर में कांग्रेस ने संजय शुक्ला को प्रत्याशी बनाया है और जिस तरह से शुक्ला मैदान में आए हैं उसने भाजपा को सोचने पर मजबूर कर दिया है। इसके बाद से ही चर्चा होने लगी है कि शुक्ला के सामने भाजपा को ऐसा उम्मीदवार उतारना पड़ेगा जिसका भाजपाई भी सहयोग करे और जो हर मोर्चा पर सक्षम हो। इसी चिंता में भाजपा डूबी हुई है क्योंकि सबसे प्रबल दावेदारी दो नंबरी विधायक रमेश मेंदोला की थी जो शुक्ला के सामने मजबूत नजर आ रहे थे। ब्राह्मण वोटरों के लिहाज से भी मेंदोला की दावेदारी प्रबल थी तो चुनावी मैनेजमेंट के हिसाब से भी, मगर गाइडलाइन का शोर हुआ और कहा गया कि भाजपा विधायकों को महापौर का टिकट नहीं देगी। इसके बाद से समीकरण उलझ गए। बाद में दूसरे नाम चर्चाओं में आने लगे। इनमें नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे का नाम दमदारी से आया तो दूसरे नामों में पुष्यमित्र भार्गव, मनोज द्विवेदी व एक डॉक्टर के नाम चर्चाओं में हैं। इन नामों को संघ की पसंद बताया जा रहा है। हालांकि अभी केवल अटकलें चल रहीं हैं और मुहर किसी नाम पर नहीं लगी है।
इसलिए हो सकता है ऐसा
पार्टी सूत्रों की मानें तो शनिवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में हुई कोर कमेटी व प्रत्याशी चयन समिति की बैठक में इस बात को लेकर चर्चा भी हुई कि इंदौर में कांग्रेस प्रत्याशी शुक्ला के सामने दमदार प्रत्याशी उतारना पड़ेगा। इसके बाद मेंदोला और रणदिवे के नाम सामने आए। हालांकि मेंदोला का नाम गाइडलाइन के चलते उलझा है और कहा जा रहा है कि यदि दूसरे नाम पर सहमति नहीं बनी तो फिर गाइडलाइन को लेकर संगठन स्तर पर बात की जाएगी और कुछ प्रमुख शहरों में अपवाद के तौर पर विधायकों को टिकट दिया जा सकता है, हालांकि यह बहुत मुश्किल लग रहा है लेकिन भाजपा के सामने जो स्थिति है उसे देखते हुए ऐसा किया जा सकता है। यह संभावना इसलिए जताई जाने लगी है क्योंकि बात अकेले इंदौर की नहीं है। भोपाल, जबलपुर व ग्वालियर को भी लेकर भी पेच फंसा हुआ है। यहां भी बड़े नेताओं की पसंद सहमति के आड़े आ रही है इसलिए किसी एक नाम पर आम राय नहीं बन पा रही। हालांकि इसमें उलझन यह है कि यदि कुछ शहरों में विधायकों को टिकट दिया तो फिर बाकी शहरों में भी इसकी मांग न उठने लगे क्योंकि कई शहरों में महापौर उम्मीदवार को लेकर उलझन बरकरार है।
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अभी सिर्फ अटकलें, मुहर पर किसी नाम पर नहीं
भाजपा में रणदिवे और मेंदोला के अलावा तीसरा नाम मनोज द्विवेदी का उभरा है। शहर में चर्चा हो रही है कि द्विवेदी संघ से जुड़े हैं और संघ की पसंद होने के कारण उनका टिकट हो सकता है। वे भाजपा की लीगल सेल के प्रदेश संयोजक है और अभाविप से भी जुड़े रहे हैं। कहा जा रहा है कि संघ से यदि उनका नाम आता है तो फिर सहमति बना ली जाएगी लेकिन फिलहाल यह अटकलें ही हैं क्योंकि पार्टी की ओर से कुछ भी नहीं कहा जा रहा है।
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दरअसल, इंदौर में कांग्रेस ने संजय शुक्ला को प्रत्याशी बनाया है और जिस तरह से शुक्ला मैदान में आए हैं उसने भाजपा को सोचने पर मजबूर कर दिया है। इसके बाद से ही चर्चा होने लगी है कि शुक्ला के सामने भाजपा को ऐसा उम्मीदवार उतारना पड़ेगा जिसका भाजपाई भी सहयोग करे और जो हर मोर्चा पर सक्षम हो। इसी चिंता में भाजपा डूबी हुई है क्योंकि सबसे प्रबल दावेदारी दो नंबरी विधायक रमेश मेंदोला की थी जो शुक्ला के सामने मजबूत नजर आ रहे थे। ब्राह्मण वोटरों के लिहाज से भी मेंदोला की दावेदारी प्रबल थी तो चुनावी मैनेजमेंट के हिसाब से भी, मगर गाइडलाइन का शोर हुआ और कहा गया कि भाजपा विधायकों को महापौर का टिकट नहीं देगी। इसके बाद से समीकरण उलझ गए। बाद में दूसरे नाम चर्चाओं में आने लगे। इनमें नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे का नाम दमदारी से आया तो दूसरे नामों में पुष्यमित्र भार्गव, मनोज द्विवेदी व एक डॉक्टर के नाम चर्चाओं में हैं। इन नामों को संघ की पसंद बताया जा रहा है। हालांकि अभी केवल अटकलें चल रहीं हैं और मुहर किसी नाम पर नहीं लगी है।
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इसलिए हो सकता है ऐसा
पार्टी सूत्रों की मानें तो शनिवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में हुई कोर कमेटी व प्रत्याशी चयन समिति की बैठक में इस बात को लेकर चर्चा भी हुई कि इंदौर में कांग्रेस प्रत्याशी शुक्ला के सामने दमदार प्रत्याशी उतारना पड़ेगा। इसके बाद मेंदोला और रणदिवे के नाम सामने आए। हालांकि मेंदोला का नाम गाइडलाइन के चलते उलझा है और कहा जा रहा है कि यदि दूसरे नाम पर सहमति नहीं बनी तो फिर गाइडलाइन को लेकर संगठन स्तर पर बात की जाएगी और कुछ प्रमुख शहरों में अपवाद के तौर पर विधायकों को टिकट दिया जा सकता है, हालांकि यह बहुत मुश्किल लग रहा है लेकिन भाजपा के सामने जो स्थिति है उसे देखते हुए ऐसा किया जा सकता है। यह संभावना इसलिए जताई जाने लगी है क्योंकि बात अकेले इंदौर की नहीं है। भोपाल, जबलपुर व ग्वालियर को भी लेकर भी पेच फंसा हुआ है। यहां भी बड़े नेताओं की पसंद सहमति के आड़े आ रही है इसलिए किसी एक नाम पर आम राय नहीं बन पा रही। हालांकि इसमें उलझन यह है कि यदि कुछ शहरों में विधायकों को टिकट दिया तो फिर बाकी शहरों में भी इसकी मांग न उठने लगे क्योंकि कई शहरों में महापौर उम्मीदवार को लेकर उलझन बरकरार है।
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अभी सिर्फ अटकलें, मुहर पर किसी नाम पर नहीं
भाजपा में रणदिवे और मेंदोला के अलावा तीसरा नाम मनोज द्विवेदी का उभरा है। शहर में चर्चा हो रही है कि द्विवेदी संघ से जुड़े हैं और संघ की पसंद होने के कारण उनका टिकट हो सकता है। वे भाजपा की लीगल सेल के प्रदेश संयोजक है और अभाविप से भी जुड़े रहे हैं। कहा जा रहा है कि संघ से यदि उनका नाम आता है तो फिर सहमति बना ली जाएगी लेकिन फिलहाल यह अटकलें ही हैं क्योंकि पार्टी की ओर से कुछ भी नहीं कहा जा रहा है।
